Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 48:17 — संदर्भ के साथ संपूर्ण शब्दार्थ
यहेजकेल के ग्रंथ में 48 अध्याय ईश्वर के भवन-प्रस्ताव की आख़िरी संरचना का भाग है। यह वर्णन नगर के विभाजन के साथ-साथ उसका क्षेत्रफल और प्रत्येक दिशा के साथ औचित्य बताता है। इस विशेष आयत में नगर के पास उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की चौड़ाईयों का उल्लेख है और इन चौड़ाइयों को ढाई-ढाई सौ बाँस के मान से निर्धारित किया गया है। यह विवरण धार्मिक-राजकिय रीति-रिवाज़, प्रशासन तथा नगर-निर्माण की सुव्यवस्थित व्यवस्था को दर्शाता है, ताकि नगर सभी दिशाओं में सुरक्षित, सुव्यवस्थित और प्रबन्धित रहे।
मुख्य अभिप्राय
यह आयत दर्शाती है कि चक्रीय या गोल नहीं, बल्कि योजनाबद्ध नगर-क्षेत्र की रचना किस प्रकार की गई है: उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम चारों दिशाओं के लिए निश्चित चौड़ाइयाँ और ढाई-ढाई सौ बाँस की मानक दूरी, जिससे नगर का परिसीमन स्पष्ट और व्यवस्थित हो। यह प्रभु की व्यवस्था की मानकता और उनके हर दिशा में विचारशील शासन का प्रतीक है।
दो-तीन प्रमुख विषय
सम्बद्ध उपपाठ (Related Passages)
– नगर-निर्माण और क्षेत्रीय विभाजन के विचार: भविष्य में वहuelle दिशा-निर्भरता और सामाजिक-धार्मिक क्रम को स्थापित करने की चिह्न बनती है।
– एकता और संरचना का मूल्य: चारों दिशाओं के लिए समरूप माप नगर में सुरक्षा, व्यवस्था और समुदाय-जीवन की स्थिरता का संकेत देते हैं।
– प्रभु की योजना के सार्वभौमिकता: विविध प्रसंगों में समान नियम और एकरूप आदेश दर्शाते हैं कि परमेश्वर सभी दिशा-निर्देशों में नजाकत से कार्य करता है।
व्यावहारिक सोच
आज के पाठक के लिए यह आयत यह याद दिलाती है कि किसी भी समुदाय या संस्थान के लिए स्पष्ट मापदंड, निर्धारित क्षेत्र और समान पैमाने पर बंटवारा कितनी आवश्यक है। चाहे वह नगर हो या टीम-कार्य, संरचना और क्रम से नागरिकों के लिए सुरक्षा, उत्तरदायित्व और सहयोग बढ़ता है। परमेश्वर की योजना में नियम-व्यवस्था जीवन को सुगठित बनाती है; तो सामान्य उद्देश्य के लिए भी स्पष्ट नियम बनाएं और उनका पालन करें।
संक्षिप्त समापन
यह दृश्य कि नगर के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में ढाई-ढाई सौ बाँस की चौड़ाइयों से संरचना निर्धारित है, प्रभु की सुव्यवस्थित योजना का प्रतीक है। यह दूरी-निर्धारण सुरक्षात्मक, प्रशासनिक और धार्मिक क्रम की पुष्टि करता है, ताकि समुदाय जीवन में न्याय, सुरक्षा और एकसूत्रता पाए।
सूत्र-आधार विचार
यदि आप नीचे के प्रासंगिक पाठों को देखें, तो यह आयत नगर-निर्माण के साथ-साथ स्थिर नियमों और सातत्यपूर्ण योजना की महता पर प्रकाश डालती है।
क्रॉस-रेफरेंस 1: एक समान व्यवस्थात्मक योजना के उदाहरण — नगर के विभाजन और सीमा-निर्धारण से संबंधित अन्य ग्रंथों में सुरक्षा और क्रम का महत्व मिलता है।
क्रॉस-रेफरेंस 2: प्रभु की योजनाओं में क्रम और समानता का संकेत — चारों दिशाओं के समरूप वितरण से संदेश मिलता है कि ईश्वर सब ओर से शासन करते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस 3: समाजिक जीवन में नियमों का मूल्य — स्पष्ट माप और वितरण से समुदाय के भीतर शांति और सहयोग बनता है।