Old Testament
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जकर्याह 7:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वरन् मैं उन्हें उन सब जातियों के बीच जिन्हें वे नहीं जानते, आँधी के द्वारा तितर-बितर कर दूँगा, और उनका देश उनके पीछे ऐसा उजाड़ पड़ा रहेगा कि उसमें किसी का आना जाना न होगा; इसी प्रकार से उन्होंने मनोहर देश को उजाड़ कर दिया।”
जकर्याह 7:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 7:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 28:33 (HINIRV) »
तेरी भूमि की उपज और तेरी सारी कमाई एक अनजाने देश के लोग खा जाएँगे; और सर्वदा तू केवल अत्याचार सहता और पिसता रहेगा;

व्यवस्थाविवरण 28:64 (HINIRV) »
और यहोवा तुझको पृथ्वी के इस छोर से लेकर उस छोर तक के सब देशों के लोगों में तितर-बितर करेगा; और वहाँ रहकर तू अपने और अपने पुरखाओं के अनजाने काठ और पत्थर के दूसरे देवताओं की उपासना करेगा।

व्यवस्थाविवरण 4:27 (HINIRV) »
और यहोवा तुमको देश-देश के लोगों में तितर-बितर करेगा, और जिन जातियों के बीच यहोवा तुमको पहुँचाएगा उनमें तुम थोड़े ही से रह जाओगे।
जकर्याह 7:14 पर टिप्पणी—यह बात क्यों मायने रखती है
यहोवा ने यहूदियों से प्राचीन अनुष्ठानों के अनुसार तेज़-तर्रार विकल्पों की अवधि के बाद भी उनकी दया और चेतावनी का संदेसा दिया। जकर्याह 7:14 में स्पष्ट है कि परमेश्वर उन दिनों में भय, डर और कूटनीतिक दमन से नहीं बल्कि अपनी शुद्धता, पवित्रता और प्रामाणिक प्रार्थना के महत्व पर बल देते हैं। amikor लोग पवित्र पर्वों के नाम पर प्रस्तुत होते हैं, परंतु उनके हृदय परमेश्वर के निर्देश से दूर होते हैं, तो परिणामस्वरूप उनके देश उजाड़ हो जाते हैं। इसVerse में, ईश्वर एक बार फिर से चेतावनी देते हैं कि उनकी अवहेलना और असत्यपूर्ण धर्मयाचना से विनाश संभव है।
मुख्य संदर्भ और मूल संदेश
यह भाग बाइबल के मानक संदेश का पुनरारोपण करता है कि विजयी धर्म वही है जो वाकई हृदय परिवर्तन को दर्शाता है—न कि मात्र औपचारिक क्रियाओं से। परमेश्वर कहते हैं कि अगर लोग जुदाई, अन्य देवताओं की आराधना या अन्याय में लिप्त रहें, तो उनका देश आंतरिक और बाह्य रूप से उजाड़ हो जाएगा, ताकि कोई आना-जाना न सके। यह एक स्पष्ट warning है कि अलौकिक दया तब तक सफल नहीं जब तक लोग पापी रास्तों से लौट कर न आ जाएं।
प्रमुख विषय-वक्र
अनुक्रमित क्रॉस-रेफरेंसेस
- मत्ती 3:8-10: फल के अनुरूप आचरण का आग्रह।
यह दिखाता है कि आंतरिक परिवर्तन के बिना बाहरी कर्म केवल स्थानिक ढाँचे बनाते हैं, परन्तु वास्तविक धार्मिक जीवन नहीं बनते।
- मिलकर 2 इतिहास 36:21: नगरों के उजाड़ होने का इतिहास बताता है कि पथभ्रष्टता कब और कैसे समाज के भाग्य को बदल देती है।
- होशे 4:6: ज्ञान की कमी और वैध’enseignement का अभाव कैसे बन्धन बन सकता है; यह दिखाता है कि डर और शिक्षा बराबर जरूरी हैं।
पारिवारिक और सामाजिक आयाम
यहाँ संदेश यह है कि धार्मिक आचरण केवल मंदिर-यात्रा तक सीमित नहीं रहा करना चाहिए, बल्कि यह नैतिकता, न्याय और समानता के सामाजिक आयामों में भी प्रत्यक्ष होना चाहिए। when एक समुदाय अपने धर्म के नाम पर भुलावे कर रहा हो, तो उसे आत्म-विश्लेषण और सुधार की आवश्यकता है।
स्थिति से प्रेरित devotional विचार
हम में से हर एक के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने हृदय को परमेश्वर के सामने साफ़ करें—क्योंकि आंतरिक पवित्रता ही असली आकाशीय बर्सातlana लाती है। अगर हम अपने जीवन के किसी क्षेत्र में अनुचित आचरण या अन्य देवताओं के लिए जगह बनाते हैं, तो परमेश्वर हमारी आज़ादी को रोक सकता है; परन्तु वह हर समय दयालु है जो लौटने पर प्रेम से स्वीकार करता है।
संक्षेपित योगदान—अर्ध-विश्लेषण
यहोवा का उद्देश्य केवल दण्ड नहीं है, बल्कि दया और सुधार के मार्ग दिखाना है। अवहेलना के बजाय, यदि हम ईमानदारी से पाप से उलट कर परमेश्वर के मार्ग पर चलते हैं, तो देश और जीवन में फिर से समृद्धि आ सकती है।
छोटे व्यावहारिक निष्कर्ष
टुकड़ों के साथ संदर्भ
हिंदी बाइबल पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि उच्च धार्मिक प्रदर्शन तब सार्थक होता है जब हृदय में सचाई और न्याय का वास हो।
नोट: यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण अगर उपलब्ध हों, तो नीचे संकेतित होंगे।