Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीइब्रानियों 1:11 बाइबल पद की व्याख्या
इब्रानियों 1:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे तो नाश हो जाएँगे*; परन्तु तू बना रहेगा और वे सब वस्त्र के समान पुराने हो जाएँगे।
इब्रानियों 1:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इब्रानियों 1:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यशायाह 51:6 (HINIRV) »
आकाश की ओर अपनी आँखें उठाओ, और पृथ्वी को निहारो; क्योंकि आकाश धुएँ के समान लोप हो जाएगा, पृथ्वी कपड़े के समान पुरानी हो जाएगी, और उसके रहनेवाले ऐसे ही जाते रहेंगे; परन्तु जो उद्धार मैं करूँगा वह सर्वदा ठहरेगा, और मेरे धर्म का अन्त न होगा।

यशायाह 34:4 (HINIRV) »
आकाश के सारे गण जाते रहेंगे और आकाश कागज के समान लपेटा जाएगा। और जैसे दाखलता या अंजीर के वृक्ष के पत्ते मुर्झाकर गिर जाते हैं, वैसे ही उसके सारे गण धुँधले होकर जाते रहेंगे। (मत्ती 24:29, मर. 13:25, लूका 21:26,2 पत. 3:12, प्रका. 6:13,14)

भजन संहिता 90:2 (HINIRV) »
इससे पहले कि पहाड़ उत्पन्न हुए, या तूने पृथ्वी और जगत की रचना की, वरन् अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही परमेश्वर है।
मुख्य interpretive बिंदु
इब्रानियों 1:11 में परावर्तित विचार यह है कि परमेश्वर की सृष्टि-यात्रा स्वस्थ, अचल और स्थिर है—जो कुछ क्षणिक क्षय के बाद भी देह-नाश से परे स्थिर रहती है। शास्त्र यह संदेश देता है कि जो कुछ भी व्यक्ति-याचना, संसारिक सत्ता या वैचारिक संस्था के रूप में समय के साथ घट-घट कर कमजोर पड़ता है, वह अंततः पुराने हो जाते हैं; परन्तु प्रभु बना रहता है। इस वाक्य में ईश्वर के सतत, अपरिवर्तनीय अस्तित्व की पुष्टि मिलती है, जो सभी संसारिक वस्त्रों से परे और उनसे अधिक स्थायी है।
साहित्यिक प्रसंग (Literary Context)
यह पाठ ईसाई समुदाय के लिए एक उद्घोष है कि सुंदरताओं, देव-परिधान, और समय-समय के परिवर्तन के बावजूद प्रभु की सत्ता और महिमा अमर और अपरिवर्तनीय हैं। पुराने वस्त्रों जैसी चीज़ें नष्ट हो जाएँगी, परन्तु प्रभु अस्थिर नहीं—वह हर स्थिति में वही रहता है। यह विचार पुराने नियम के पुराण-उत्पादन और नए नियम के अनुकूलित प्रभाव के बीच पुल की तरह काम करता है।
धर्मात्मक महत्त्व (Theological Significance)
परिवर्तनशील संसार के बीच ईश्वर के स्थायित्व की पुष्टि करता है कि विश्वासियों के लिए आशा का आधार वही है—जो कभी नहीं गलती, कभी नहीं मुरझाती। यह संदेश विशेषकर प्रेरित-शास्त्र के उन प्रवचनों से मेल खाता है जो परमेश्वर की अपरिवर्तनीय सत्ता को उद्धृत करते हैं। आलोचना-जनित विविधताओं के बीच यह एक स्थिर ईंट है, जिसपर विश्वासियों की आस्था टिकती है।
वचन-सम्बन्ध (Cross-References)
संकेत स्पष्ट है कि ईश्वर का अस्तित्व और उसकी महिमा समय-समय पर रूपांतरित नहीं होती, जबकि संसार की सभी चीजें गुजर जाती हैं।
विचार-विमर्श के प्रश्न (Reflection Questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
इब्रानियों 1:11 एक सरल, पर गहरा तथ्य प्रस्तुत करता है: जो कुछ भी समय के साथ फीका पड़ सकता है, वह एक दिन समाप्त हो जाएगा; पर परमेश्वर—जो समस्त सृष्टि का पालक है—हमेशा बना रहता है। इस स्थायित्व पर विश्वास हमारे लिए प्रेरणा है कि हम संसारिक परिवर्तनों के बीच भी भरोसे के साथ खड़े रहें, क्योंकि ईश्वर का वचन और महिमा अचल है।
पूर्ववर्ती commentary notes (उद्धृत अंश)
यद्यपि यहाँ सीधे उद्धरणों की लंबाई नहीं दी जा रही, संदर्भ-आधारित मध्यस्थता में ऐंटिक पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संकेत शामिल हैं। यदि आवश्यक हो, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे-फुल्के टिप्पणी-रेखाओं का संक्षेप नीचे जोड़ा जा सकता है, परन्तु पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं ताकि मूल पाठ का सम्मान बने।
अनुभाग को समापन करते हुए, 1:11 का संदेश हमारे हृदय को यह स्मरण कराता है कि ईश्वर ही वह अनश्वर सत्ता है जिससे जीवन का स्थायित्व मिल सकता है।