Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 32:15 परिवर्तनकारी समझ
यहोवा के संदेश में यह वचन बताता है कि मिस्र देश का विनाश एक संकेत है कि परमेश्वर अपनी योजना के अनुसार कृत्य कर रहा है। यह उद्धारक प्रेम के साथ-साथ निंदा और न्याय की ओर इशारा करता है: जब मिस्र की राजनीतिक और सामाजिक संरचना ध्वस्त हो जाएगी, तब लोग जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।
चैप्टर में इस verse की भूमिका
यहेजकेल का यह भाग मिस्र, बशर, आदि राष्ट्रों के विरुद्ध परमेश्वर की कठोर निर्णय की घोषणा है। मिस्र के लिए यह एक चेतावनी है कि उसकी महिमा, सेना और राज्य-व्यवस्था अंत तक मिट जाएंगी। 32:15 में कहा गया है कि मिस्र सूना-शून्य हो जाएगा ताकि लोग यहोवा की सत्ता को अनुभव करें। यह दंड एक उद्देश्यपूर्ण जागरूकता का माध्यम है, न कि केवल दमन का कारण।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse से मुख्य संदेश है- परमेश्वर के न्याय के समय में भी उसकी वफादारी स्पष्ट होती है। जब व्यवस्था टूटकर सब कुछ छिन्न-भिन्न हो जाता है, तब जनता इसे एक संकेत मानती है कि प्रभु सत्ता के केंद्र में है। व्यक्ति-समुदाय के लिए यह शिक्षा है कि प्रभु के निर्देशन के बिना किसी भी सामर्थ्य का स्थायित्व नहीं है।
अन्य बाइबिल से सम्बद्ध विचार
वास्तविक अनुप्रयोग
इस verse से सीख मिलती है कि कठिन समय में भी ईश्वर की सत्ता स्पष्ट होती है। न की जा रही मानवीय आशाओं के बजाय हमें परमेश्वर के पवित्रता-न्याय पर भरोसा रखना चाहिए। मिस्र की तरह, समाज-परिस्थितियाँ कभी-कभी कड़े चैलेंज लाती हैं ताकि व्यक्ति अपने अन्दर छिपी निर्भरता और रुढ़ियों को छोड़कर ईश्वर के मार्ग की ओर लौटे।
संवादात्मक cross-references
1) यरमिया 25:12- यह दिखाता है कि जब राष्ट्र पाप में चला जाता है, तब दंड आता है और तब लोग परमेश्वर की शक्ति को पहचानते हैं।
2) नीतिवचन 16:4- सुनिश्चित करता है कि प्रभु हर चीज का मालिक है, और वह निर्णय करता है कि कौन-सी व्यवस्था टिकेगी।
3) इब्रानियों 12:11— पाप के दंड को समय-समय पर सहन करना कठिन है परन्तु उसके फल पुण्य-उद्धार के लिए होते हैं।
संक्षेप निष्कर्ष
यहेजकेल 32:15 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने न्याय के माध्यम से ताकतवर संकेत देता है कि किन स्थितियों में वह Según सत्ता-प्रकट करता है। मिस्र की तबाही एक चेतावनी है कि ईश्वर के नजदीक आना ही जीवन का सही रास्ता है। जब सब कुछ ध्वस्त होता है, तब भी परमेश्वर का अधिकार स्थिर रहता है और लोग उसके बारे में सचेत होकर सत्य-मार्ग की ओर लौटें।
महत्त्वपूर्ण उद्धरणों की नोटिस
यदि उपलब्ध हो, Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मौलिक उद्धरण इस पंक्ति में संक्षेप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।