Old Testament
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जकर्याह 10:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“मैं यहूदा के घराने को पराक्रमी करूँगा, और यूसुफ के घराने का उद्धार करूँगा। मुझे उन पर दया आई है, इस कारण मैं उन्हें लौटा लाकर उन्हीं के देश में बसाऊँगा, और वे ऐसे होंगे, मानो मैंने उनको मन से नहीं उतारा*; मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूँ, इसलिए उनकी सुन लूँगा।
जकर्याह 10:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 10:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 10:12 (HINIRV) »
मैं उन्हें यहोवा द्वारा पराक्रमी करूँगा, और वे उसके नाम से चले फिरेंगे,” यहोवा की यही वाणी है।

जकर्याह 13:9 (HINIRV) »
उस तिहाई को मैं आग में डालकर ऐसा निर्मल करूँगा, जैसा रूपा निर्मल किया जाता है, और ऐसा जाँचूँगा जैसा सोना जाँचा जाता है। वे मुझसे प्रार्थना किया करेंगे, और मैं उनकी सुनूँगा। मैं उनके विषय में कहूँगा, 'ये मेरी प्रजा हैं,' और वे मेरे विषय में कहेंगे, 'यहोवा हमारा परमेश्वर है'।” (1 पत. 1:7, भज. 91:15, यिर्म. 30:22)

यशायाह 14:1 (HINIRV) »
यहोवा याकूब पर दया करेगा, और इस्राएल को फिर अपनाकर, उन्हीं के देश में बसाएगा, और परदेशी उनसे मिल जाएँगे और अपने-अपने को याकूब के घराने से मिला लेंगे।
जकर्याह 10:6 परालौकिक पाथशाला: परम उद्धार और फिर से बसना
यह वचन यहूदियों के भविष्य के पुनर्निर्माण और ईश्वर की दया की गहरी गवाही देता है। यह बताता है कि परमेश्वर कैसे एक साथ जोड़ते, सशक्त बनाते और फिर से उनके बीच विश्वास की बुनियाद डालते हैं। जब संसार में अस्थिरता और निर्वासन के स्मरण ठेस दे रहे हों, तब यह वचन उम्मीद की रोशनी दिखाता है कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों को न केवल लौटाते हैं बल्कि उन्हें पूरे केंद्र में लेकर आते हैं, ताकि वे सम्यक् जीवन के साथ Yahweh की पहचान बनाए रखें।
पद्य का मूलक संदर्भ और संदर्भगत विचार
यहेजाकालीन काल में जब यह इब्रानी राजा-युग का उत्तरार्ध था, तब यहूदा और इस्राइल के युवाओं को बिदेसों में निर्वासित किया गया था। जकर्याह का दृष्टिकोण यह है कि यद्यपि वे भौतिक रूप से_relative रूप से टूट-फूट गए थे, पर ईश्वर की कृपा के कारण वे फिर से अपने देश में बसेंगे। यह उद्धार, दया और विन्यास से जुड़ा है—“पारी का नहीं, मन से नहीं उतारना”—यानी ईश्वर उन्हें अपने साथ रचते हैं, उनके भीतर की पहचान को पुनर्जीवित करते हैं।
मुख्य संदेश
बाइबल के प्रमुख थीम से सम्बद्धता
1) दया और लौटना: परमेश्वर अपने लोगों को निर्वासन के बाद भी फिर से गले लगाते हैं और उनके साथ एक नया संबंध बनाते हैं।
2) सत्ता और सुरक्षा: “पराक्रमी” बना कर वे अपने लोगों के लिए स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
3) ईश्वर की एकाग्रता: उनकी सुनवाई और उनके स्वतन्त्र निर्णयों का नतीजा मानवीय पीड़ा से ऊपर उठकर योजना बनना है।
उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेस और छोटा विश्लेषण
- इब्रानी भविष्यवाणी में लौटना और उद्धार के विषय का संदर्भ: यह्र/यूनानी समानार्थी विचारों में विश्वास की पुनर्स्थापना है।
- ईश्वरीय दया का स्थायित्व: यहोवा की प्रतिज्ञा और उनके प्रति आस्था की पुष्टि।
- कुटुम्ब और देश की पुनर्स्थापना: यहूदियों के सामाजिक-आर्थिक जीवन में व्यवस्थित पुनर्निर्माण का संकेत।
व्यावहारिक विचaran: आज के पाठ के साथ लगन
1) कठिन समय में भी ईश्वर की कृपा पर भरोसा रखें; वह लौटने और स्थापित होने के लिए मार्ग खोलते हैं।
2) अपने समुदाय के भीतर दया और स्वागत को समर्थ बनाएं; यह उद्धार की प्रक्रिया का अंग है।
संक्षिप्त देवotional विचार
जब हम असफलताओं के बीच अपने आप को असहाय पाते हैं, तब ईश्वर का वादा हमें आश्वस्त करता है कि वह हमारी ओर दया के साथ देखता है और एक नए आरम्भ के लिए प्रेरित करता है—जैसे यहूदा के घराने को पुनः बसाने की योजना में। वह हमारा पिता है और हम उसकी सुनते हैं; उसकी शक्ति हमें आगे बढ़ाती है।
आवश्यक संदर्भ-संदेश
यहोवा के वचन में उद्धार और बेवार्ता एकसाथ आते हैं—ईश्वर की यह नीति हमें बताती है कि कृपा के साथ क्रांति, प्रेम के साथ नेतृत्व और सुरक्षा के साथ सामुदायिक पुनर्निर्माण संभव है।
कहानी-आउटलुक
यह वचन भविष्य में एक पुनर्स्थापना के दायरे को स्पष्ट करता है—यहूदा और यूसुफ के घराने एक साथ खड़े होंगे, क्योंकि ईश्वर ने उनके साथ दृढ़ प्रेम और समाज-व्यवस्था की योजना बनाई है।
नोट्स और उद्धरण
इस पाठ के समकालीन व्याख्यानों में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार मिलते हैं। नीचे बताए गए उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो संक्षेप रूप में उद्धृत होंगे:
Adam Clarke से “God will be their God” प्रकार की प्रतिज्ञात्मक भाषा का संस्कार; Barnes और Henry के तात्त्विक संकेतों के साथ मिलकर यह भाग उद्धार के कार्य को उभारते हैं।