Old Testament
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जकर्याह 7:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
न तो विधवा पर अंधेर करना, न अनाथों पर, न परदेशी पर, और न दीन जन पर; और न अपने-अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना करना।”
जकर्याह 7:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
जकर्याह 7:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 5:28 (HINIRV) »
वे मोटे और चिकने हो गए हैं। बुरे कामों में वे सीमा को पार कर गए हैं; वे न्याय, विशेष करके अनाथों का न्याय नहीं चुकाते; इससे उनका काम सफल नहीं होता वे कंगालों का हक़ भी नहीं दिलाते।

यशायाह 1:23 (HINIRV) »
तेरे हाकिम हठीले और चोरों से मिले हैं। वे सब के सब घूस खानेवाले और भेंट के लालची हैं। वे अनाथ का न्याय नहीं करते, और न विधवा का मुकद्दमा अपने पास आने देते हैं।

भजन संहिता 72:4 (HINIRV) »
वह प्रजा के दीन लोगों का न्याय करेगा, और दरिद्र लोगों को बचाएगा; और अत्याचार करनेवालों को चूर करेगा*। (यह. 11:4)
जकर्याह 7:10 का संदर्भ और उसका अर्थ
परोक्ष रूप से यह वचन वह संदेश है जो यहूदी समाज के भीतर न्याय और दयालुता की वास्तविक जिम्मेदारी को पुनः स्थापित करता है। बाइबल के समय में धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी उस भक्तिशील जीवन का अहम हिस्सा था जिसका ईश्वर ने सभा-युग में मांग की थी। जकर्याह 7:10 का मूल उद्देश्य यह है कि ईश्वर के दूरबीन-नज़र वाले मन में నీति-हृदय वह है जिसमें सामाजिक विवेक भी समाहित हो।
मुख्य केंद्रिय अर्थ
यह वचन चार तरह के कमजोर वर्गों के प्रति निष्पक्षता और करुणा की मांग करता है: विधवा, अनाथ, विदेशी प्रवासी, और दीन-हीन। इन सब के प्रति अन्याय या भेदभाव के बिना व्यवहार करना, जबकि अपनेपन की कल्पनाओं में दूसरों को नुकसान पहुँचाने से परहेज करना, ईश्वर के न्यायशास्त्र का अभिन्न भाग है। न केवल धार्मिक आचरण, बल्कि सामाजिक व्यवहार भी पवित्र समाज की पहचान बनता है।
मुख्य विषय (तीन बिंदु)
संबद्ध मार्गदर्शक उद्धरण (संश्लेषित विचार)
हमारे पारंपरिक पवित्र-दृष्टांतों के प्रकाश में, पहली प्राथमिकता सामाजिक-न्याय की है। इतिहास-जनक चर्चवार टिप्पणीकारों ने इस आयाम को एक साथ जोड़ा है: अधिग्रहीत आचरण को ईश्वर के क़ायदे के भीतर एकीकृत करना चाहिए, ताकि भौतिक शुद्धता के साथ आत्मिक शुद्धि भी मिली रहे।
प्रमुख क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)
आज के संदर्भ से जुड़ी तीन सम्बन्धित पंक्तियाँ दृष्टिगोचर होती हैं:
इन संदर्भों में संकल्पना है कि समाजिक न्याय और करुणा एक ही धागे से जुड़े हैं—व्यक्ति के आचरण और समुदाय की भूमिका के बीच संतुलन बनना चाहिए।
व्यावहारिक चिंतन
आज के समाज में भी कमजोर वर्गों के प्रति समानता और सम्मान बनाए रखना चाहिए। निर्णय समय, मजदूरी-न्यूनीकरण, और सेवाओं तक पहुँच के विवाद में अपने स्वार्थ के बजाय उनके अधिकारों की प्राथमिकता दें। अपने आप से पूछिए: क्या मेरा व्यवहार किसी के प्रति भेदभाव या हानि की मानसिकता को बढ़ाता है, या मैं प्रेम और न्याय के साथ उनके पक्ष में खड़ हूँ?
संक्षिप्त समापन
जकर्याह 7:10 हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर की राह में सच्चा उपासना तब ही संभव है जब व्यक्तिगत आचरण और समाजिक जवाबदेही एक-दूसरे के साथ कदम मिलाकर चलते हैं—विधवा, अनाथ, परदेशी और दीन जन के प्रति निष्पक्षता और संवेदना हमारी रहने की जमीन हो।
संदर्भ-चिह्न: यह संदेश हमारे समय के लिए भी वैध है—धर्म, न्याय और करुणा का संगम ही परमेश्वर के राज्य का संकेत है।