भजन संहिता 90:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इससे पहले कि पहाड़ उत्‍पन्‍न हुए, या तूने पृथ्वी और जगत की रचना की, वरन् अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही परमेश्‍वर है।

भजन संहिता 90:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 90:2 पर मनन

दीर्घकाल से अनंतकाल तक परमेश्वर का अस्तित्व वही है, जिसकी सत्ता से पहले पहाड़ उठे, पृथ्वी बनी और संसार चला। यहVerse एक उच्चतम दार्शनिक स्थितिप्रस्था है: समय के आरम्भ से भी पहले और समय के अंत तक ईश्वर ही है।

साहित्यिक संदर्भ ( literary context )

यह भजन मरुभूमि की निर्भरता और परमसत्ता के बीच संवाद बनता है। भजन की शुरूआत में परमेश्वर के महान शासन को स्थापित करने वाला यह उद्घोषणा बताती है कि तंत्र, प्रकृति या मानव-इतिहास का कोई भी चक्र प्रभु-स्थिति से बाहर नहीं है। श्लोक स्पष्ट करता है कि ईश्वर से पहले कुछ भी नहीं था, और ईश्वर से बाद भी वही है—समय-सीमा से परे।

थियोलॉजिकल महत्त्व

1) ईश्वर की अनंत सत्ता: “अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही परमेश्वर है” से उद्धार, कानून-निर्माण और सिद्धांत सभी उसी की इच्छा के अनुसार चलते हैं।

2) समय और सृष्टि का संदर्भ: इस पंक्ति के मंच पर ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और इतिहास के आरम्भ के बारे में विचार आता है—यह बताता है कि इतिहास और प्रेरणा एक ही स्रोत, परमेश्वर, के द्वारा संचालित है।

अन्य पवित्रग्रंथों के साथ सम्बन्ध (Cross-references)

  • निर्गमन 3:14-15 — ईश्वर अपने नाम के साथ पहली दिव्यता को पहचानते हैं; यह संदर्भ भजन के विचार से जुड़ता है कि ईश्वर समय-सीमा से परे है।
  • भविष्यवाणी 1:18 — परमेश्वर के स्थायित्व और सदा रहने की बातें बिखरे हुए जीवन के बीच भरोसा पैदा करती हैं।
  • इबरानियों 13:8 — यीशु मसीह कल-परसों और आज के बीच स्थिर और अपरिवर्तनीय ईश्वर के रूप में प्रस्तुत होते हैं; यह शाष्वत सत्ता के दर्शन को ठोस करता है।

इन संदर्भों से प्रेरित होकर भजन 90:2 की दिशा स्पष्ट होती है: ईश्वर की स्थिरता हमारे जीवन-यात्रा के ऊपर दृढ़ आधार देती है।

विचारणीय प्रश्न (Questions for reflection)

  • मैं अपने जीवन के संघर्षों के बीच ईश्वर की अनंत सत्ता को कैसे अनुभव करता/करती हूँ?
  • क्या मेरे निर्णय और योजनाएँ ईश्वर की असीम सत्ता के अनुरूप बनती हैं या मैं समय-सीमा की सीमा में फँस जाता/फँस जाती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन संहिता 90:2 हमें बताती है कि सृष्टि की उत्पत्ति से पहले और उसके बाद भी परमेश्वर वही है—एक अटूट सत्ता, जो समय के पार है। यह उद्घोषणा भय, भरोसा और विनम्र चित्त का संयोजन बनाती है: जब दुनिया घूमती है, तब भी परमेश्वर निर्भय रहता है।

संदर्भ उद्धरण (Quotes from 19th–20th century public-domain commentators)

एडम क्लार्क ने स्पष्ट किया कि परमेश्वर हर वस्तु की उत्पत्ति और स्रोत है, और उसका अस्तित्व पहले और बढ़ते क्रम के भीतर भी समान है।

Matthew Henry के अनुसार यह शास्त्रीय ज्ञान है कि परमेश्वर के अस्तित्व के बिना संसार की कोई रचना संभव नहीं; वह प्रारम्भ और अन्त दोनों की सत्ता है।

Albert Barnes ने भी यही भाव व्यक्त किया कि ईश्वर अपनी सृष्टि के आरम्भिक नियमों और अंतत: समय के पार के सत्य के स्रोत हैं।

उद्धरण (exact short quotations applicable)

“From everlasting to everlasting, thou art God” — यह विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के commentary-परंपरा में संगत रूप से उपलब्ध है (संहिताओं के भाष्य में उनके संस्थागत बिंदु के अनुसार एक ही ध्वनि में आता है)।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 90:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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