Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इब्रानियों 11:16 – पर्मानंद का स्वर्गीय देश
यह पदावेगिक पंक्ति उन पूर्वजों के अतिरेकी विश्वास को दर्शाती है जिन्होंने earthly आशाओं को छोड़कर स्वर्गीय इनाम की ओर आँख उठाई। लेखक कहता है कि वे एक उत्तम, स्वर्गीय देश की अभिलाषा लिए जीएं, और इसलिए परमेश्वर उनका परमेश्वर कहलाने में नहीं लजाता, क्योंकि उसने उनके लिये एक नगर तैयार किया है। संदर्भ दोनों पुरानी गवाही और new covenant की आशाओं को जोड़ते हैं।
गूढ़ संदेश: परमेश्वर की स्वदेशी इच्छा और विश्वास की पहचान
यह verse विश्वास की दौड़ में अस्थायी भूमि-स्वरूप आशाओं को छोड़कर, परमेश्वर के राज्यों की ओर देखने का प्रमाण देता है। परमेश्वर उनकी ईमानदारी, आस्था और हिमायती भरोसे को पहचानता है; इसलिए वह उनसे मेल खाकर खुद उन्हें अपना नाम देता है। खास बात यह है कि परमेश्वर “कहलाने में नहीं लजाता”—यह उद्धारकर्ता-उद्धार के साथ अपने संबंध की पुष्टि है।
कुंजी शब्द और चित्र की व्याख्या
संबद्ध पवित्रशास्त्र के संकेत
निर्गम 3:6 और 3:15 का उल्लेख यह दर्शाता है कि परमेश्वर ने अपने अनुयायियों के लिए एक पवित्र, स्थाई सम्बंध और “नगर” की प्रतिज्ञा दी है—यह नगर वह है जो ईश्वर की महिमा से परिपूर्ण है और जिसमें विश्वासियों को आनन्द मिलेगा। साथ ही यह संकेत देता है कि पुराने अनुयायियों की आशा नई व्यवस्था में विस्तृत हो गई।
क्रॉस-रिफरेंस
आज के जीवन में अनुप्रयोग
हमारे लिए यह पाठ प्रेरणा देता है कि भौतिक सफलता की बजाय स्वर्गीय देश की उम्मीद को प्राथमिकता दें। दैनिक निर्णयों में मूल्यांकन करें कि क्या आपके लक्ष्य परमेश्वर के राज्य के अनुरूप हैं। संकट के समय आशा बनाए रखना और परमेश्वर के साथ निष्ठा बनाए रखना ही वास्तविक आस्था को बढ़ाता है।
संक्षिप्त समेकन
इस पद से स्पष्ट होता है कि आस्था केवल वक्तव्य नहीं है, बल्कि इनाम की आशा के साथ जीने की जीवनशैली है: एक उत्तम, स्वर्गीय देश की ओर अभिलाषा, और ईश्वर के साथ अपने संबंध की पुष्टि। यह पुराने पिता-समूह की प्रत्याशा को नए विश्वास के चिह्नों में समेटता है, और आज भी हमारे विश्वास को दृढ़ करता है कि परमेश्वर हमारे लिए एक नगर तैयार कर चुका है।
नोट: नीचे उद्धृत पूर्व-लेखक (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) के स्पष्ट शब्द यदि उपलब्ध हों, तो उनका संक्षिप्त उल्लेख दिया गया है।