Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 30:25 – क्यों यह वचन मायने रखता है
यह प्रोफेटिक वचन यह दर्शाता है कि परमेश्वर की सत्ता न केवल भारत-रोम के जैसे राजनीतिक केंद्रों तक पहुँचती है, बल्कि अशुद्ध राजनीति के खेल में भी वह नियंत्रण बनाए रखता है। बाबेल के राजा और फ़रौन के साम्राज्य के बीच की अस्थिरता एक संदेश देती है: परमेश्वर कभी महान शक्तियों के ऊपर नहीं टिकता, वह अपने लोगों के जीवन-यज्ञ के लिए बदलाव लाकर दिखाता है। इस वचन में यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने चुनावित बच्चों की सुरक्षा और उद्देश्य के लिए सामर्थ्य दिखाता है, ताकि वे उसकी राह में चलते रहें और उसकी महिमा प्रकट हो।
सं529क संदर्भ और मूल संदर्भ
यहोवा यह दिखाते हैं कि वह बाबेल के राजा की भुजाओं को मजबूत करेगा और मिस्र के फ़रौन की शक्ति ढीली पड़ेगी—यह एक संकेतन है कि मिस्र की सार्वभौमिक प्रभुता पर नियंत्रण परमेश्वर के हाथ में है। उस समय यहूदा-यहोवा के लोग तबाह और दमन के कगार पर थे; यह वचन उनके लिए आशा है कि ईश्वर उनकी रक्षा करेंगे और अस्थिरता के बीच भी उन्हें पुनः स्थापित करेंगे।
मुख्य संदेश
1) परमेश्वर सत्ता के स्रोत हैं: जब वह कहता है कि भुजाओं को मजबूत या ढीला करेगा, तो वह इतिहास के कोण बदल सकता है।
2) आत्मीय सुरक्षा के लिए प्रभु पर भरोसा: भले ही विदेशी शक्तियाँ उठें, ईश्वर अपने लोगों के साथ हैं और उनकी योजना पूरी होगी।
3) न्याय और आशीष की संयुक्त गतिशीलता: यह वचन बताता है कि अस्थिर राजनीतिक पलों में भी परमेश्वर न्याय के साथ क्रिया कर रहे हैं, ताकि बुराई पर विजय प्राप्त हो और उद्देश्य साकार हो सके।
अन्य पवित्र पाठ से जुड़ाव (Cross-references)
इन संदर्भों में एक सामान्य धुन है: परमेश्वर सत्ता-परिशोधी नहीं है; वह अपने लोगों की दिशा-निर्देशन में कदम-दर-कदम रहते हैं और व्यवस्था को अपना स्वर देते हैं।
छोटे परंतु प्रमुख पाठ
- परमेश्वर अपनी भुजाओं को मजबूत या ढीला कर के इतिहास के ढांचे को मोड़ते हैं।
- राजा-प्रभुत्व के क्षणों में भी ईश्वर की इच्छा सर्वोपरि है।
देवotional reflection
जब हम कठिन राजनीतिक या सामाजिक हालात का सामना करते हैं, तो यह वचन स्मरण कराए कि परमेश्वर अखण्ड और अभीष्ट योजना के लिए सत्ता में है। वह बाबेल के राजा की भुजाओं को मजबूत करेगा या ढीला करेगा—पर वह हर स्थिति में अपने लोगों के लिए सुरक्षित मार्ग और आशा बनाता है। यदि आप आज स्वयं को असुरक्षित या अव्यवस्थित पाते हैं, तो ईश्वर की शक्ति पर भरोसा रखें; वह आपकी सुरक्षा और दिशा के लिए तैयार है।
कुल मिलाकर, यहेजकेल 30:25 हमें याद दिलाता है कि इतिहास के बड़े खेल में भी परमस्वरूप का हाथ है। आपका भाग्य उसकी योजनाओं के अनुरूप है; उसे अपनी राह में चलने दें और देखिए कैसे वह आपकी भुजाओं को मजबूत करके आप को मिस्र की उलझनों से निकालता है।
उद्धृत विचार (उद्धृत विशिष्ट लाइनें): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधे उद्धरण पाठ में नहीं दिए गए हैं; अगर आवश्यकता हो, तो मैं उनके स्पष्ट शब्द-चरणों के संक्षिप्त बिंदुओं को हिंदी में समाहित कर दूँगा।