Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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संदर्भ में संक्षिप्त व्याख्या (यहेजकेल 7:8)
यह पद यहेजकेल की भविष्यवाणी के उस भाग का हिस्सा है जहाँ परमेश्वर अपने न्याय के आगमन की घोषणा करते हैं। पूरे अध्याय में यहेजकेल यरूशलेम और यहूदा की दुष्टता पर ईश्वरीय प्रतिशोध के आगमन को बताता है। यहाँ कहा जा रहा है कि परमेश्वर ने उन लोगों के साथ जो अपने टिके हुए पापों में लगे रहे, सहने का समय समाप्त कर दिया है; अब तीव्र और सुनिश्चित दण्ड जल्द ही परमेश्वर की ओर से आएगा।
मुख्य अर्थ
वचन में तीन तत्व स्पष्ट हैं: (1) "थोड़े दिनों में" — दण्ड निकट और अनिवार्य है; (2) "अपनी जलजलाहट भड़काऊँगा, और पूरा कोप उण्डेलूँगा" — यह सीधे और तीव्र क्रोध का चित्रण है; (3) "तेरे चालचलन के अनुसार तुझे दण्ड दूँगा" — दण्ड का माप पाप के अनुसार न्यायपूर्ण होगा। परमेश्वर का क्रोध अकारण नहीं, बल्कि उनके लोगों की बार-बार की अवज्ञा और घृणास्पद कर्मों के परिणामस्वरूप उठता है।
मुख्य विषय
सम्बन्धित पद और त्वरित संबंध
- रोमी 2:6–8 — परमेश्वर हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार प्रतिफल देता है; यह सिद्धांत यहाँ भी देखा जाता है।
- वचन 1:18 (यिर्मयाह 18:7–10) — परमेश्वर ने कहा है कि यदि लोग अपने पथ बदल लें तो वह दण्ड घटा सकता है; न तो अनियंत्रित क्रोध न ही न्यायहीन बदला दर्शाया गया है।
- यहेजकेल 6:12 — यहाँ भी देश की विनाशव्यथा और दण्ड का वर्णन मिलता है; दोनों स्थानों पर पाप और परिणाम का स्पष्ट सम्बन्ध है।
व्यावहारिक चिंतन
यह पद आज के पाठक से निम्न बातें पूछता है: क्या मैं अपनी गलती को पहचानता/पहचानती हूँ या उसे सामान्य कर देता/देती हूँ? परमेश्वर की चेतावनी सुधार का मार्ग खोलती है—यदि मन बदलकर पश्चात्ताप कर लिया जाए तो दण्ड टाला जा सकता है। साथ ही यह हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर नैतिक उत्तरदायित्व की गंभीरता समझने को कहता है।
प्रकाशक टिप्पणियाँ और पुराने टिप्पणीकारों के उद्धरण
मैथ्यू हेनरी ने प्रेरित रूप में लिखा है कि परमेश्वर का कोप "न केवल क्रोध है, पर दण्ड का उपाय"—यह वाक्यांश कार्यवाही की आवश्यकता को दर्शाता है। (मैथ्यू हेनरी का संक्षिप्त उद्धरण) अल्बर्ट बार्न्स के विचारों में भी यह धारणा मिलती है कि दण्ड के शब्द व्यवहार के अनुरूप हैं और "न्याय का संतुलन" झलकता है। एडम क्लार्क ने कहा कि चेतावनी का आशय लोगों को लौटाने का आखिरी अवसर देना था।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 7:8 एक तर्कपूर्ण चेतावनी है: पाप के दुष्परिणाम अनिवार्य हैं और उनका समय निकट हो सकता है। परमेश्वर का क्रोध न्याय पर आधारित है और वह लोगों को उनकी चाल-चलन के अनुसार प्रतिफल देता है। फिर भी, चेतावनी का उद्देश्य विनाश मात्र नहीं, बल्कि लोगों को सुधार की ओर मोड़ना भी है—उसी में जीवन और शांति का मार्ग निहित है।