Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 29:18 पर हिन्दी टिप्पणी
यह भाग यहाजकेल के व्याख्यान में बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर द्वारा सोरों के विरुद्ध संचालित सैन्य अभियान की एक कठोर वास्तविकता को दिखाता है। शास्त्रीय तौर पर यह वचन एक विशाल परिश्रम, थकान और असफलताओं से भरे Battle-सेनाओं के पक्ष में है; यहाँ राजा ने एक बड़े युद्ध-परियोजना पर लाखों सैनिकों को संलग्न किया, परन्तु उसे परिणाम नहीं मिला। यह passage परमेश्वर के नियंत्रण में युद्ध-परिणाम के संकेतों को याद दिलाता है: मनुष्य की योजना कितनी भी बड़ी क्यों न हो, परमेश्वर के निर्णय के सामने उसकी सफलता निर्भर नहीं रहती।
पद का संक्षेप और अध्याय के भीतर उसका स्थान
29:18 में यहूदियों के इतिहास के एक दुभाग्यपूर्ण क्षण का वर्णन है—शोर और सोर की घाटी में निर्भर शक्ति की परिक्षा। नबूकदनेस्सर का बड़ा सेनापतित्व, हर सैनिक का थकना, और परिश्रम के बावजूद प्राप्त नहीं हुआ लाभ—ये सब संकेत देते हैं कि परमेश्वर के निर्णय से ऊपर कोई मानव-योजना नहीं ठहरती। यहेजकेल को तोड़-फोड़ भरे दर्शन नहीं, बल्कि यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए योजनाएँ बनाते हैं और वे किस तरह विपरीत परिस्थितियों में भी उनके लिए उद्धार व सुरक्षा के मार्ग खोलते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य प्रमुख सुसंगत संदर्भ
• दानियेल 4:25-27: परमेश्वर पाठकों को स्मरण कराते हैं कि राजा की गिनती और सेनाओं की चालें अंततः देव-निर्णय के अधीन हैं।
• यिर्मयाह 25:9-11: एक चेतावनी कि महान शक्तियाँ भी परमेश्वर के कारण समय के अनुसार टूट सकती हैं, परन्तु उसका उद्देश्य सत्य रहता है।
• स्तोत्र 33:16-17: मनुष्य की शक्ति कभी-कभी बड़े युद्धों में भी सुरक्षित नहीं होती; विश्वास ही आश्रय है, न कि रथ या धनुष।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- जब भी बड़े−बड़े योजनाओं को लेकर हम ambitious हों, तो ध्यान रहे कि परिणाम परमेश्वर के उद्देश्य से मेल खाते हों या नहीं; यदि नहीं, तो धैर्य और आत्म-संयम आवश्यक है।
− निराशा के क्षणों में प्रभु की sovereignty (सार्वभौम सत्ता) पर टिका रहना चाहिए; युद्ध-जागरूकता भी परमेश्वर की ओर से मिलती है, न कि मानव-उत्साह से।
कथन पर विचार और क्रॉस-रेफरेंस
क्रॉस-रेफरेंसेज़: दानियेल 4:25–27, यिर्मयाह 25:9–11, स्तोत्र 33:16–17
सूत्रगत टिप्पणी: यहेजकेल के अन्य भागों में भी यह विचार बारम्बार आता है कि परमेश्वर की योजनाओं पर मानव-योजना अप्रभावी होती है—यह एक मुख्य पाठ है जो विश्वास के लिए स्थिर आधी है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
29:18 यह दिखाता है कि इंसानी परिश्रम कितना भी महान क्यों न हो, यदि परमेश्वर की योजना के विरुद्ध हो, तब परिणाम असफल रहते हैं। परमेश्वर के नियंत्रण के नीचे ही इतिहास का मार्ग बनता है; इसलिए विश्वसनीयता और धैर्य से उसका उद्देश्य समझना चाहिए।
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