Old Testament
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जकर्याह 10:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह उस कष्टदाई समुद्र में से होकर उसकी लहरें दबाता हुआ जाएगा और नील नदी का सब गहरा जल सूख जाएगा। अश्शूर का घमण्ड तोड़ा जाएगा और मिस्र का राजदण्ड जाता रहेगा।
जकर्याह 10:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 10:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 30:13 (HINIRV) »
“परमेश्वर यहोवा यह कहता है, मैं नोप में से मूरतों को नाश करूँगा और उसमें की मूरतों को रहने न दूँगा; फिर कोई प्रधान मिस्र देश में न उठेगा; और मैं मिस्र देश में भय उपजाऊँगा।

यशायाह 43:2 (HINIRV) »
जब तू जल में होकर जाए, मैं तेरे संग-संग रहूँगा और जब तू नदियों में होकर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेगी; जब तू आग में चले तब तुझे आँच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी।

प्रकाशितवाक्य 16:12 (HINIRV) »
छठवें स्वर्गदूत ने अपना कटोरा महानदी फरात पर उण्डेल दिया और उसका पानी सूख गया कि पूर्व दिशा के राजाओं के लिये मार्ग तैयार हो जाए। (यशा. 44:27)
जकर्याह 10:11 का संदर्भ और उसका अर्थ
यह वचन अविश्वसनीय संकटों के बीच ईश्वर की कृपा और उसकी नियति का संकेत देता है। याकूब के परे बचे हुए लोग भीषण जल-तरंगों से गुजरेंगे, परन्तु प्रभु की सहायता से वे विजय पाएंगे। यहाँ नील नदी के जल का सूखना और अश्शूर-राज की क्षीणता उस समय के राजनीतिक-धार्मिक स्थिति पर चित्रात्मक टिप्पणी है, जो यह दिखाती है कि परमेश्वर अपने लोगों के विरोधियों के अभिमान को तोड़ देता है और अन्य राष्ट्रों को भी अपने नियंत्रण में लाता है।
मूल भावार्थ और क्रमबद्ध समझ
यहोवा अपने दासों के लिए सुरक्षा बनाए रखता है और उन्हें ताकत देता है ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रहें। इस वचन में “उस कष्टदाई समुद्र” और “नील नदी का गहरा जल” जैसी प्राकृतिक प्रतिमाओं के माध्यम से अत्याचारी शक्तियों के विरुद्ध ईश्वर की सहायता स्पष्ट है। अश्शूर का घमण्ड टूटा जाएगा और मिस्र का राजदण्ड जाता रहेगा—ये दोनों संकेत तत्कालीन साम्राज्यों के प्रभुत्व के विरोधाभास और अंत में ईश्वर के उद्देश्य की खोज को दर्शाते हैं।
मुख्य विषय
संस्कृत टिप्पणियाँ और गूढ़ अंश
यहाँ गहरी व्याख्या में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सामान्य प्रवृत्ति यह बताती है कि ईश्वर का उद्धार-कार्य अक्सर अत्याचार के विरुद्ध स्थिरता और विश्वास की परीक्षा के रूप में आता है। उनके अनुसार, यह वचन यह दिखाता है कि निर्बल राष्ट्र भी ईश्वर के हाथों से सुरक्षा पा सकता है और शक्तिशाली राजा भी नीचे गिर सकता है जब परमेश्वर की योजना हो।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप) और उनके तात्पर्य
1) उत्पत्ति और आशीष के साथ, जिन्हें ईश्वर अपने लोगों के लिए उद्धार के तौर पर लाते हैं—यह संकेत देता है कि किस प्रकार संकटों में भी उसकी प्रतिज्ञा दृढ़ रहती है।
2) भजन-गीतों में कठिनाई के समय ईश्वर की सहायता का उल्लेख मिलता है—यह उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो केंद्रित विश्वास बनाये रखते हैं।
3) दानिएल के समय की घटनाएं शासकों के घमण्ड के विरुद्ध ईश्वर के नियंत्रण को पुष्ट करती हैं—समाप्ति में प्रभु अपने उद्देश्य को पूरा करता है।
व्यावहारिक विचार
आज के संदर्भ में यह वचन हमें यह सीख देता है कि आर्थिक-राजनीतिक दबाव या बाहरी संकट कितने भी बड़े क्यों न हों, ईश्वर के समर्थित लोग भयभीत न हों। वह मार्ग दिखाता है, साहस देता है, और अशांत क्षणों में भी आशा बनाये रखता है। अपने जीवन के संघर्षों में ईश्वर की प्रभुता की आस्था रखें, ताकि धैर्य और विश्वास से उत्तर मिल सके।
संक्षिप्त समापन
जकर्याह 10:11 में ईश्वर की रक्षा और प्रभुत्व की पुष्टि है—कठिन समुद्री लहरें, सूखे जल, और बड़े राज्यों की घमण्ड सब कुछ बनाम प्रभु की योजना के सामने क्षीण हो जाते हैं। उद्धार उसका है जो कठिनाईयों में भी भरोसा बनाए रखे।