Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहोवा का उद्धार करने वाला एक नया पंख: यहेजकेल 29:21 की व्याख्या
मुख्य interpretive point: इस वचन में भविष्य की आशा उभरती है कि निर्जीव प्रतीत हो चुके यहूदियों के बीच परमेश्वर एक बार फिर से सामर्थ्य से लड़ने और उद्धार करने के लिए एक “सींग” उगाएगा। यह चिह्न है कि परमेश्वर वह पहल करने वाला है जो अपने लोगों की स्थिति को पलट सकता है, और वे अंततः यह मान लेंगे कि वह यहोवा है।
कथात्मक संदर्भ (Literary context)
यहेजकेल पुस्तक के भीतर यह भाग बनता है जब परमेश्वर यहूदियों के भविष्य के उद्धार के प्रकट संकेत देता है। यहेजकेल ने जब-जब अत्याचार और निराशा देखी, तब परमेश्वर की सत्ता और एक ठोस आशा पर टिके रहने के लिए बोलना शुरू किया। अध्याय 29 में विरोधी शासन और नष्टता की बात है, पर अंत में निकासी और पुनर्जन्म की संभावना उद्घाटित होती है—जहाँ “सींग” एक प्रतीक है जो सत्ता, विजय और एक नई नेतृत्व-यात्रा को दर्शाती है।
केंद्रीय शिक्षण (Theological significance)
यह वचन बताता है कि परमेश्वर अपने लोक के लिए एक नया क्षितिज खोल रहा है—विश्वासयोग्य नेता, विजय, और नई पहचान। “तेरा मुँह खोलूँगा” कहना यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों की बोलचाल, नीति और दायित्वों को फिर से स्थापित करेगा; वे अपने परमेश्वर की सत्ता को अनुभव करेंगे और यह पहचानेंगे कि वह यहोवा है। यह उद्धार के दौरान वैचारिक-पारिस्थितिकी में परिवर्तन का संकेत देता है: शक्ति, मार्गदर्शक नेतृत्व, और आशा का पुनः प्रस्थापन।
ग्रंथ-संपर्क (Cross-references)
इन संदर्भों में संदेश समान है: परमेश्वर अपने स्वामित्व और सत्ता के साथ गति दे रहा है, जिससे मानवीय निर्बलता के बीच भी उत्पन्न होने वाली विजय संभव हो सके।
आत्मिक-परिचर्चा (Questions for reflection)
निष्कर्ष (Conclusion)
यहेजकेल 29:21 हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक नये सिरे से नेतृत्व-प्रक्रिया आरम्भ करेगा। “सींग उगाऊँगा” एक ऐसी शक्ति का प्रतीक है जो शासन, विजय और न्याय को फिर से स्थापित करेगी। वे जानेंगे कि परमेश्वर यहोवा है—जो अपने लोगों के बीच प्रत्यक्ष और प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है। हमारे लिए भी यह प्रेरणा है कि निराशा के दौरान विश्वास बनाए रखें, क्योंकि ईश्वर अपने समय पर नये मार्ग खोलता है और अपने लोगों को एक नई पहचान के साथ उठाता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain टुकड़े): इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्वतंत्र विचारों से प्रेरित निष्कर्ष संकलित हैं। आवश्यक स्थान पर उनके विचारों से त्वरित संकेत include किए गए हैं, पर पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं ताकि उनके विशिष्ट शब्दों की फुल-टेक्स्ट प्रतिलिपि न हो।