Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



अर्थ का सीधा सार
यहोवा कहता है कि मिस्र की दासता से अब वे liberation पाएँगे और पाठ के अनुसार उन्हें फिर वे अपना जन्म-भूमि होने वाले पत्रोस देश में वापस पहुँचाया जाएगा; वहाँ उनका छोटा सा राज्य स्थापित होगा। यह उद्धार-योजना स्थापना के बाद की नई स्थिति का संकेत है, जिसमें भागीदारी और पुनरुत्थान की उम्मीद जुड़ी है।
परिप्रेक्ष्य और पृष्ठभूमि
यहेजकेल की किताब में व्याख्यात्मक रूप से बंधुत्व, दासता और पूण्य-नवीकरण की थीम बारम्बार उभरती है। इस वचन में यहूदियों के साथ-साथ मिस्र के साथ जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियाँ उपस्थित हैं। बाबुल की captivity के दौरान यह भविष्यवाणी एक नई सत्ता, गिनती और राष्ट्र-निर्माण का संकेत देती है, जिसमें परमेश्वर अपने चयनित लोगों को bondage से मुक्त करके नई पहचान देता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
प्रमुख विचार (संश्लेषित व्याख्या)
यह पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने दासों को मजबूत बनाते हुए, उन्हें आत्म-विश्वास देकर, पूर्व की पीड़ाओं के बाद एक नई राजनीतिक-धार्मिक स्थिति में स्थापित करते हैं। दासता से मुक्त होना केवल एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि जीवन-परिवर्तन का आरंभ है।
संदर्भ-चिन्ह और संयोग
1) यहेजकेल 34:13-14 में पश्चात्ताप और पुनर्स्थापन की व्यापक योजना; 2) यिर्मयाह 30:3-11 में उद्धार और लौटने की व्यापक भविष्यवाणी; 3) एक अन्य संदर्भ में यहूदी राष्ट्र-निर्माण की आशा का पुनर्निर्माण दिखता है। इसका उद्देश्य यह है कि परमेश्वर अपने लोक के आध्यात्मिक और सामाजिक पुनर्निमाण को सुनिश्चित करते हैं, भले ही वे वर्तमान में दास हों।
छोटी सी निष्कर्ष-यात्रा
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनकी व्याख्या
- यशायाह 11:11-12: पुनर्प्राप्ति की व्यापक योजना का संकेत देता है कि लोक को एक साथ लौटना और एक नए राष्ट्रीय-आत्म-समर्थन के साथ एकत्र होना संभव है।
- एतिहासिक उद्धार-योजनाओं का संदर्भ: पुराने वक्त के भविष्यवक्ताओं के मतों में दासता से मुक्त होना और खतरे के बीच पुनःस्थापना का क्रम बार-बार आता है, जो ईश्वर के विश्वास के साथ जुड़ा रहता है।
- मिस्र-चालाकी और उद्धार: पूर्व इतिहास से शिक्षा मिलती है कि परमेश्वर ज्यात्री और दयालु होकर उद्धार दिलाते हैं, भले ही परिस्थितियाँ कठिन हों।
व्यावहारिक सूत्र
इस वचन से सीख मिलती है कि परमेश्वर की योजना में esperanza और धैर्य बनाए रखें। दासता के समय भी विश्वास बनाये रखने से भविष्य में उद्धार और पुनर्स्थापना संभव है। व्यक्तिगत जीवन में भी कठिन समय में परमेश्वर की बात पर टिके रहें और छोटे-छोटे कदमों से नई स्थिति बनाने की प्रतीक्षा करें।
उद्धृत करने योग्य मौलिक टिप्पणियाँ: यह पाठ public-domain टिप्पणीकारों के स्वर से अद्यतन किया गया है; Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke का संक्षिप्त संकेत यह सुनिश्चित करता है कि उनके अधिकांश निष्कर्ष एकीकृत रूप से समझ में आएँ।