Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयाकूब 2:4 बाइबल पद की व्याख्या
याकूब 2:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो क्या तुम ने आपस में भेद भाव न किया और कुविचार से न्याय करनेवाले न ठहरे?
याकूब 2:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 2:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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अय्यूब 34:19 (HINIRV) »
परमेश्वर तो हाकिमों का पक्ष नहीं करता और धनी और कंगाल दोनों को अपने बनाए हुए जानकर उनमें कुछ भेद नहीं करता। (याकू. 2:1, रोमी. 2:11, नीति. 22:2)


याकूब 2:4 का तात्पर्य और संदर्भ
याकूब पुरुषोत्तम मसीह के अनुयायियों के लिए विश्वास के साथ व्यवहार के एक व्यवहारिक परीक्षण का उल्लेख करता है: अगर हम भीतर से भेदभाव करें और धन-आधारित ढंग से लोगों के प्रति आचरण करें, तो क्या हमारे विश्वास प्रभावी हो सकते हैं? इस पंक्ति में लेखक ऐसे आचरण को स्पष्ट करता है जो ईमान के साथ संगत नहीं है। धार्मिक विश्वास बिना व्यवहार के खोखला है, क्योंकि ईश्वर के राज्य में लोक-पर-लोक के लिए समान अवसर और आंतरिक परिवर्तन आवश्यक होते हैं।
केंद्रीय अभिप्राय
याकूब कहते हैं कि ईमान और कार्य एक साथ चले बिना वास्तविक मित्र नहीं बनते। यह verse कह रहा है कि परमेश्वर के लिए असमान आचरण, खासकर प्रभु के सामने गरीबी-धनी के आधार पर भेदभाव, विश्वास की सच्ची प्रकृति के विरुद्ध है। धार्मिक-सम्मान की उपस्थिति बनाम सामाजिक-व्यवहार में न्याय का एक ही आयाम नहीं है; विकृत भेदभाव ईश्वर की इच्छा के विपरीत है।
मुख्य विषय
संदर्भित पाठ (Cross-references) और उनका संक्षिप्त संबंध
दृष्टिकोण और प्रैक्टिकल विचार
आज के चर्च-समुदाय में यह प्रश्न उठता है कि हम कैसे भेदभाव से मुक्त व्यवहार को व्यवहार में लाते हैं? सीख यह है कि हमारे विश्वास के साथ क्रिया का संयोजन बनाकर ही खरा ईमान प्रस्तुत होता है। जरूरत मंद, बाहर से कमजोर दिखने वालों के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार, और धन-वैभव के आधार पर निर्णय नहीं—यह स्पष्ट संकेत है कि हम Jésus के समान दिल रखते हैं।
चर्चित टिप्पणी-नक़्श
टेक्स्ट का सार यह संकेत करता है कि भेदभाव न केवल सामाजिक अन्याय है, बल्कि यह विश्वास के स्वतंत्र प्रचार को रोक देता है। यदि किसी समय हम बाहरी रूप से धार्मिक दिखें, पर आंतरिक हृदय भेदभाव से भर जाए, तो हमारा विश्वास अंशतः असत्य या अधूरा है।
संक्षिप्त सार
याकूब 2:4 हमारे लिए स्पष्ट करता है कि प्रभु के राज्य में ईमान और व्यवहार एक साथ चलना चाहिए। भेदभाव-आधारित न्याय नहीं, बल्कि समानता और करुणा पर आधारित आचरण से ही सच्चे विश्वास की पुष्टि होती है।