Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
योएल 2:1 योएल 2:2 योएल 2:3 योएल 2:4 योएल 2:5 योएल 2:6 योएल 2:7 योएल 2:8 योएल 2:9 योएल 2:10 योएल 2:11 योएल 2:12 योएल 2:13 योएल 2:14 योएल 2:15 योएल 2:16 योएल 2:17 योएल 2:18 योएल 2:19 योएल 2:20 योएल 2:21 योएल 2:22 योएल 2:23 योएल 2:24 योएल 2:25 योएल 2:26 योएल 2:27 योएल 2:28 योएल 2:29 योएल 2:30 योएल 2:31 योएल 2:32



वचन का सीधे अर्थ
योएल 2:25 कहता है कि परमेश्वर अपने लोकों की क्षति को भर देगें। जिन्होंने टिड्डों के आक्रमण से फसलों और उपज को नुकसान उठाया, वे अब पुनः भरपाई पाएंगे—यानी ईश्वर अपने चिह्न के रूप में दी गई हानि को वापस दे देंगे, ताकि जनता में आशा पुनः जागे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पढ़ना यह बताता है कि योएल नबूति प्रमुख विषयों को संबोधित कर रहा है: प्रकोप के समय में गिरत को रोकना, पश्चाताप और फिर से उभरना। यहाँ टिड्डियों के दल एक प्रतीक हैं—जो लोगों की आर्थिक और कृषि सुरक्षा को तहस-नहस कर देते हैं—पर परमेश्वर का वादा है कि यदि लोग रूकें, पश्चाताप करें, और अपनी दशा सुधारें, तो वह नुकसान भर देगा। यह उद्धार की दृष्टि में सबसे बड़ा आश्वासन है कि ईश्वर का दया-प्रचार समाप्त नहीं होता।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
थीमेटिक सार
अन्य प्रेषण तालमेल (Cross-references)
सूचित संदर्भों के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण:
संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway
यदि आप तबाही के समय में हों या व्यक्तिगत नुकसान से जूझ रहे हों, तो राजमार्ग है: ईश्वर के पास लौटना, नम्र पश्चाताप, और समुदाय के साथ मिलकर पुनः खड़ा होना। वह अपने लोगों की हानि पूरी करने के लिए सक्षम हैं—धैर्य रखें, विश्वास बनाए रखें, और प्रणामपूर्वक कदम बढ़ाएं।
नोट: प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के शुद्ध शब्द
इस पाठ पर उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से प्रेरणा लेते समय, नीचे सीधे उद्धरण केवल संदर्भित स्वरूप में दिए जाते हैं:
मथ्यू हैनरी (Matthew Henry): “...प्रकृति के साथ मनुष्य का रिश्ता फिर से जीवन पाता है जब ईश्वर के सामने आत्म-समर्थन और पवित्र पश्चाताप आता है।”
एल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes): “धर्म में परिवर्तन–नया जीवन—उसी समय शुरू होता है जब मनुष्य अपने आप को दृष्टि में सच मान ले।”
एडम क्लार्क (Adam Clarke): “परमेश्वर की देन से हानि भरना एक चिरस्थायी आश्वासन है, जो उनके वचन की पवित्र शक्ति पर निर्भर है।”