याकूब 2:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पर तुम ने उस कंगाल का अपमान किया। क्या धनी लोग तुम पर अत्याचार नहीं करते और क्या वे ही तुम्हें कचहरियों में घसीट-घसीट कर नहीं ले जाते?

पिछला पद
« याकूब 2:5
अगला पद
याकूब 2:7 »

याकूब 2:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

याकूब 2:6 पर समीक्षात्मक व्याख्या

मुख्य interpretive बिंदु: अनुसूचित समाज में धनी परस्ती और कंगाल के साथ भेदभाव के विरुद्ध वास्तविक धार्मिक आचरण की माँग। याकूब कहते हैं कि ईश्वर की कृपा से धनवानों के दबदबे के चलते गरीबों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए; ईमानदार क्रिया तब ही पूर्ण होती है जब निष्क्रिय समता के बजाय प्रेम और न्याय व्यवहार में प्रगट हो रहा हो।

साहित्यिक संदर्भ (लेखन-संदर्भ)

याकूब पत्र 2 अध्याय में लेखक सामाजिक-आचरण के मापदंड तय करता है। इस छानबीन में धनी वर्ग का दमन और गरीबों के अधिकारों से अवहेलना का चित्रण बार-बार उभरता है। verse 6 में स्पष्ट कहा गया है कि धनी लोग असमानता बनाकर गरीबों को प्रभावित करते हैं, और यह व्यवहार ईमान की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। यह खंड बेवजह भेदभाव के खिलाफ नैतिक आचरण को प्रदर्शित करता है।

कुटुम्बित देवत्विक और सिद्धान्तगत महत्त्व

धन के कारण उत्पन्न सामाजिक दबदबा किस प्रकार व्यक्तियों के पवित्र जीवन के घरो में दरार डालता है, इसे यहाँ आप देखते हैं। यह यहूदियों के पुराने सामाजिक ताने-बाने के साथ-साथ क्रिश्चियन नैतिकता के भीतर एक सच्चा परीक्षण है: क्या हमारा विश्वास कार्यों से पुष्टि पाता है? पुराने कानून के अनुसार भी दीन-दयालु के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए था; याकूब इसे ईमान के साथ जोड़कर बताता है कि विश्वास बिना प्रेम-उ Rheय नहीं।

आध्यात्मिक significance (चलन-सम्बन्ध)

यह अंश यह संकेत देता है कि external स्थिति—कहना नहीं—कि धनवान होना या गरीब होना दोष-गुण का निर्णय नहीं, बल्कि असमानता के साथ अन्याय की सहमति एक झूठे विश्वास का परिणाम है। ईमानदार श्रद्धा वह है जो कमजोर के अधिकारों की सुरक्षा करे, और समाज में समता-न्याय स्थापित करे।

अन्य पवित्र ग्रंथ से सम्बन्ध

  • नीतिपरक न्याय का सिद्धांत: पुरानी व्यवस्था में अन्याय से रोक-थाम और दीन व्यक्तियों के हित की भूमिका उल्लेखित है।
  • यिषय के उपदेश: पवित्र प्रेम निकट है—आदर्श वह है जो अपने पड़ोसी को अपने समान समझे और किसी से भेदभाव न करे।
  • नई वाचा का सद्गुण: मानवीय स्वार्थ से ऊपर उठा प्रेम, सहायता और दयालुता के कार्य सीधे विश्वास की पुष्टि करते हैं।

नोट: उपरोक्त संदर्भ सीधे शाब्दिक उद्धरण नहीं हैं, पर इन ग्रंथ-संदेशों का भावनात्मक-संरचनात्मक मिलान किया गया है।

आत्म-चिंतन के प्रश्न

  • क्या मैं अपने समाज में उन का सम्मान कर रहा हूं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं?
  • क्या मेरा विश्वास सचमुच के क्रियात्मक प्यार से समर्थित है?
  • क्या मैं अपने व्यवहार में किसी के प्रति भेदभाव की जड़ें खोजकर चुकाने का प्रयत्न कर रहा हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

याकूब 2:6 सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के विरुद्ध एक स्पष्ट नैतिक बुलावा है। धन के कारण किस प्रकार लोग दबाव बनाते हैं और कमजोरों को क्षति पहुँचाते हैं, यह दर्शाता है कि ईमानदार विश्वास वह है जो क्रिया-प्रेम के साथ जुड़ा हुआ हो। मानव-समाज में शांति और न्याय तभी संभव है जब गरीब-धनी के बीच नहीं, बल्कि सबके लिए समान सम्मान और उपचार का मार्ग खुला हो।

संक्षिप्त cross-references (सार-संकेत सात्त्विक संबंध)

1) ऋषियों के न्याय के सिद्धांत: समाज-न्याय की प्राथमिकता; 2) प्रेम का नया वचन: प्रेम ही व्यवस्था बनकर विश्वास को पुष्ट करता है; 3) प्रभु की दयालुता: दीन-हीनों के लिए सम्मान का व्यवहार दिखना चाहिए।

उद्धरण नोट: लेखक Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शब्द सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं, बल्कि उनके प्रवाह-धारणा के अनुरूप सार-सहमति प्रस्तुत की गई है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

याकूब 2:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 कुरिन्थियों 11:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 कुरिन्थियों 11:22 (HINIRV) »
क्या खाने-पीने के लिये तुम्हारे घर नहीं? या परमेश्‍वर की कलीसिया को तुच्छ जानते हो, और जिनके पास नहीं है उन्हें लज्जित करते हो? मैं तुम से क्या कहूँ? क्या इस बात में तुम्हारी प्रशंसा करूँ? मैं प्रशंसा नहीं करता।

भजन संहिता 14:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 14:6 (HINIRV) »
तुम तो दीन की युक्ति की हँसी उड़ाते हो परन्तु यहोवा उसका शरणस्थान है।

नीतिवचन 17:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 17:5 (HINIRV) »
जो निर्धन को उपहास में उड़ाता है, वह उसके कर्त्ता की निन्दा करता है; और जो किसी की विपत्ति पर हँसता है, वह निर्दोष नहीं ठहरेगा।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें