Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहोशेयेल 7:13 पर commentary — क्यों यह वाक्य मायने रखता है
यह यहेजकेल के समय की क्रूरता और अव्यक्त न्याय को उद्घाटित करता है. जब देश में संकट और अपराध चरम पर हों, तब परमेश्वर की पवित्रता और जिम्मेदारी दिखाई देती है: बेचनेवाला अपनी वस्तु के पास लौट नहीं सकता, और अधर्मियों को अवसर नहीं मिलेंगे. यह वाक्य मिलावट, लोभ, और दुष्कर्म के परिणामों के स्पष्ट ऐलान के रूप में नीतिगत चेतावनी देता है कि ईश्वर राजा-प्रभाव के बिना भी निष्पक्ष न्याय करता है.
पारिताक्षContext और मूल संदेश
यह वचन ईश्वर के प्रकोप के समय की घोषणा है, जब राष्ट्र के नागरिक और व्यापारी दोनों के लिए संकट घिर आता है. “चाहे वे जीवित रहें” का आशय यह है कि भले ही जीवन बना रहे, कानून-अनुशासन टूट चुका है; “बेची हुई वस्तु के पास कभी लौटने न पाएगा” का मतलब है कि चोरी, धोखा और अवैध संपत्ति-व्यवहार के सभी मार्ग कट जाते हैं. देश की भीड़ पर यह दर्शन (दृष्टि) गिरती है—यानी सारे समाज को एक साथ यह धारणा है कि भ्रष्टाचार निरपराध नहीं रहता. अंततः, जो अधर्म में जीवित रहता है, वह बल न पकड़ सकेगा: परमेश्वर की सत्ता और न्याय से बचना संभव नहीं.
मुख्य संदेश
1) सामाजिक असंतुलन और आर्थिक भ्रष्टाचार के परिणाम अवश्य आते हैं.
2) परमेश्वर की न्यायपूर्ण दृष्टि सभी पर समान है; कोई भी अमानवीय या अवैध लाभ सुरक्षित नहीं रहता.
3) जीवन की स्थिति चाहे कितनी भी स्थिर क्यों न दिखे, नैतिक पतन अंततः विनाश की ओर ले जाता है.
बाइबलीय थीम्स जो इस वचन को मजबूत बनाते हैं
संदर्भ-युग्म (Cross-references) और उनका छोटा परिचय
1) यशायाह 1:23-24 – असमान और भ्रष्टाचार की गंभीरता को स्पष्ट करते समय, समाजिक पाप के विरुद्ध दंड की बात सामने आती है. इस संदर्भ से समरूपी पाठ मिलता है कि न्याय की प्रतीक्षा करते समय धार्मिक ढाँचे कैसे टूट जाते हैं।
2) मन्नत-गीत 11:4-6 (आशीर्वाद और दण्ड का संतुलन) – यह दिखाता है कि भली-चंगई के लिए आचरण और पवित्रता आवश्यक है, वरना परिणाम भयावह होंगे।
3) 2 पतरस 2:3-9 – परिपक्वता के बिना धन और सत्ता में लिप्त लोगों के लिए परमेश्वर के दंड की चेतावनी.
संक्षिप्त देवotional reflection
हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में भी यह संदेश गूँजता है कि धन-लाभ और चालाकी से आसमान नहीं मिलती; सच्चे जीवन की रीढ़ ईमानदारी, न्याय और भय परमेश्वर में है. कठिन समय में भी सही मार्ग पर अडिग रहने से अंततः मनुष्य की आत्मा सुरक्षित रहती है. यह वचन हमें स्मरण दिलाता है कि পতन का रास्ता आसान हो सकता है, परन्तु ईश्वर की दृष्टि से वास्तव में वही रास्ता है जो शुद्ध और विनम्र है.
कथन के संदर्भ-विवेचन
यहुडनीय संकेत है कि समाज में भ्रष्टाचार का पाताल छलकना क्या उपदेश देता है: न्याय का बोझ हर व्यक्ति पर है—व्यापारी हो या नागरिक. एक साथ मिलकर सुधार और ईमानदार व्यवहार की दिशा बनना चाहिए।
उद्धृत विचारधारा: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों से मिलते-जुलते बिंदु यहाँ समाहित हैं. (खास उद्धरण यदि उपलब्ध हों, नीचे संक्षेप में उल्लेखित हैं.)
महत्वपूर्ण उद्धरण संकेत: यदि उपलब्ध हों, तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट वाक्यों का छोटा, न्यायपूर्ण उल्लेख नीचे दिया गया है.