Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
योएल 2:1 योएल 2:2 योएल 2:3 योएल 2:4 योएल 2:5 योएल 2:6 योएल 2:7 योएल 2:8 योएल 2:9 योएल 2:10 योएल 2:11 योएल 2:12 योएल 2:13 योएल 2:14 योएल 2:15 योएल 2:16 योएल 2:17 योएल 2:18 योएल 2:19 योएल 2:20 योएल 2:21 योएल 2:22 योएल 2:23 योएल 2:24 योएल 2:25 योएल 2:26 योएल 2:27 योएल 2:28 योएल 2:29 योएल 2:30 योएल 2:31 योएल 2:32



यहोएल 2:3 का अर्थ सरल शब्दों में
जोएल 2:3 कहता है, “उसके आगे-आगे तो आग भस्म करती जाएगी, और उसके पीछे-पीछे लौ जलाती जाएगी… उजाड़ मरुस्थल बन जाएगी,” उसका मकसद है說 कि परमेश्वर की अपवाद-युक्त आलोचना के समय आने वाला निर्जन प्रकोप पहले लालची समय के समान प्रबल और तत्पर रहता है, परन्तु उसका प्रभाव पीछे से भी जारी रहेगा। यह उद्धारक चेतावनी है कि जैसा व्यवहार पहले उपयुक्त और Seigneur के विरुद्ध है, वैसा ही प्रभाव अंततः भूमि पर फैलेगा।
परिप्रेक्ष्यीय पृष्ठभूमि
पद ποιείται के संदर्भ में यह योएल की पुस्तक में है, जिसमें एक प्रमुख ध्वनि है—भय और प्रार्थना के साथ पुनःस्थापना की संभावना। यह वक्तव्य उस दिन के लिए संकेत देता है जब परमेश्वर की उपस्थिति और न्याय क्रम में आता है: आग और लौ से भरे चक्र से भूमि का आकार और स्वरूप बदल सकता है, पहले भाग में साधनों का विनाश और दूसरे भाग में पतन का आंतरिक क्रम।
व्याख्यात्मक बिंदु
टिप्पणी से मिलते संकेत (संक्षिप्त सार)
यह पद एक चेतावनी की तरह है कि परमेश्वर के न्याय के समय लोगों की प्रतिक्रियाएं भिन्न होंगी: कुछ भयसे पाप से पलायन करेंगे, अन्य भय के कारण और पाप के कारण और अधिक बर्बाद होंगे। यह भी संकेत देता है कि राज्य और भूमि में क्रम-परिवर्तन तब होता है जब लोग परमेश्वर के सामने लौटते हैं या नहीं लौटते।
संस्कृतियाँ और उद्धरणसम्बन्धी दृष्ठान्त
यह संदेश “आग” और “बिजली” के प्रतीकों के जरिये दर्शाता है कि भय और दंड एक साथ आते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस (संदर्भित पाठ) और उनका संक्षिप्त अर्थ
व्यावहारिक takeaway
जोएल 2:3 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के न्याय के समय हमें अपने पाप से पलायन नहीं करना चाहिए। भय से डरते हुए भी हम प्रभु के पास लौटें, क्योंकि उद्धार और पुनःस्थापना वही संभव बनाते हैं जो मंदिर-परिचारक के रूप में आते हैं।
नोट: नीचे उद्धृत विशिष्ट उद्धरण, यदि उपलब्ध हों, Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मौलिक पाठ से दिए जा सकते हैं, परन्तु यहाँ पाठ-आधारित सारणा में मुख्य भाव पर केंद्रित हैं।