यहेजकेल 29:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

चालीस वर्ष तक उसमें मनुष्य या पशु का पाँव तक न पड़ेगा; और न उसमें कोई बसेगा।

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यहेजकेल 29:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहोशयाह नहीं, यहेजकेल 29:11 का स्पष्ट अर्थ

यह आयत एक दिव्य प्रत्याख्यान के रूप में भविष्य के शान्ति-विह्वल समय के संकेत देता है: चालीस वर्ष तक वहाँ मनुष्य या पशु का पाँव तक न पड़ेगा; और न उसमें कोई बसेगा। इसका तात्पर्य यह है कि मिस्र के तटस्थ नगरों और उपयुक्त क्षेत्रों में एक विशिष्ट अवसादन और निष्कासन होगा, ताकि प्रतापी शासन-व्यवस्था के विरुद्ध यह चेतावनी ठोस रहे।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यहेजकेल की पुस्तक में समय-समय पर पाप के परिणामस्वरूप सीमाओं और निकासी की भविष्यवाणियाँ मिलती हैं। इस आयत में, एजिप्ट पर आने वाले दुष्परिणामों की एक विशिष्ट अवधि बताई गई है—चालीस वर्ष का निर्जन-काल। यह शारीरिक शांतन और आस्थागत परिदृश्य दोनों संकेत करता है कि वह भूमि तब तक जीवित-जीवन से वंचित रहेगी जब तक परमेश्वर की योजना पूरी न हो।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • निर्वासन का अवधि-चिह्न: चालीस वर्ष एक पूर्ण, परिश्रमी अवधि का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका उद्देश्य सुधार और पुनर्निर्माण है।
  • संतुलनात्मक न्याय: इस दंड के साथ परमेश्वर मिस्र के शासन-तंत्र को चुनौती देते हैं ताकि अन्य राष्ट्र भी उसकी गम्भीरता समझें।
  • आश्रय-प्रतिफल: बाद के समय में वही भूमि फिर से आशीर्वाद पाती है, जब परमेश्वर की योजना की पूर्णता हो जाती है।

संलग्न अध्यायों से संकल्पनाएं

इन विशिष्ट विचारों को नीचे के क्रॉस-रेफरेंसेस से जोड़ा जा सकता है:

  • यशायाह-यश की भविष्यवाणी में दोष और दंड के चक्र का उल्लेख मिलता है; यह दिखाता है कि परमेश्वर के न्याय से बचना संभव नहीं।
  • यिर्मיה-नायकों में भी दंडित क्षेत्र और फिर पुनर्निर्माण का क्रम मिलता है, जो चालीस वर्ष की प्रतीक्षा-काल के समान है।
  • पननस के प्रशासनिक निषेध और फिर पुनर्स्थापना के उदाहरण यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर की योजना volveriar है—प्रथम कठोर, फिर दयालु।

कथन-सार और थीम

मुख्य विचार यह है कि परमेश्वर के निर्णयों में समय का नियम है—चालीस वर्ष की निर्जनता एक विशिष्ट चरण है जिसमें उपस्थिति-स्वरूप बाध्यता होती है ताकि वह नया कार्य आरम्भ हो सके। यह चेतावनी नहीं बल्कि परिवर्तन के अवसर की ओर संकेत है।

व्यावहारिक takeaway

हमारे जीवन में भी समय-काल के प्रति धैर्य और आत्म-नियंत्रण आवश्यक है। परमेश्वर की योजनाओं में जब भी कठिनाई आए, विश्वास रखें कि वह पुनः संसार को उसकी सही दशा में स्थापित करेगा। सभी परिस्थिति में ईश्वर की पेड-आधार की योजना पर भरोसा रखें और शांति बनाए रखें।

संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस

1) अन्य जगहों में दंड-और-निर्माण के क्रम हैं; 2) न्याय की धार और पुनर्स्थापना की आशा; 3) एक समय-सीमा को पूरा होते देखना—ये तीनों विषय यह दिखाते हैं कि परमेश्वर के निर्णय क्रमिक और लक्ष्य-उन्मुख होते हैं.

नोट: इस पंक्ति के लिए मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क से संक्षिप्त, सीधे उद्धरण उपलब्ध हों तो उन्हें यहाँ आवश्यकतानुसार स्लाइस किया गया है, परन्तु पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है ताकि पाठ-दर्शी प्रकाश में रहे कि यह एक टिप्पणी-सार है, न कि पूर्ण पाठ।

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यहेजकेल 29:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहेजकेल 32:13 (HINIRV) »
मैं उसके सब पशुओं को उसके बहुत से जलाशयों के तट पर से नाश करूँगा; और भविष्य में वे न तो मनुष्य के पाँव से और न पशुओं के खुरों से गंदले किए जाएँगे।

यिर्मयाह 43:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 43:11 (HINIRV) »
वह आकर मिस्र देश को मारेगा, तब जो मरनेवाले हों वे मृत्यु के वश में*, जो बन्दी होनेवाले हों वे बँधुआई में, और जो तलवार के लिये है वे तलवार के वश में कर दिए जाएँगे। (प्रका. 13:10)

दानिय्येल 9:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
दानिय्येल 9:2 (HINIRV) »
उसके राज्य के पहले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुँचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात् सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।

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