यशायाह 51:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

आकाश की ओर अपनी आँखें उठाओ, और पृथ्वी को निहारो; क्योंकि आकाश धुएँ के समान लोप हो जाएगा, पृथ्वी कपड़े के समान पुरानी हो जाएगी, और उसके रहनेवाले ऐसे ही जाते रहेंगे; परन्तु जो उद्धार मैं करूँगा वह सर्वदा ठहरेगा, और मेरे धर्म का अन्त न होगा।

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यशायाह 51:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य निष्कर्ष: उद्धार स्थिर है, संसार निरन्तर परिवर्तनशील

यशायाह 51:6 में परमेश्वर स्पष्ट करते हैं कि आकाश और पृथ्वी एक दिन नष्ट हो जाएँगे, परन्तु मेरी उद्धार और धर्म सदैव बना रहेगा। यह वाक्य सामान्य अवसान के ऊपर एक दृढ़ आश्वस्ति देता है: समय और पदार्थ के परिवर्तन के बीच ईश्वर का वचन अडिग रहता है।

साहित्यिक संदर्भ और पाठ-संदर्भ

यशायाह का यह भाग उन संदेशों में से है जिसमें भविष्य-प्रचलन के साथ उद्धार का आश्वासन जोड़कर यह सिखाया गया है कि परमेश्वर का योजनानुसार राज्य स्थिर रहेगा। आकाश धुएँ की तरह लुप्त होंगे और पृथ्वी पुरानी हो जाएगी—ये दोनों प्रकृति की मौलिक परिवर्तनशीलता को दर्शाते हैं। इसके विपरीत, “मेरे धर्म का अन्त न होगा” का वचन उद्धार की स्थिरता को बताता है: ईश्वर का उद्देश्य और न्यायपूर्वक शासन कभी समाप्त नहीं होता।

प्रमुख विचार और पठनशील निष्कर्ष

  • परिवर्तन के बावजूद ईश्वर का उद्धार-कार्य अडिग रहता है।
  • ऊपर की आकाशगंगा-चित्रण प्रतीक है कि संसार की सभी फिजिकल संरचनाएँ अस्थायी हैं।
  • धर्म का अन्त न होना—ईश्वर के सिद्धान्त, न्याय और वचन की स्थायित्वता।

आर्थिक-धर्मशास्त्रीय संदर्भ (Theological significance)

यह यूक्ति धारणात्मक ऊँचाई से पृथ्वी-आकाश के क्षय के बावजूद ईश्वर के राजा-योजन की अनंतता को दिखाती है। उद्धार का स्थिरत्व जन्म-जीवन-ईश्वर के अनुयायियों को निश्चिंत करता है कि कठिनाई के क्षणों में भी परमेश्वर के उद्देश्य पर भरोसा किया जा सकता है।

पवित्र ग्रंथों के साथ संबंध

1) मत्ती 24:35 के अनुरूप, आकाश और धरती हट जाएँगे, पर परमवाक्य नहीं। यह उद्धार की निरन्तरता को पुष्ट करता है।

2) 2 कुरिन्थियों 4:18—परमेश्वर का अनन्त ज्योति-आचरण वर्तमान संसार की नश्वर घटनाओं से ऊपर है।

3) यिर्मयाह 31:35-37—धर्म और उद्धार का चिह्न स्थिर है, जबकि आकाश-धरती परिवर्तनशील रहते हैं।

आत्मनिरीक्षण के लिए प्रश्न

  • जब जीवन में परिवर्तन होते हैं, तब आप वे कौन-से सिद्धांत ढूंढ़ते हैं जो अडिग हैं?
  • क्या आप ईश्वर के धर्म की स्थायित्वता पर आश्वस्त रहते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कैसे भी हों?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 51:6 हमें याद दिलाता है कि सभी सांसारिक ढांचे एक दिन समाप्त हो सकते हैं, परन्तु परमेश्वर की उद्धार-योजना और धर्म का प्रभाव चिरस्थायी रहता है। यह पुष्टि देता है कि faith in God’s redemptive work और His righteous rule—यही स्थिर आधार है जो परिवर्तनशील समय में भी हमारे जीवन को स्थिरता और आशा देता है.

नोट्स और उद्धरण (यदि उपलब्ध हों)

यातना-युक्ति को समझाने के लिए नीचे दिए गए उद्धरण सार्वजनिक-डॉटकॉपी पाठों से संकलित हैं:

“आकाश धुएँ के समान लोप हो जाएगा, पृथ्वी कपड़े के समान पुरानी हो जाएगी, और उसके रहनेवाले वैसे ही जाते रहेंगे; परन्तु जो उद्धार मैं करूँगा वह सर्वदा ठहरेगा, और मेरे धर्म का अन्त न होगा।”

नोट: इस पाठ के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध होने पर संदर्भित किये जा सकते हैं; संकलन में उनके विचारों को समाहित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 51:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मत्ती 24:35 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 24:35 (HINIRV) »
आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरे शब्‍द कभी न टलेंगी।

यशायाह 34:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 34:4 (HINIRV) »
आकाश के सारे गण जाते रहेंगे और आकाश कागज के समान लपेटा जाएगा। और जैसे दाखलता या अंजीर के वृक्ष के पत्ते मुर्झाकर गिर जाते हैं, वैसे ही उसके सारे गण धुँधले होकर जाते रहेंगे। (मत्ती 24:29, मर. 13:25, लूका 21:26,2 पत. 3:12, प्रका. 6:13,14)

भजन संहिता 102:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 102:25 (HINIRV) »
आदि में तूने पृथ्वी की नींव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है।

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