Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 20:1 अय्यूब 20:2 अय्यूब 20:3 अय्यूब 20:4 अय्यूब 20:5 अय्यूब 20:6 अय्यूब 20:7 अय्यूब 20:8 अय्यूब 20:9 अय्यूब 20:10 अय्यूब 20:11 अय्यूब 20:12 अय्यूब 20:13 अय्यूब 20:14 अय्यूब 20:15 अय्यूब 20:16 अय्यूब 20:17 अय्यूब 20:18 अय्यूब 20:19 अय्यूब 20:20 अय्यूब 20:21 अय्यूब 20:22 अय्यूब 20:23 अय्यूब 20:24 अय्यूब 20:25 अय्यूब 20:26 अय्यूब 20:27 अय्यूब 20:28 अय्यूब 20:29



अय्यूब 20:28 — उसके घर की बढ़ती जाती रहेगी, वह उसके क्रोध के दिन बह जाएगी।
इस पद का संदर्भ दोस्ती-दुर्दिन के समय की चेतावनी और दुष्टता के अंतर्दर्शन की ओर इशारा करता है। अय्यूब 20 अध्याय में ज़ीलफन की युद्ध-नीति का अभिप्राय वही व्यक्ति है जो अस्थिर और स्वार्थी लाभ के पीछे भागता है। यह श्लोक उसी दुष्टता के परिणाम को स्पष्ट करता है कि उसका घर, संपत्ति और शांति प्रबल क्रोध के दिन टूट-फूट जाते हैं। इसे एक चित्र के रूप में समझना उचित है: जो असत्य और अन्याय से समृद्ध होता है, उसकी समृद्धि समय के साथ घटती है और उसके क्रोध के दिन वह डूब जाता है।
ईश्वर की सत्ता और विश्वास की रोशनी
यह पाठ स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की न्यायपूर्ण हुकूमत अंततः असत्य-समृद्धि को भी नष्ट कर देती है। जो लोग अविनाशी राजमार्ग अपनाते हैं, वेTemporary सुखों पर निर्भर रहते हैं; परन्तु ईश्वर के हर क्रोध के दिन, उनके घर-आस्तित्त्व और मान-सम्मान का मूल ढह जाता है। यह हमें स्मरण कराता है कि विश्वास उन दिनों में स्थिर रहता है जब धन-संपदा और बाहरी शो weakness बन जाते हैं।
शब्दार्थ एवं चित्र स्पष्ट करना
• बढ़ती जाती रहेगी: यहाँ “बढ़ती” का आशय उस स्थायित्व से है जो दुराचारी धन से आता है; पर वह टिके नहीं रहता।
• क्रोध के दिन: वह समय जब परमेश्वर का निर्णय और न्याय प्रकट होता है। यह उद्धार के समय के विपरीत, दुष्ट के क्रोध और दमन का दिन है।
संबंधित बाइबल पाठ
छोटी-सी cross-reference विचार: (1) दुष्ट के बढ़ते लाभ की अस्थायित्वता; (2) परमेश्वर के न्याय के दिन की तैयारी; (3) आशीर्वाद और भय के बीच संतुलन। हर एक संदर्भ संकेत देता है कि स्थायी संतोष ईश्वर के अनुग्रह में है, न कि पल-पल बदलते earthly लाभ में।
आज के पाठ पर जीवन-प्रयोग
आज के समय में भी हमें सावधानी यह सिखाती है कि धन और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ स्थिर विश्वास से जीवन का मार्ग बनना चाहिए। दुष्टत्व से मिले लाभ कितने भी बड़े क्यों न हों, वे क्षणभर के हैं—पर ईश्वर के साथ सत्य और श्रद्धा बनी रहे तो onward जीवन स्थिर और सुरक्षित रहता है।
संक्षेपित समेकन
अय्यूब 20:28 दर्शाता है कि दुष्टता की समृद्धि और घर का आभूषण अंततः क्रोध के दिन ढह जाते हैं। यह संदेश हमें यह सीख देता है कि वास्तविक सुरक्षा परमेश्वर के न्याय और दया में है, न कि वर्तमान दिखावे में। विश्वास पर टिके रहकर, हम उस दिन की आशा कर सकते हैं जब ईश्वर सब कुछ सही करेंगा।
उद्धरण मानक चरचे: मैथ्यू हेलनी (Matthew Henry) और ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) तथा एडम क्लार्क (Adam Clarke) जैसे पुराने सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार सम्मिलित हैं; यदि किसी उद्धरण का शब्दशः छोटा भाग उपलब्ध है, तो उसे नीचे सूचीबद्ध किया गया है: