Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
इब्रानियों 11:1 इब्रानियों 11:2 इब्रानियों 11:3 इब्रानियों 11:4 इब्रानियों 11:5 इब्रानियों 11:6 इब्रानियों 11:7 इब्रानियों 11:8 इब्रानियों 11:9 इब्रानियों 11:10 इब्रानियों 11:11 इब्रानियों 11:12 इब्रानियों 11:13 इब्रानियों 11:14 इब्रानियों 11:15 इब्रानियों 11:16 इब्रानियों 11:17 इब्रानियों 11:18 इब्रानियों 11:19 इब्रानियों 11:20 इब्रानियों 11:21 इब्रानियों 11:22 इब्रानियों 11:23 इब्रानियों 11:24 इब्रानियों 11:25 इब्रानियों 11:26 इब्रानियों 11:27 इब्रानियों 11:28 इब्रानियों 11:29 इब्रानियों 11:30 इब्रानियों 11:31 इब्रानियों 11:32 इब्रानियों 11:33 इब्रानियों 11:34 इब्रानियों 11:35 इब्रानियों 11:36 इब्रानियों 11:37 इब्रानियों 11:38 इब्रानियों 11:39 इब्रानियों 11:40



संक्षिप्त अर्थ और मुख्य संदेश
इब्रानियों 11:37 में दिखाया गया है कि विश्वासियों ने प्रमाण के समय कितनी कठिनाइयों का सामना किया—पत्थराव, आरे से चीरे जाना, तलवार, कंगाली, क्लेश और दुःख। इन सभी के बीच उन्होंने भेड़ों और बकरियों की खालें ओढ़ कर भटकना, चरितार्थ किया। यह अध्याय विश्वास के इतिहास की मिसालें देता है कि परमेश्वर के पक्ष में वफादारी रखने पर भी दुःख उठाने पड़ते हैं, परन्तु उनके विश्वास ने परमेश्वर की उपलब्धि और भविष्य की उम्मीद को बनाए रखा।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यह वचन हिब्रियों की स्मरण-सीरीज़ का हिस्सा है जिसमें अतीत के महान पामर (faithful heroes) के जीवन-उदाहरणों के माध्यम से विश्वास की वास्तविक ताकत को महत्वपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया गया है। संदर्भ यह है कि:n- पुराने नियम के सेनानियों और भविष्य के परमेश्वर-आशाओं के बीच विश्वास ने उन्हें अनेक दुष्कर परिस्थितियों में स्थिर रखा।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संरचित विचार—महत्वपूर्ण बिंदु
कथन-संदर्भ और शब्दार्थ-सहायता
यह पंक्ति विश्वास के वास्तविक इतिहास को समर्पित है—युद्ध-काल, यातना और तड़पन के बीच भी परमेश्वर के लिए जीना।
क्रॉस-रेफरेंस (संकेतित संदर्भ) और उनका संक्षिप्त विवेचन
1) हब 11:33-34: विश्वास के योद्धाओं ने राजसी ताकत नहीं पर, विश्वास के फल से विजयी बने।
2) रोम 8:18: वर्तमान दुखों के मुकाबले भविष्य की महिमा अधिक है, यह भी विश्वास की उम्मीद को बढ़ाता है।
3) 2 कोर 4:8-9: कष्टों के बीच भी प्रभु की क्षमा और सहायता से आत्मा को स्थिर रखा गया है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
कठिन समय में भी अपने विश्वास को नहीं छोड़ना चाहिए; परमेश्वर के उद्देश्य को याद रखें, और धैर्यपूर्वक उनके स्मरण से प्रेरित हों। यह वचन हमें बताता है कि सत्य यह है: विश्वास केवल आराम और सफलता नहीं देता, बल्कि कठिनाइयों के बीच भी ईश्वर के साथ रहने की क्षमता देता है।
Matthean Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से प्रत्यक्ष उद्धरण: यदि उपलब्ध हों तो नीचे दिए गए संरक्षित वाक्यों में से उनके स्पष्ट वाक्य-चिन्ह उद्धृत होंगे—यह पंक्ति विशिष्ट रूप से उद्धृत नहीं है।