Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
योएल 2:1 योएल 2:2 योएल 2:3 योएल 2:4 योएल 2:5 योएल 2:6 योएल 2:7 योएल 2:8 योएल 2:9 योएल 2:10 योएल 2:11 योएल 2:12 योएल 2:13 योएल 2:14 योएल 2:15 योएल 2:16 योएल 2:17 योएल 2:18 योएल 2:19 योएल 2:20 योएल 2:21 योएल 2:22 योएल 2:23 योएल 2:24 योएल 2:25 योएल 2:26 योएल 2:27 योएल 2:28 योएल 2:29 योएल 2:30 योएल 2:31 योएल 2:32



योएल 2:18 - प्रारम्भिक संदर्भ और आध्यात्मिक अर्थ
तब यहोवा अपने देश के विषय में जलन हुई, और उसने अपनी प्रजा पर तरस खाया। यह पंक्ति Joel के दूसरे अध्याय के केंद्र में है, जहाँ परमेश्वर के क्रोध के पश्चात् उसके प्रेम और उद्धार की योजना स्पष्ट हो उठती है। यहूदियों के लिए फसल-उत्पादन, अतिथि-आवागमन और गौण बंधनों के बीच यहोवा अपने राष्ट्र के लिए एक नई दया और पुनःस्थापन की घोषणा करते हैं।
धर्मग्रंथ की तत्काल स्थिति क्या बताती है?
कहानी एक क्षण के पश्चात् परिवर्तन की है: विनाश की चेतावनी के बीच परमेश्वर अंततः अपने देश के बारे में जलन और फिर प्रजा के लिए तरस दिखाते हैं। यह दर्शाता है कि परमेश्वर केवल क्रोधी न्यायकर्ता नहीं है, बल्कि दयालु निर्माता भी है जो अपने लोगों पर कृपा कर सकता है और उनके पत्थर दिल को पिघला सकता है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में Text से जो संकेत मिलते हैं
– ईश्वर का आकर्षण और उत्साह: “जलन” शब्द यहाँ यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने लोगों की भलाई के लिए सक्रिय रूप से कार्य करते हैं; वह खुद अपने विनाशकारी कदमों से नहीं बल्कि उद्धार की दिशा में प्रयास करते हैं।
– दया की पुनःस्थापना: “तरस खाया” यह दिखाता है कि पाप के कारण जो दूरी बनी थी, उसे मिटाने की ईश्वर की इच्छा है। वह अपने लोगों के साथ उत्साहपूर्वक जुड़ना चाहते हैं, ताकि राष्ट्र पुनः आशीर्वाद के मार्ग पर चले।
महत्वपूर्ण शब्द-चित्र और उनके अर्थ
• जलन: यहाँ यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने देश के लिए गहरे प्रेम से प्रेरित होकर कार्रVER कर रहे हैं, ताकि सच्चे कल्याण की स्थिति बन सके।
• तरस खाना: यह एक सक्रिय करुणा का चित्र है—ईश्वर पीड़ा में पड़े लोगों के साथ सहानुभूति प्रकट करते हैं और उन्हें परिवर्तन की दिशा में बुलाते हैं।
संबंधित पवित्र ग्रंथ (cross-references) और तात्पर्य
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि परमेश्वर की जलन और तरस एक साथ चलते हैं: कठोर न्याय के साथ भी प्रेम का प्रवेश द्वार खुला रहता है, और पुकार से परिवर्तन संभव होता है।
आज के संदर्भ में उपयोगी आवेदन
– अपनी परिस्थितियों में परमेश्वर की दया की अपेक्षा रखें: ऐसी परिस्थितियाँ जो क्रोध की ओर संकेत करें, वे परिवर्तन के निमंत्रण बन सकती हैं जब हम ईश्वर के साथ व्यवहार में लौटें।
– सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर उद्धार के लिए प्रार्थना करें: यहोवा अपने देश के विषय में जलन और तरस के साथ क्रिया कर सकता है—हम भी नित नए विश्वास और सुधार के मार्ग पर चलने को प्रेरित हों।
एकीकृत निष्कर्ष
योएल 2:18 एक संतुलित चित्र प्रस्तुत करता है: परमेश्वर के क्रोध के बाद भी उसकी दया और उद्धार की इच्छा कमज़ोर नहीं पड़ती। यह अमित प्रेम का प्रमाण है कि वह अपने लोगों के लिए जलन में भी कार्य करते हैं और उनके शामिल होकर पुनःस्थापना की ओर अग्रसर होते हैं।
उद्धृत बिंदु (महत्वपूर्ण): यहोवा की दया और दया-ही-प्रभुता की अभिव्यक्ति स्पष्ट रूप से उद्धार की दिशा में संकेत देती है, और यह पठनीय पाठ मैं हर समय स्मरण रखूँ कि परमेश्वर का प्रेम न्याय से अधिक व्यापक है।