Old Testament
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जकर्याह 7:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्या यह वही वचन नहीं है, जो यहोवा पूर्वकाल के भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा उस समय पुकारकर कहता रहा जब यरूशलेम अपने चारों ओर के नगरों समेत चैन से बसा हुआ था, और दक्षिण देश और नीचे का देश भी बसा हुआ था?”
जकर्याह 7:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 7:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 17:26 (HINIRV) »
लोग होमबलि, मेलबलि अन्नबलि, लोबान और धन्यवाद-बलि लिए हुए यहूदा के नगरों से और यरूशलेम के आस-पास से, बिन्यामीन के देश और नीचे के देश से, पहाड़ी देश और दक्षिण देश से, यहोवा के भवन में आया करेंगे।

यशायाह 1:16 (HINIRV) »
अपने को धोकर पवित्र करो: मेरी आँखों के सामने से अपने बुरे कामों को दूर करो; भविष्य में बुराई करना छोड़ दो, (1 पत. 2:1, याकू. 4:8)

यिर्मयाह 7:23 (HINIRV) »
परन्तु मैंने तो उनको यह आज्ञा दी कि मेरे वचन को मानो*, तब मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँगा, और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे; और जिस मार्ग की मैं तुम्हें आज्ञा दूँ उसी में चलो, तब तुम्हारा भला होगा।
जकर्याह 7:7 — अर्थ का स्पष्ट संकेत
इस वचन का सीधा आशय है: यह वही वचनों का स्मरण है जो पूर्वकाल के भविष्यद्वक्ताओं ने समय-समय पर कहे थे—कि त्याग-उत्सव, आध्यात्मिक स्थिति और धार्मिक अनुशासन के संदर्भ में यरूशलेम और देश के नागरिको को बुलावा दिया गया है। यहाँ कहा गया है कि जब यरूशलेम अपने चारों ओर के नगरों समेत चैन से बसा हुआ था, और दक्षिण देश और नीचे का देश भी बसा हुआ था, तब भी यह संदेश स्थिर और स्पष्ट रहा था: ईश्वर के आशीर्वाद के समय में भी नीतिगत रूप से पवित्रता और नैतिकता की मांग बनी रही।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह हिस्से जकरयाह के पुस्तक के उन हिस्सों से जुड़ा है जो परमेश्वर के लोग के बीच प्रचलित शांति-समय और उनकी आध्यात्मिक दशा के बीच तकरार का पाठ पढाते हैं। चूँकि यह वाक्य एक स्मरण व्यवस्था के रूप में आता है, लेखक यह संकेत देता है कि ईश्वर के कहे हुए संदेश समय-समय पर प्रवर्तित होते रहे और उनका मकसद लोगों को परमेश्वर के साथ स्थिर और शरीक रखना रहा है—चाहे सामाजिक या राजनीतिक स्थिति कैसी भी हो।
Interpretive insights
कथन-सूत्रित विचार
अनुशीलन योग्य क्रॉस-रेफरेंसेस
1) स्पष्ट समानता: पिछले समयों में परमेश्वर के वचनों को याद दिलाते समय शांति और सुरक्षा की स्थिति का संकेत दिया गया। यह दिखाता है कि बाहरी शांति के बीच भी दायित्व और आंतरिक पवित्रता आवश्यक है।
2) न्याय और त्योहारों का संदर्भ: पूर्व काल के दायित्व याद दिलाने से यह स्पष्ट होता है कि मंदिर-आस्था और सामाजिक न्याय एक दूसरे से जुड़े हैं; धर्म-संरचना केवल आचरण का मामला नहीं, वरन् समावेशी जीवन का महत्व भी है।
3) भविष्यद्वक्ताओं का संदेश: इतिहास में बार-बार देखा गया है कि परमेश्वर अपने प्रवचनों को समय के अनुसार याद दिलाते हैं, ताकि लोग सावधान रहें।
सूक्ष्म पाठ-निष्कर्ष
यह वचन बताता है कि शांति और संपन्नता के बावजूद परमेश्वर के वचन की स्मृति और आचरण की सच्चाई बनाये रखना चाहिए। जो लोग भू-स्वास्थ्य के लालच में रहते हैं, वे भी आत्रेही चेतावनियों को देखकर अपने आचरण में सुधार कर सकें। धार्मिक जीवन में सतत निष्ठा ही वास्तविक सुरक्षित समाज की कुंजी है।
प्रायोगिक takeaway
महत्वपूर्ण उद्धरण (पुस्तक-आधारित संदर्भ)
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संदेश कायम है: पूर्वकाल के वचनों का स्मरण और हर समय के लिए आचरण की प्रेरणा।