Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48


यहेजकेल 29:13 - संदर्भ और अर्थ
यहेजकेल 29 में परमेश्वर मिस्र के बारे में स्पष्ट रूप से बोलते हैं कि समय आने पर वे फिर से समुदायों के बीच से इकट्ठे किए जाएँगे। 29:13 में कहा गया है कि चालीस वर्ष बाद मिस्री समुदाय उन जातियों के बीच से संकलित होंगे जिनमें वे बिखरे हुए थे। यह भविष्यवाणी एक तेजी से बदलते विश्व-परिदृश्य में ईश्वर की योजना की प्रकृति को दर्शाती है: दाख़िल-नम्रताओं के बावजूद भी उनकी दया और न्याय की दृष्टि स्थिर रहती है, और इतिहास में होने वाली बिखराव के पृष्ठ पीछे हटकर फिर से एक उद्देश्यपूर्ण समुदाय का निर्माण होता है।
मुख्य अर्थ
यह आयत दो प्रमुख संकेत करती है: पहले, दया और न्याय का संयोजन—नुकसान के बाद भी ईश्वर अपनी योजना को पूरा करते हैं; दूसरे, यह समय-सीमा के भीतर पुनर्गठन की पुष्टि है—चालीस वर्ष के बाद मिस्र वापस अपनी पहचान और स्थायित्व पाएगा। यह केवल एक राजनीतिक पुनरुत्थान नहीं, बल्कि परमेश्वर की नियति के अनुरूप स्थायित्व, सुरक्षा और उम्मीद की पुनर्स्थापना का संकेत है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित पदयोजना (Cross-references)
- यशायाह 11:11-12 से यह संकेत मिलता है कि बिखरे लोग एक जगह पर लौटने की व्यवस्था ईश्वर द्वारा होती है; भले ही समय लगा हो, उद्धार का उद्देश्य पूरा होता है।
- यिर्मयाह 29:14 में भी ईश्वर कहता है कि वे वापस लौट आएँगे और उनके केंद्र बिंदु में फिर से निवास बनाएँगे; यह उसी पुनर्गठन की पुष्टि है जो यहूदियों के संदर्भ में भी मिलता है।
- प्रेरितों के कार्य 3:19-21 उन घटनाओं की पारलौकिक दिशा दिखाते हैं जहाँ पुर्नस्थापना और समय-सीमा के भीतर आशीष मिलती है, जबकि पाप-परंपराओं से मुक्त हो जाना आवश्यक होता है।
व्यावहारिक मनन
हमारी अपनी ज़िंदगी में भी अक्सर विखंडन और दूरी के क्षण आते हैं—परिस्थितियाँ, कठिनाइयाँ और अस्थिरता। इस आयत से प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर के लक्ष्य में आशा और पुनर्निर्माण संभव है, भले देर लगे। अगर आप टूटे-फूटे अनुभवों से गुजर रहे हैं, तो याद रखें: उसका समय एक निश्चित है और वह पुनः एक साथ लाकर नई आशा देता है।
छोटा सार
चालीस वर्ष के बाद मिस्रियों का फिर से एकत्र होना यह दिखाता है कि ईश्वर की योजना समय से परे भी पूरी होती है—वह बिखरे लोगों को एक साथ लाकर स्थायित्व और उद्धार देता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से संकेत
यह आयत संघर्ष-ग्रस्त इतिहास में भी ईश्वर की न्यायप्रियता और उद्धार-योजना की स्थिरता की याद दिलाती है। यह पूर्ववर्ती और आगे के दायित्वों के बीच संतुलन बनाते हुए विश्वासियों को आशा और धैर्य प्रदान करती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण चेतावनी: उक्त विद्याओं के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे शब्द उद्धृत उद्धरण इस संकलन में प्रयोग नहीं किए गए हैं; यदि आपको इन टिप्पणीकारों के संदर्भित वाक्यों के शाब्दिक अंश चाहिए हों, तो मैं उपयुक्त उद्धरण चयन कर दूँगा।
संक्षेप: यहेजकेल 29:13 भविष्य की पुनर्स्थापना और ईश्वर की निरंतर योजना की पुष्टि करता है—चालीस वर्ष बाद भी उद्धार और पुनर्मिलन की आशा जीवित रहती है.