Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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bynaha" यहेजकेल 48:24 का भावार्थ
इस अध्याय में परमेश्वर की भूमि-योजना में एक सीमांकन प्रस्तुती है: पूर्व से पश्चिम तक बिन्यामीन के क्षेत्र के निकट शिमोन का भाग उल्लेखित है। सरल शब्दों में यह बताता है कि परमेश्वर के अधीन भू-सीमा कैसे व्यवस्थित होती है और प्रत्येक भाग अपने परमेश्वर-निर्णय के अनुसार निर्धारित होता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहेजकेल के प्रेरित-ग्रंथ में इस समय इजराइल के विभाजन और व्यवस्था का चित्रण चल रहा है। परमेश्वर ने विभाजन-रेखा बनाते समय प्रत्येक tribes के लिए क्षेत्र निर्धारित किए, ताकि व्यवस्था शेष रहे और पवित्र नगरों के आसपास न्यायपूर्ण सीमाओं का पालन हो सके। यह 48 अध्याय का भाग खासकर आगे के भू-सीमा-विधान का संकलन है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार
संबंधित आयतें (संक्षेप व्याख्या)
यहेजकेल 47–48 अध्यायों से संबद्ध संकेत: भू-सीमा का क्रम और भौगोलिक संरचना शास्त्र-धर्म द्वारा नियत है; नये युग में भी परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार स्थिति बनी रहती है।
यहोशू 19:1–9— tribals के क्षेत्र की विविधता और पारस्परिक सीमाओं की व्यवस्था का उदाहरण देता है, जिसे यहाँ पर दृश्य-रूप में देखा जा सकता है।
उत्पत्ति 13:7–9— क्षेत्र-भाजन और परिवारों के बीच सीमाओं के मित्रवत वितरण का मूलाधार दर्शाता है।
एतिहासिक-आध्यात्मिक संकेत (संक्षेप)
यह उद्घाटन न केवल ज़मीन के भौगोलिक हिस्सों की चर्चा है, बल्कि समुदाय-जीवन की संरचना, न्यायपूर्ण वितरण और पवित्रता की स्थिरता को भी रेखांकित करता है। प्रत्येक क्षेत्र का निश्चित स्थान यह संकेत देता है कि परमेश्वर आदेश देता है और लोग उसी के अनुसार चलनाLearn करते हैं।
व्यावहारिक takeaway
हम अपने समाज में सीमाओं के उचित निर्धारण और समन्वय से ही स्थिरता प्राप्त कर सकते हैं—न तो अति-सीमा से उत्पन्न अनुचित दबाव और न ही असीम लचीलेपन से। परमेश्वर की व्यवस्था में संतुलन और आदान-प्रदान की भावना चाहिए।
महत्वपूर्ण उद्धरण (अनुक्रमण/आउटपुट-धारणा)
नीचे केवल वही अनुभाग हैं जिन्हें Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से सीधे उद्धृत किया गया हो:
“The borders of the several tribes were laid out with exactness, and the portion of Shimon lay toward the sea; it shows that every portion of the land had its due place and its call to duty.”
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