अय्यूब 20:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जिस ने उसको देखा हो फिर उसे न देखेगा, और अपने स्थान पर उसका कुछ पता न रहेगा।

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अय्यूब 20:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 20:9 पर व्याख्या: उसकी दृष्टि फिर कभी न मिलेगी

मुख्य interpretive point। अय्यूब 20:9 बताता है कि जिस व्यक्ति ने विषम स्थिति में राहत नहीं पाई, उसने पहली झलक में जो आनंद या स्वाद चखा था, वह पुनः नहीं पाएगा; पदार्थ के स्थायित्व की चाह उसे कभी पूरी नहीं कर पाएगी। विरक्ति एवं क्रोध के संद्रभ में अभिमन्यु की तरह, नीति-नियुक्त खुशियों के पीछे भागना केवल क्षणिक सुख देता है और अंत में निराशा लेकर आता है। यहाँ न होकर भी, परमेश्वर की न्याय-योजना के अनुरूप, दुष्टात्मा की अस्थायी विजय की अस्थिरता उजागर होती है।

साहित्यिक परिप्रेक्ष्य

यह पद आय्यूब की कविता-गाथा के भीतर दुष्कर्म-निश्चय के विरुद्ध एक चेतावनी के रूप में खड़ा है। इसे मोहित करने वाले भय, सिंहनाद और आत्म-स्वध्या से प्रेरित निर्णयों के परिणामों की याद दिलाने के लिए उद्धृत किया गया है। वाक्य छोटा है, पर भाव गहरा: जो क्षणिक आनंद के कारण भ्रमित हो गया, उसे वही क्षण फिर नहीं मिलेगा।

theological significance

1) दुष्ट के लिए खुशी का स्थायित्व नहीं—शास्त्र स्पष्ट कहता है कि जीवन-वृक्षरस की फसल अस्थिर होती है; जो लोग झूठी समृद्धि में फंसते हैं, वे अंततः शून्य पाते हैं। 2) दृढ़ विश्वास की परीक्षा—कठिन समय में अनुभव होता है कि निजी लाभ कितनी बार ईश्वर की योजना के विरुद्ध हो सकता है; परन्तु ईश्वर की न्याय- gele के अनुसार अंततः सच्चा सुख केवल उसकी प्रीति में है।

Cross-scriptural connections

  • भजन 37:16-17 — छोटा धन भी दुष्ट की शांति से बेहतर है; स्थायित्व ईश्वर की कृपा में है।
  • नीतिवचन 23:5 — धन यदि आँख के लिए उड़ जाए तो उसकी प्रीति कब तक बनी रहेगी?
  • यशायाह 57:20-21 — जो लोग पाप के समुद्र में फँसते हैं, उनकी शांति प्रभु से नहीं मिलती।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि अस्थायी सुख के पीछे भागना सांसारिक जीवन के अंत में शून्यता को जन्म देता है; ईश्वर के साथ स्थिरता ही वास्तविक संतोष देती है।

विचार-विमर्श के प्रश्न

  • क्या मैं अपनी प्राथमिकताओं को यह मानकर निर्देशित कर रहा हूँ कि वास्तविक आनंद किसमें है—दृश्य सुख में या परमेश्वर की कृपा में?
  • क्या हालिया अनुभवों ने मुझे सिखाया कि क्षणिक संतोष स्थायिता नहीं दे सकता?
  • कैसे अपने जीवन में ईश्वर की योजना के अनुरूप दीर्घकालिक शांति को खोजा जा सकता है?

सार निष्कर्ष

अय्यूब 20:9 का यह छोटा-सा कथन पाठक को स्मरण कराता है कि संसार की क्षणभंगुर खुशियाँ अक्सर शांति दे कर भी गहराई से अस्थिर होती हैं। सही जीवन वह है जिसमें आस्था के साथ परमेश्वर की वैयक्तिक कृपा पर निर्भरता बनी रहे। अतः आत्म-स्वारथ को त्याग कर, हमने जो स्थायित्व पाया है उसे प्रभु के साथ गहराते विश्वास में ढाले रखें।

एतिहासिक टिप्पणीकारों से संक्षेप उद्धरण (जहाँ उपलब्ध)—Matthew Henry ने कहा है कि दुष्ट की खुशियाँ समय-समय पर छल करती हैं और अंत में क्रोध में डूब जाती हैं; Albert Barnes ने संकेत किया कि हठपूर्वक लाभ-लालच मनुष्य को अस्थिर बनाते हैं; Adam Clarke ने यह स्पष्ट किया कि दुष्ट-उत्पादन क्षणिक है और परमेश्वर की न्याय-योजना उसे समाप्त कर देती है।

ग्रीन-लाइन उद्धरण: यदि आप चाहें, मैं इन टिप्पणीकारों के विशिष्ट शब्दों के छोटे-छोटे अंशों को संदर्भ देकर दे सकता हूँ; नीचे दी गई पंक्तियाँ केवल सार के रूप में हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 20:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जो मुझे अब देखता है उसे मैं फिर दिखाई न दूँगा; तेरी आँखें मेरी ओर होंगी परन्तु मैं न मिलूँगा।

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वह अपने घर को फिर लौट न आएगा, और न अपने स्थान में फिर मिलेगा।

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परन्तु जब वह अपने स्थान पर से नाश किया जाए, तब वह स्थान उससे यह कहकर मुँह मोड़ लेगा, 'मैंने उसे कभी देखा ही नहीं।'

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