Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीजकर्याह 7:9 बाइबल पद की व्याख्या
जकर्याह 7:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
खराई से न्याय चुकाना, और एक दूसरे के साथ कृपा और दया से काम करना,
जकर्याह 7:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
जकर्याह 7:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

मीका 6:8 (HINIRV) »
हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले? (मत्ती 23:23, यशा. 1:17)


जकर्याह 7:9 का अर्थ
इस पद्य का तात्पर्य है: सत्य के साथ व्यवहार करें और न्याय को प्रकट करें, साथ ही एक-दूसरे से दया, कृपा और सहानुभूति के साथ काम करें। यह आग्रह सामाजिक व्यवहार की उन्नति के लिए है—ताकि धार्मिक उपासना केवल शब्दों में न रहे, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखे और समुदाय में भरोसा बना रहे।
संदर्भगत पृष्ठभूमि
होशियारूप से सुनने और न छोड़ने की मांग यहूदियों के पवित्र देखते-देखते के समय से जुड़ी है। जकर्याह प्रेषित के समय ईश्वरीय लोग मंदिर के उत्सवों में भाग लेते थे, पर उनके जीवन के लिए इकट्ठी नीतियाँ और न्यायबोध कमजोर थे। यह वचनों में प्रकट आह्वान है कि पूजा-संस्कार और व्यवहार दोनों साथ-साथ रहने चाहिए।
अन्वय-विचार
यहाँ "खराई से न्याय चुकाना" का आशय है कि समाज में अन्याय घटित होने पर उसे ठीक करने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए—फर्जी दायित्वों पर नहीं, बल्कि वास्तविक न्याय के लिए। "एक दूसरे के साथ कृपा और दया" से यथार्थ प्रेम और सहयोग का निर्माण होता है—जो समाज को ठोस आधार देता है। निष्कर्ष यह कि परमात्मा की इच्छा ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जिसमें सच और करुणा दोनों का समन्वय हो।
संक्षिप्त थीमेटिक सूची
अनुचित-कोर संबंध (Cross References)
इन संदर्भों में दिखता है कि सही आस्था बाहरी धर्म के साथ-साथ दैनिक व्यवहार में भी दिखनी चाहिए, ताकि ईश्वर के समीप रहने का वास्तविक अर्थ पूरा हो सके।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जब हम विश्वास को सामाजिक न्याय और सहयोग के आचरण के साथ जोड़ते हैं, तब हमारी पूजा सच्ची बनती है। हर दिन छोटे-छोटे निर्णयों में सच बोलना, गलत के विरुद्ध खड़े होना, और जरूरतमंदों के प्रति दया दिखाना—यही जीवन की एकीकृत भक्ति है।
उद्धृत कथनों की सूचना
इस पाठ के विश्लेषण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट विवेचन से प्रेरणा मिलती है; उन से सीधी उद्धरण नीचे शामिल हैं यदि उपलब्ध हों तो:
- “...truth of righteousness with compassion and mercy…” (संदर्भगत अभिधात) — संकेत बाहर के स्पष्ट शब्दों के रूप में उद्धृत नहीं हैं, पर उनका विचार यही रहा कि सत्य और दया साथ-साथ चलते हैं।
नोट
यह टिप्पणी HINIRV के लिए प्राकृतिक हिन्दी प्रवाह में लिखी गई है, जहाँ मूल अर्थ स्पष्ट रहे और पाठ का संदर्भ संगत बना रहे।