Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 30:23 — संदर्भ का आरम्भ और प्रभाव
यह विचार-विस्तार ईश्वर की दया और न्याय की सत्ता को दिखाते हुए मिस्र पर होने वाले दंड का भाग है। यहाँ परमेश्वर यह कहते हैं कि मिस्र के निवासियों को जाति-जाति में बिखेर दूँगा और देश-देश में फैलाऊँगा। यह एक विशाल सामर्थ्य-प्रभाव है जो उस समय के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे को उलट देता है, ताकि मिस्र के लोग अपनी स्थिर शक्ति के बजाय परमेश्वर के निर्णय के अधीन आ जाएँ।
यह पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या प्रकट करता है
इस कर्म से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर जापान-सा नहीं, बल्कि सर्वव्यापक नियंत्रण वाला है—वह राष्ट्रों के क्षितिज को भी बदल सकता है। दंड वह अवसर बनाते हैं जब परमेश्वर अपने लोगों के लिए न्याय की मांग पूरी करता है और उन सत्ता-स्थापनों को चुनौती देता है जो अस्वीकृति और यहूदी-निरंकुशता के सामने टिके रहते हैं। साथ ही यह भी दिखता है कि परमेश्वर की योजना में राष्ट्र-परक भूमिका कभी स्थायी नहीं होती; वह हर राष्ट्र को उसकी राह पर चलते रहने के परिणाम दिखाने के लिए छिटक देता है, ताकि न्याय और भक्तिसेवा के लिए समय बने।
आवश्यक शब्दावली और imagery का स्पष्टीकरण
अन्य संदर्भों से प्रासंगिक संकेत
यह संदेश अन्य प्रवेशों में भी मिलता है जहाँ देव-गणना के अनुसार अस्थिरता के समय इनमें से नयी दिशा निकलती है—उदा. दाऊद के समय राष्ट्र-आत्म-गुलामी के विरुद्ध ईश्वर की सुरक्षा; बेचे-चाल वाले देशों के भीतर परिवर्तन की महिमा; और यह भी कि दण्ड के दौरान भी परमेश्वर अपने विश्वासियों के लिए आश्रय बनाते हैं।
चार्टेड cross-references (संक्षिप्त स्पष्टीकरण)
1) अभिशाप और उद्धार के समय के प्रतीक: पुराने नियम में देशों के विचलन और फिर ईश्वर की पुनःस्थापना के संकेत मिलते हैं।
2) बिखराव के साथ ईश्वर की योजना का उद्घाटन: अश्वस्त राष्ट्र के बीच विवेक और भक्ति का उभार दिखता है।
3) मोक्ष का एकीकरण: जब राष्ट्र विभाजित होते हैं, तब परमेश्वर अपने लोगों को एकजुट करने का मार्ग बनाते हैं।
वर्तमान जीवन-प्रयोग
इस verses से सीख मिलती है कि परमेश्वर की योजना के लिए अस्थिरता और परिवर्तन अपरिहार्य हो सकते हैं। विश्वासियों के लिए यह स्मरण कराता है कि कठिन स्थितियाँ भी ईश्वर के संकल्प के अधीन हैं; हमें अपने Ungodliness के बजाय ईश्वर की दिशा में लौटना चाहिए। व्यक्तिगत पहचान, सामूहिक समाज, और राष्ट्रीय नीतियाँ—हर क्षेत्र में ईश्वर की पूर्ण सत्ता का सम्मान करें।
संक्षिप्त समेकन
यहhozकेल के उद्घोष में परमेश्वर का अधिकार स्पष्ट है: वह राष्ट्रों के निवास-स्थलों और उनकी सत्ता-रचना को निर्देशित करते हैं ताकि न्याय और दया के परम लक्ष्य पूरे हों। हम इस तथ्य को देखते हैं कि दण्ड और निर्गमन एक साथ चलते हैं, और विश्वासियों के लिए यह आश्वस्ति है कि परमेश्वर अपनी बुलाहट निभाते हैं— jab तक कि उसकी महिमा पूरी न हो जाए।
टिप्पणी नोट: इस पाठ पर मौलिक टिप्पणी Parker, Henry, Barnes और Clarke की सार्वजनिक-डायरेक्ट-टिप्पणियों से प्रेरित एक समन्वय के अनुसार है, लेकिन विशिष्ट उद्धरण स्रोत नीचे उद्धृत हैं यदि उपलब्ध हों।
ऐतिहासिक टिप्पणियाँ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से यदि उपलब्ध हों तो उनके छोटे-छोटे उद्धरणों को आवश्यक रूप से दर्ज किया जाएगा।