Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



मुख्य व्याख्या बिंदु
यहोशू के समय के विपरीत एक बार फिर ईश्वर यहूदियों के लिए कड़ी दंड की बात कहते हैं: मिस्र पर भविष्य में चालीस वर्ष की निराशाजनक दशा और समाज-सम्पादन के बिना खण्डहर बन जाना। यह चेतावनी है कि परमेश्वर की अदालत असंयमित शक्ति के साथ होकर भी, वित्तीय या राजनीतिक क्षति से अधिक, राष्ट्रीय पहचान और स्थायित्व पर आघात देगी। साथ ही यह धैर्यपूर्वक पुनर्स्थापना की आशा भी रखती है, ताकि मिस्रमिश्र के लोग अपनी स्थिर राज्य-स्थिति से बाहर निकलकर विनष्टता के बीच से बचाव का रास्ता खोजें।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
यह गवाही ईजकिएल के प्रकल्पित संदेश का भाग है जिसमें परमेश्वर ने ईजकिएल के माध्यम से चिह्नित किया कि मिस्र की महत्ता और उसकी अलग-थलग स्थिति एकदम क्षीण हो जाएगी। यह एक ऐसे समय का भाग है जब नबियों के माध्यम से अन्य राष्ट्रों के दंभ और अवहेलना पर रोक लगती है और न्यायोचित नियम-परिरक्षण का उद्घोष होता है। लय और इरादा में मिस्र के नगरों की खंडहरता स्पष्ट भाषा में कही गई है, ताकि भविष्य में भी यह स्मरण रहे कि सत्ता और धन स्थायी नहीं है और परमेश्वर ही सत्ता के वास्तविक मालिक हैं।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व ( theological significance )
पवित्रशास्त्रीय क्रॉस-रेफरेंस (Cross-references)
1) इज़राइल के न्याय के लिए चेतावनियाँ — अन्य नबियों के दंडादेश: यह चेतावनी एक सामान्य सिद्धांत दिखाती है कि घमंड और अवहेलना का दंड है, परन्तु परमेश्वर का समर्पित दिल से उद्धार भी संभव है।
2) अन्य भाषाओं में दंड-उद्धार की नीति — भविष्य में आशा की बीज: परमेश्वर अपने लोग द्वारा बदली-तर्जीह पर भी मार्ग खोलता है।
3) प्रकृति और राष्ट्र के विनाश के बीच पुनःस्थापना का तत्त्व — यह दंड कान्ति-आख्यान का एक भाग है जिसमें पुनःउद्धार की संभाषणीय संभावना निहित है।
प्रतिबिंबन प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोवा मिस्र के लिए चालीस वर्ष की कठोर यात्रा की योजना बताते हैं ताकि एक समय में वह अपनी महत्ता का सावधानी से मूल्यांकन कर सके। यह दंड एक साथ पुनःस्थापना की राह भी खोलता है, जहाँ अत्याचार नहीं बल्कि सद्भाव और बंधुत्व आत्मसात होते हैं।
प्रमुख टिप्पणीकारों से संक्षेप उद्धरण (quotation)
यह भाग सार्वजनिक-डायरेक्ट स्रोतों से संग्रहीत पारंपरिक विचारों का संक्षेप है। विशेष उद्धरण: “The day of visitation is come upon Egypt” जैसी पंक्तियाँ कुछ टिप्पणीकारों में मिस्र के दंड की आध्यात्मिक व्याख्या के रूप में मिलती हैं; नीचे दिए गए मतों में उनका संक्षेप संदर्भ है।
नोट: नीचे के उद्धरण केवल संदर्भणीय हैं; पूर्ण टेक्स्ट उद्धृत नहीं किया गया है।
Cross-references के लिए पाठक हल्के से देखें: मिस्र के दंड और पुनर्स्थापना के विषय से जुड़े अन्य प्रकरण; अन्य नबी-उत्पादन जहाँ न्याय-करुणा के साथ उद्धार का संदेश जुड़ा है।