Old Testament
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इब्रानियों 11:6 का संकल्पना और संदर्भ
यह पद इब्रानियों के अध्याय 11 की चरित्र-उद्धार कथा का हिस्सा है, जहाँ विश्वासी के जीवन में विश्वास क्रिया और परमेश्वर के स्वरूप की गहन भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि विश्वास एक ऐसा संपर्क है जो परमेश्वर के साथ सीधे संबंध बनाता है: बिना विश्वास के परमेश्वर के पास आना संभव नहीं, और विश्वास के कारण ही वह प्रतिफल देता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ की जानकारी
पंक्ति कहती है: “विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है।” यह दो बातें साफ करती है: (1) परमेश्वर से सन्निकट होने के लिए विश्वास अनिवार्य है; (2) परमेश्वर सच बोलने वाला है और जो उसे ढूंढ़ते हैं, उनके लिए प्रतिफल है।
मुख्य विचार यह है कि ईमानदार हृदय से परमेश्वर का आह्वान करें और वह उसे ढूँढ़ने वालों के लिए पुरस्कार देता है। विश्वासी के लिए यह एक आश्वस्त रास्ता बन जाता है—विश्वास से ही आस्था और रिश्ते की शुरुआत होती है, न कि कर्मों से अधूरा प्रयत्न।
महत्वपूर्ण शब्दों की व्याख्या
अनुरागपूर्ण cross-references
पाठ का आधुनिक अनुप्रयोग
जीवन के हर मोड़ पर believers को यह याद रखना चाहिए कि सत्य और स्थिरता विश्वास में है। कठिनाइयों में भी परमेश्वर के वादों पर भरोसा रखें, न कि अपनी दृष्टि से परिणाम ढूंढ़ने की कोशिश में फँसें। प्रार्थना और पवित्र जीवन के साथ, विश्वास परमेश्वर से सन्निकट रहने का मार्ग है—जो प्रतिफल देता है, जब वह उचित समय हो।
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के संक्षिप्त अनुसरण
यह पाठ उन विचारों के अनुरूप है जो इन पुरातन सार्वजनिक-उद्धार टिप्पणियों में मिलते हैं: विश्वास को परमेश्वर तक पहुँचाने वाला पथ, आस्था के साथ जीवन जीना और परमेश्वर के सत्यापित प्रतिफल पर निर्भर रहना।
उद्धरण संकलन: “विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है” (Matt. Henry की प्रकार-भाषा से प्रेरित सार) — ध्यान दें कि ये उद्धरण मार्मिक रूप से बार-बार उद्धृत होते हैं, किन्तु यहाँ संक्षेप में उपयोगित हैं।