Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 7:27 – तत्काल संदर्भ और पाठ का अर्थ
यहांश (यहेजकेल 7:27) में परमेश्वर यहोवा अपने चुने गए लोगों के कल्याण-भंग को दिखाते हैं: राजा शोक में डूबे होंगे, धनिक उदास रौब वाले वस्त्र पहनेंगे, और देश के लोग असहाय और ढीले हाथों के साथ होंगे। ईश्वर कह रहे हैं कि वे अपने चालचलन के अनुसार ही दंड पाएंगे; उनकी कमाई के बराबर दण्ड दिया जाएगा। अंततः वे यह जान लेंगे कि यही मैं यहोवा हूँ।
ईश्वर और विश्वास पर पाठ का संदेश
इन कथनों में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर न्यायी रक्षक के रूप मेंilate, जनता के कर्मों के अनुसार प्रतिक्रिया करते हैं। नियंत्रण और दया के पर्तों के बीच, यह संदेश पुनः प्रतिध्वनित होता है कि दुष्टों के लिए दुष्कर परिणाम और भक्तों के लिए ईश्वर की व्यवस्था समय पर प्रकट होगी। यह पाठ विश्वास को बुलाता है कि परमेश्वर के निर्णय सार्वभौमिक और सच्चे हैं; मानवीय सत्ता, संपत्ति या प्रसिद्धि नहीं, बल्कि उनके वास्तविकता और चित्त की परिस्थिति निर्धारित करती है।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और imagery की व्याख्या
संबद्ध पाठ (cross-references) और उनका छोटा स्पष्टीकरण
इन संदर्भों में एक संयुक्त संदेश निकलता है: परमेश्वर समाज-व्यवस्था के हर पक्ष पर अधिकार रखता है; अन्याय के लिए परिणाम होते हैं और सच्चाई एवं पवित्रता के आधीन ही दण्ड-प्रक्रिया चलती है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
इस Verse से सीख मिलती है कि धर्म और नैतिकता के बिना सत्ता, धन या प्रसिद्धि स्थायी नहीं होते. संकट के समय में भी ईश्वर की योजना पर भरोसा बनाए रखें; अन्याय के विरुद्ध शांत रहते हुए अपनी ईमानदारी और करुणा बनाए रखिए। यह भी समझना चाहिए कि दैनंदिन व्यवहार में अति-आक्रामकता या शुद्ध लाभ-सरणीकरण से बचना चाहिए; क्योंकि परमेश्वर न्यायी है और परिणाम उसी के हाथ में हैं।
संक्षिप्त एकीकृत सार
यहेजकेल 7:27 एक चेतावनी नहीं, बल्कि परमेश्वर के न्याय की पुष्टि है: सत्ता-शक्ति, धन और प्रतिष्ठा क्षणभंगुर हैं; वास्तविकता वही है जो स्वतंत्र, नैतिक कर्तव्य और ईश्वर के ऐक्यों के अनुरूप हो।
इस commentary में समाविष्ट विचार, सन्हित-आधारित शब्दावली के संग, Matthew Henry एवं Albert Barnes के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरित हैं। हलके शब्दों में उनके स्पष्ट उद्धरण निम्न हैं:
Matthew Henry: "The land mourns; and the strong man in his pride is brought low."
Albert Barnes: "The king's power cannot shield him from God's justice; the wealthiest must bow to divine decree."
Adam Clarke: "Where there is a deplorable alteration in national affairs, it is a sign that God is about to reveal himself."