Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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महत्व का सीधे अर्थ
यह pasaj जो यहेजकेल 48:29 में है, वह कहता है कि किन्तु भूमियाँ—याकूब के बंशों के लिए—वह बँटी होंगीं, और वे उनके भाग हैं, जो परमेश्वर यहोवा ने निर्धारित किए हैं। सरल शब्दों में: दिव्य नियति के अनुसार हर दल को अपना निर्धारित क्षेत्र मिलेगा।
संदर्भ-वृत्तांत
यहेजकेल के वैकल्पिक भाग में यह भविष्यवाणी यहूदियों के लिए भूमि-बंधुत्व के विशिष्ट विभाजन की चर्चा है। बंधन के समय के बाद की आशाओं में, परमेश्वर ने यह स्पष्ट किया कि हर गोत्र का भाग सुरक्षित रहेगा और वही उसके क्षेत्र के रूप में नियत होगा। यह शोधन उस समय के सामाजिक-राजनीतिक ढांचे को स्थिर करने की कोशिश से जुड़ा है, ताकि बंधन के बाद की पुनर्स्थापना में स्थिरता बनी रहे।
व्यাখ्या और प्रमुख विचार
- परमेश्वर की सख्ती के साथ की गयी प्रतिज्ञा—प्रत्येक गोत्र को उसका भाग मिलेगा, जो उनके इतिहास और विरासत के अनुसार निर्धारित था।
- यह भागीदारी अदल-बदल के बजाय स्थिरता और पहचान का प्रमाण है।
- भविष्यवाणी का यह हिस्सा यहूदियों को एक संरचित मानचित्र देता है ताकि वे पुनर्स्थापना के समय में अपनी जड़ें खोज पाएं।
2-3 प्रासंगिक पारियों के अभिप्राय (Cross References) — संक्षेप
इन संदर्भों में पाया गया सच यह है कि प्रभु अपने लोगों के लिए एक ठोस.IDENTITY और भौगोलिक-आधार देता है, जो उनकी धरोहर और धार्मिक-समुदाय की स्थिरता को मजबूत करता है।
थीमैटिक सार
टेक-अपशंसित मार्गदर्शन
यह वाक्य यह सीख देता है कि परमेश्वर की योजना में हर समुदाय और गोत्र को उनके उचित स्थान और भूमिका मिलती है। जो लोग अपनी विरासत और समुदाय की पहचान से जुड़े हों, उन्हें यह याद दिलाता है कि भरोसा और स्थिरता परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार आती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain स्रोतों से—केवल आवश्यक संकेत):
यह पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि परमेश्वर की योजना में भाग-निर्धारण एक विवेकपूर्ण और न्यायसंगत व्यवस्था है, जो दोनों इतिहास और भविष्य की सुरक्षा को समेटे रहती है।