Old Testament
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इब्रानियों 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और स्वर्गदूतों से उतना ही उत्तम ठहरा*, जितना उसने उनसे बड़े पद का वारिस होकर उत्तम नाम पाया।
इब्रानियों 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इब्रानियों 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इफिसियों 1:21 (HINIRV) »
सब प्रकार की प्रधानता, और अधिकार, और सामर्थ्य, और प्रभुता के, और हर एक नाम के ऊपर*, जो न केवल इस लोक में, पर आनेवाले लोक में भी लिया जाएगा, बैठाया;

फिलिप्पियों 2:9 (HINIRV) »
इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है,

1 पतरस 3:22 (HINIRV) »
वह स्वर्ग पर जाकर परमेश्वर के दाहिनी ओर है; और स्वर्गदूतों, अधिकारियों और सामर्थियों को उसके अधीन किए गए हैं। (इफि. 1:20-21, भज. 110:1)
इब्रानियों 1:4 का संदर्भ और अर्थ
इस वाक्य में लेखक यह बताता है कि यीशु मसीह स्वर्गदूतों से बड़े पद पर विराजमान होकर “उत्तम नाम” पाया है। आरम्भिक अध्याय के स्वरूप में यह तुलना एक महान प्रभु के महत्त्व और उसकी प्रकाशन-युग की स्थितियों की पुष्टि है। पहले अध्याय के अंतरों में यीशु और स्वर्गदूतों के बीच शास्त्रीय तुलना प्रस्तुत की जाती है, ताकि पाठक समझ सके कि यीशु किस प्रकार उद्धार के कार्यक्रम के केंद्र में हैं।
मुख्य 의미
यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि यीशु को स्वर्गदूतों से अधिक सम्मान, अधिकार और परिचय मिला है, क्योंकि वह परमेश्वर के पुत्र के रूप में उसी सत्ता से विरासत में आये हैं और उनका नाम ऊँचा है। “उत्तम नाम” का मतलब है ऐसी पहचान और स्थिति जिसे स्वर्गदूतों के समकक्ष नहीं माना जा सकता। यह प्रेरित करता है कि विश्वासी अपने आप को भी यीशु के प्रति विश्वास और समर्पण के साथ जोड़े रखें।
कुंजी विचार
relate passages (संक्षेप में)
• पुरातन युग के उद्धारक की भूमिका की पुष्टि के लिए आप पहले अध्याय के अन्य वाक्यों को देखेंगे जहां यीशु स्वर्गदूतों से ऊपर बताया गया है।
• परमेश्वर के बेटे के रूप में यीशु की प्रतिष्ठा को गहराई से दिखाने के लिए अन्य उद्धरण भी देखें जो उसे एक महत्त्वपूर्ण संस्थापक के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
• बपतिस्मा और प्राण-जीवन के संदर्भ में यीशु के नाम के अधिकार की चर्चा, हमारी ईमानदारी और श्रद्धा को स्थिर करती है।
जीवन में लागू करने योग्य विचार
- विश्वासियों के लिए यह प्रश्न उभरता है: क्या मेरा जीवन यीशु के उच्च पद और महिमा के अनुरूप है?
- प्रत्यक्ष और प्रताप-भरे रिश्ते में यीशु पर विश्वास बनाये रखना कैसे संभव है, जब संसार के करीब-आने वाले दबाव अधिक होते हैं?
संक्षिप्त निष्कर्ष
इब्रानियों 1:4 में दिखी गई घटना यह बताती है कि यीशु मसीह स्वर्गदूतों से श्रेष्ठ हैं, क्योंकि वह परमेश्वर के पुत्र के रूप में उच्च पद पर विराजमान हैं और उनका नाम उसी सम्मान का प्रतीक है जो उद्धार-यात्रा के केंद्र में है। यह वाक्य हमें उनके महिमामय विभूति और हमारे विश्वास के आधार को बार-बार स्मरण कराता है।
मूल स्रोतों से मिली संकीर्ण धारणाओं के भीतर यह संदेश स्पष्ट है—यीशु की महिमा और उसकी भूमिका इतिहास के निर्णायक क्षण को संचालित करती है, और हम उसी महिमा के अनुरूप अपने जीवन को जीने का संकल्प लें।
Cross-references (छोटे निष्कर्ष के साथ)
• दूसरे अध्यायों में Jesus के अधिकार और उद्धार के कार्यक्रम पर भी चर्चा है; उनका महत्त्व स्वर्ग से पृथ्वी तक फैला है।
• पहले अध्याय के अन्य अंशों में भी मसीह की श्रेष्ठता और दायित्व का वर्णन मिलता है, जो इस वाक्य की धारणा का समर्थक है।
नीचे उद्धृत पाठ-योग्यता के अनुसार, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे कथन जिन्हें सीधे उद्धृत किया गया है, यदि उपलब्ध हों, उन्हें नोट किया गया है:
“उत्तम नाम” का अर्थ—प्रभु यीशु की महिमा और अधिकार का पूर्ण उद्घाटन है, जो उसे स्वर्गदूतों से ऊपर करता है।
संक्षेपित उद्धरण-रेखा: “उत्तम नाम उसने स्वर्गदूतों से बड़ा पद पाया।” — इस प्रकार के विचारों से पाठक को यीशु के स्थान का स्पष्ट अंदाजा मिलता है।
नोट: अगर आप चाहें तो मैं इस विषय परMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke या अन्य जन-उद्धृत टिप्पणीकारों के वैध-उद्धरणों को उद्धृत कर सकता हूँ, बशर्ते वे उपलब्ध और सार्वजनिक-domain हों।