Old Testament
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याकूब 2:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और पवित्रशास्त्र का यह वचन पूरा हुआ, “अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिनी गई,” और वह परमेश्वर का मित्र कहलाया। (उत्प. 15:6)
याकूब 2:23 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 2:23 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 15:6 (HINIRV) »
उसने यहोवा पर विश्वास किया;* और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना। (रोम. 4:3)

यशायाह 41:8 (HINIRV) »
हे मेरे दास इस्राएल, हे मेरे चुने हुए याकूब, हे मेरे मित्र अब्राहम के वंश; (याकू. 2:23, व्य. 14:2, भज. 105:6)

2 इतिहास 20:7 (HINIRV) »
हे हमारे परमेश्वर! क्या तूने इस देश के निवासियों को अपनी प्रजा इस्राएल के सामने से निकालकर इन्हें अपने मित्र अब्राहम* के वंश को सदा के लिये नहीं दे दिया? (याकू. 2:23)
याकूब 2:23 पर आध्यात्मिक सार: विश्वास ही धार्मिकता का प्रमाण
इस वाक्य का मुख्य बिंदु यह है कि परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविक धार्मिकता को गिनना है। याकूब बतलाते हैं कि अब्राहम ने केवल बाहरी आचरण नहीं किया, बल्कि यह विश्वास था जिसने उनके प्रति परमेश्वर की कृपा और मित्रता को स्थिर किया। इसमें धर्म और विश्वास का एक एकीकृत चक्र उभरकर आता है: विश्वास जो कर्मों से पुष्ट होता है, और कर्म those विश्वास की पुष्टि करते हैं।
साहित्यिक प्रसंग ( literary context )
याकूब की पुस्तक प्रत्येक तर्क में व्यवहारिक धार्मिकता पर केंद्रित है। यहाँ उद्धृत उद्धरण उत्पत्ति 15:6 से लिया गया है, जहाँ अब्राहम ने परमेश्वर की विश्वसनीयता पर भरोसा रखा और उसे धार्मिकता के मापदंड के रूप में माना गया। याकूब इसे एक अनुकरणीय उदाहरण मानते हैं: विश्वास के साथ कर्म भी होने चाहिए ताकि वह जीवित रहे। उत्पत्ति 15:6 का संदर्भ हमें दिखाता है कि इस विश्वास का परिणाम मित्रता और परमेश्वर की स्वीकृति की दृष्टि में है।
दैहिक-धार्मिकता बनाम आस्था-उन्नति (theological significance)
यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि आस्था केवल मानसिक धारणाओं तक सीमित नहीं है; वह कार्यों में परिणत होती है। जब अब्राहम ने परमेश्वर के साथ विश्वास की राह पकड़ी, वह धार्मिकता के अनुरूप माना गया—यानी परमेश्वर की दृष्टि में उसका घर में रहने योग्य ही नहीं, बल्कि उसकी जीवनी का ढांचा भी आस्था से गढ़ा गया। यह उद्धरण “धार्मिकता गिनी गई” बताते हैं कि परमेश्वर के सामने एक सही प्रतिबिंब वही है जो विश्वास से प्रेरित कर्मों से मिसाल बने।
अन्य शास्त्रीय टिप्पणीकारों से संयुक्त दृष्टिकोण
फेमस पवित्र-शास्त्री मैथ्यू हेनरी और अॅल्बर्ट बार्न्स तथा एडम क्लार्क के मूल्यवान विचार इस वाक्य से जुड़ते हैं:
इन तीनों की सटीक लहजे से हमें यह समझ में आता है कि विश्वास और कर्म एक साथ चलते हैं—न एकदम स्वतंत्र, न एकदम एक-दूसरे के विरुद्ध।
पवित्रशास्त्री-विचार के साथ cross-references
संयुक्त संदर्भ जो इस तर्क को और गहराई देते हैं:
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि विश्वास और कर्म का संयुक्त आयाम इस विश्वास-धर्म के मूल ढांचे का हिस्सा है।
विचार-मंथन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
याकूब 2:23 बताता है कि विश्वसनीय धर्म वही है जिसमें आस्था और कर्म एक साथ चलते हैं। अब्राहम की मिसाल उसी सिद्धांत की ठोस पुष्टि है: परमेश्वर पर विश्वास ने उसे मित्रत्व के निकट किया और उसी विश्वास के कारण उसे धार्मिकता मानी गई। इस तरह विश्वास का जीवित प्रमाण हमारे जीवन के आचरणों में दिखाई देना चाहिए।