Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 29:4 पर टिप्पणी
यह वाक्य यहेजकेल की ऋतु-उद्धृत भविष्यवाणी के भाग के रूप में आ आता है, जिसमें ईश्वर द्वारा मिस्र के शासन और उसकी निर्बलता का प्रतीकात्मक चित्र प्रस्तुत किया गया है। यह अध्याय यहूदियों के लिए दिव्य दंड और फिर उद्धार के क्रम की पंक्तियों को दर्शाता है। इस verses में ईश्वर ने नाकाबिलीय नकेल और जल-जीवों के उदाहरण के माध्यम से अत्याचारपूर्ण शासन के अंत और प्रेरित लोक के लिए नई दिशा की रूपरेखा दिखाई है।
पद का अध्याय में स्थान
यह अध्याय वर्तमान में तूफानी शासन के अंत और प्रायश्चित्त के समय की तैयारी को दर्शाता है। 29वें अध्याय में ईश्वर के क्रोध की चेतावनियाँ हैं, परन्तु अंततः आशा और परिवर्तन का संदेश है। इस verse में अस्थिर सत्ता और समुद्री-जीवों के साथ एक शब्द-चित्र प्रस्तुत है, जो सत्ता के जकड़ने और तबाही के समय को दर्शाता है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
इस वाक्य का केंद्र बिंदु यह है कि परमेश्वर अपनी צדकता के अनुसार शासन करता है, और जब जरूरत होती है, वह सत्ता को नियंत्रण में लेता है ताकि उसे दया और परिस्फुटित योजना के अनुसार नये मार्ग मिलें। नकेल डालना और खाल में चिपकना—यह प्रतीकात्मक भाषा है जो आत्म-निर्भरता के विपरीत निर्भरता पर जोर देती है। परमेश्वर के न्याय के साथ एक उम्मीद भी जुड़ी है: बिना न्याय के भी उद्धार संभव है, यदि लोग अपने मार्गों को पलट दें और उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलें।
अनुवादित पाठन के साथ तुलना
इस वाक्य में यह भाव स्पष्ट है कि बाह्यम दबावों से मनुष्य की हालत सुधरती है, परन्तु यह भी कि आंतरिक परिवर्तन पहले आए। मत्ती-हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के बुजुर्ग टिप्पणियों के जनक-उद्धरण इस विचार को पुष्ट करते हैं कि दंड तब ही सत्य घटनाओं को मोड़ देता है जब मनुष्य उसकी आवाज़ सुनकर अपने रास्ते बदलते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त अर्थ
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि दंड एक मार्गदर्शक संकेत है, न कि अंतिम निष्कर्ष, और परमेश्वर की मित्ती और दया के साथ जुड़ा रहता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
सारांश
यहेजकेल 29:4 में दिखते प्रतीक न्याय और नियंत्रण की तस्वीर है—जो सत्ता को नकेल डालकर और जल-जीवों के खाल में चिपकाकर दिखाते हैं—परन्तु उस सबके पीछे एक उद्देश्य है: लोगों को अपनी राह से मत टलना, दयालु परिवर्तन के मार्ग पर लौटना। इस संदेश में हमें भरोसा मिलता है कि परमेश्वर जब जब उचित तर्ज पर दंड देता है, तो उसके पीछे उद्धार और नई राहें भी निहित होती हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (क्रेडिट्ड स्रोत): यह भाग केवल सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संकेत-सी संरचना पर आधारित है; Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षेपित विचार सीधे उद्धृत नहीं हैं, पर उनके प्रकार्य विचार इस पाठ के समझ को गहराते हैं।