Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहोवा के लिये पवित्र — यहेजकेल 48:14 (HINIRV)
सीधे शब्दों में अर्थ: यह उपदेश देता है कि क्षेत्र के एक भाग को न तो बेचा जाए, न बदला जाए, न उसकी पहली उपज किसी अन्य को दी जाए; क्यों कि यह क्षेत्र यहोवा के लिये पवित्र है और उसे समर्पित है।
परिप्रेक्ष्य पृष्ठभूमि
यहेजाक्काल के समय इस राशीय भाग का विनिर्देशन यहूदियों के भविष्य की राजधानी और देहाती व्यवस्था से जुड़ा है। यहूदा के टुकड़ों में से हर एक भूखंड एक खास उद्देश्य और सीमाओं के साथ निर्धारित था। यहाँ क्षेत्र की ‘पवित्रता’ संकेत करती है कि परमेश्वर की उपस्थिति और उसकी सेवा के लिए विनियोजित समृद्धि तथा भूमि की dues एक समान नहीं हो सकतीं; उनका उद्देश्य निश्चित है और मानवीय कारोबार से मुक्त रखना था।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
महत्वपूर्ण निष्कर्ष (थीमिकल स्नैपशॉट)
संबद्ध ग्रंथ-उद्धरण (आलोचनात्मक संकेत)
नीचे दी गई धारणा के साथ किन्हीं प्लेटफॉर्म-प्रदत्त टिप्पणियों से मिलते-जुलते विचार Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-डायन-टिप्पणियों में मिलते हैं। इनमें से सीधे उद्धरण की छोटी-सी पहचान है:
“He shall not sell thereof” — यह परमेश्वर की यीशु-प्रतिज्ञा के अनुरूप है कि सम्पत्ति की पवित्रता और दायित्व अस्थिर नहीं होने चाहिए; यह संकल्पना Henry और Clarke के भावनात्मक-आत्मीय विवेचनाओं में उभरती है।
नोट: उपरोक्त उद्धरण एक संक्षिप्त संदर्भ है; पूरी उद्धरण-वाक्यांश जैसे "the land shall not be sold forever" आदि पैगंबर-व्याख्याओं में मिलते हैं, पर यहाँ पूर्ण वाक्य नहीं दिया गया है।
अन्य शास्त्रीगत संकेत (संक्षिप्त संदर्भ)
एक-एक करके इन टिप्पणीकारों की प्रमुख धारणा—
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप explanations)
अन्य प्रेषित संदर्भ जो समान विचार उत्पन्न करते हैं, वे प्रायः प्रकारिक रूप से “प्रायश्चित्त और पवित्रता” के सिद्धांतों से जुड़ते हैं। उदाहरणार्थ, भू-सम्पत्ति के विशिष्ट दायित्व और यहोवा-सम्पत्तियों के संरक्षण के लिए निर्देशित निषेध, परन्तु पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है।
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
जब हम अपनी सामर्थ्य से कुछ भी देते हैं या बचाते हैं, तो यह परमेश्वर के लिये समर्पण और पूरे समुदाय के लिये स्थिरता का संकेत है। किसी भी संपत्ति का प्रयोग भला और ईश्वर-निष्ठा के अनुसार होना चाहिए; हमारी व्यवहार-निर्णयों में एक पवित्रता-चेतना बनी रहे।