Old Testament
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जकर्याह 10:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“मेरा क्रोध चरवाहों पर भड़का है, और मैं उन बकरों को दण्ड दूँगा; क्योंकि सेनाओं का यहोवा अपने झुण्ड अर्थात् यहूदा के घराने का हाल देखने को आएगा, और लड़ाई में उनको अपना हष्टपुष्ट घोड़ा सा बनाएगा।
जकर्याह 10:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 10:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 23:1 (HINIRV) »
“उन चरवाहों पर हाय जो मेरी चराई की भेड़-बकरियों* को तितर-बितर करते और नाश करते हैं,” यहोवा यह कहता है।

नीतिवचन 21:31 (HINIRV) »
युद्ध के दिन के लिये घोड़ा तैयार तो होता है, परन्तु जय यहोवा ही से मिलती है।

यिर्मयाह 25:34 (HINIRV) »
हे चरवाहों, हाय-हाय करो और चिल्लाओ, हे बलवन्त मेढ़ों और बकरो, राख में लौटो, क्योंकि तुम्हारे वध होने के दिन आ पहुँचे हैं, और मैं मनोहर बर्तन के समान तुम्हारा सत्यानाश करूँगा। (याकू. 5:5)
जकर्याह 10:3 - संदर्भ और समीक्षा
पवित्र ग्रंथ के इस अंश में परमप्रधान यहोवा अपने झुण्ड के प्रति गम्भीर क्रोध व्यक्त कर रहे हैं। यहोदा का घराना, जो पहले से भय से मुक्त और आशा से जुड़ रहा था, अब आत्म-विश्वास के क्षय और निर्बलताओं के कारण संकट में है। यहोवा की यह चेतावनी इस बात को दर्शाती है कि धर्म-व्यवस्था में असत्य, अन्धविश्वास या भ्रष्टाचार के डरावने परिणाम होते हैं।
धर्म का यह स्पष्ट संदेश
यहोवा का क्रोध, यहाँ “चरवाहों” पर आयेगा; सत्य यह है कि नेतागण, राजनेता, और शिक्षक ही नहीं, बल्कि आधिकारिक ठहराव वाले अधिकारी, यदि योग्य मार्गदर्शन नहीं देते, तो वे पूण्य कामों में बाधक बनते हैं। इस उद्धरण में यहूदी कुटुम्बों के बीच प्रभु की जिम्मेदारी स्पष्ट है—झुण्ड का सुरक्षित, स्थायी पालन उन नेताओं पर निर्भर है जो ईश्वर के नियमों के अनुरूप मार्गदर्शन दें।
मुख्य शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
पवित्र ग्रंथ के साथ संबंध
इस पाठ को नीचे के अन्य हिस्सों से जोड़ा जा सकता है:
इन cross-references से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का क्रोध तब दिखता है जब नेतृत्व सच, धर्म, और दयालुता के नियमों से विचलित हो जाए।
आज का अनुप्रयोग
हमारे जातीय या धार्मिक समुदायों में यदि नेतृत्व सत्य, नम्र और आत्म-परिशुद्धता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते, तो परिणाम सामाजिक उथल-पुथल और आत्म-विश्वास की कमी के रूप में सामने आते हैं। पवित्र जीवन के लिए हमें अपनी आस्थाओं को क्रियान्वित, निष्काम और नम्रता से प्रस्तुत करना चाहिए; साथ ही समुदाय के भीतर न्याय, दया और सत्य के अभ्यास को बढ़ावा देना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति—नेता हो या अनुयायी—पर यह आवश्यक है कि वह परमेश्वर के नियमों के अनुरूप मार्गदर्शन दे और झुण्ड के स्वास्थ्य के लिए सजग रहे।
संक्षिप्त निष्कर्ष
जकर्याह 10:3 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर की धारा में बहते झुण्ड की सुरक्षा और शक्ति नेताओं के नैतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व पर निर्भर है। सही मार्गदर्शन, आत्म-स्वीकृति, और धर्मपालन से भरी हुई एक राष्ट्र-परिवार की संप्रभुता बनी रहती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (पुष्टि हेतु)
अगर उद्धृत होने वाले किसी पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध होते हैं, उन्हें नीचे संकेत किया गया है:
उद्धरण: “... ” (Matthew Henry) — उपलब्ध नहीं होने पर छोड़ा गया है।
नोट: नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसेस केवल संदर्भ हेतु हैं और पूर्ण पद्य-गीत नहीं हैं।