Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 22:1 लूका 22:2 लूका 22:3 लूका 22:4 लूका 22:5 लूका 22:6 लूका 22:7 लूका 22:8 लूका 22:9 लूका 22:10 लूका 22:11 लूका 22:12 लूका 22:13 लूका 22:14 लूका 22:15 लूका 22:16 लूका 22:17 लूका 22:18 लूका 22:19 लूका 22:20 लूका 22:21 लूका 22:22 लूका 22:23 लूका 22:24 लूका 22:25 लूका 22:26 लूका 22:27 लूका 22:28 लूका 22:29 लूका 22:30 लूका 22:31 लूका 22:32 लूका 22:33 लूका 22:34 लूका 22:35 लूका 22:36 लूका 22:37 लूका 22:38 लूका 22:39 लूका 22:40 लूका 22:41 लूका 22:42 लूका 22:43 लूका 22:44 लूका 22:45 लूका 22:46 लूका 22:47 लूका 22:48 लूका 22:49 लूका 22:50 लूका 22:51 लूका 22:52 लूका 22:53 लूका 22:54 लूका 22:55 लूका 22:56 लूका 22:57 लूका 22:58 लूका 22:59 लूका 22:60 लूका 22:61 लूका 22:62 लूका 22:63 लूका 22:64 लूका 22:65 लूका 22:66 लूका 22:67 लूका 22:68 लूका 22:69 लूका 22:70 लूका 22:71


लूका 22:71 — तत्कालीन परिस्थिति और गवाही का निष्कर्ष
पद का आसन्न संदर्भ: यह वचन उन कठिन क्षणों में आता है जब प्रेरित येसु के साथ अपने जोखिमपूर्ण गवाही के अंतिम चरण में पहुँचते हैं। यीशु के पकड़े जाने से पहले पतरस और अन्य सदस्य यह अनुभव कर रहे थे कि उनकी आस्था और भरोसा कैसे परखेंगे। इसी क्रम में एक सदस्यता और निर्णय का दृश्य उभरता है: शांति के साथ नहीं, बल्कि गवाही का अस्वीकार और तर्क-संरचना अपनाते हुए।
पद का तात्पर्य और दैवीय संदर्भ
यह वाक्य दिखाता है कि मानव स्वभाव में भय, दबाव और दबाव में पड़कर निर्णय लेने की प्रवृत्ति कितनी मजबूत होती है। विशुद्ध ईमानदारी और साहस के साथ गवाही देना तब कठिन होता है जब परीक्षण सामने होते हैं। फिर भी प्रभु का उद्देश्य स्पष्ट है: वे विश्वास की प्रामाणिकता की कसौटी को उजागर करते हैं कि हमारा विश्वास कितनी दृढ़ता से निष्ठा और सत्य के साथ टिके रहता है।
मुख्य शब्दों और छवियों की स्पष्टता
सम्बन्धित पाठ
1) मत्ती 26:62–63 और मरकूस 14:60–61 — यीशु के विरुद्ध उत्पन्न बहस और पिलपिले गवाही के बीच, गवाही की महत्ता और सत्य का सामना स्पष्ट होता है।
2) मन्न 22:37–40 — प्रेम पर आधारित आज्ञाओं के संदर्भ में सत्य-जीवन के लिए प्रेरणा मिलती है, ताकि हमारा गवाही प्रेम और सरलता से प्रेरित हो।
3) यूहन्ना 18:37—38 — सत्य के सामने राज्ययन्त्र की बारीकियाँ और गवाही का दायित्व कैसे निभाया जाना चाहिए, यह दिखाता है।
पवित्रता और विश्वास पर ईश्वरीय प्रकाश
यह पाठ यह बताता है कि गवाही-सत्य एक ऐसी परीक्षा है जो हमारे विश्वास की प्रामाणिकता दिखाती है। परमेश्वर वही है जो हमें मुश्किल समय में भी धैर्य और स्पष्ट विवेक देता है।
आज के लिए आवेदन
संक्षिप्त समेकन
जो कहता है कि हमने उसके मुँह से सुन लिया है, वह अपने रिकॉर्ड को नज़रअंदाज नहीं करना चाहता; बल्कि यह चिल्लाहट है कि सत्य को लेकर प्रतिबद्ध रहें। इस घटना से प्रेरित होकर हम भी जीवन के कठिन मोड़ों पर सत्य और प्रेम के साथ खड़े होने का संकल्प लें।
उद्धरण-योग्य टिप्पणीकारों से संक्षिप्त संकेत:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के प्रवचनों को समायोजित करते हुए यह टिप्पणी परमेश्वर के सत्य के साथ nuestra विश्वास की गहराई को उजागर करती है।
संकेत स्रोत और उद्धरण
यदि आवश्यक हो तो नीचे उद्धृत छोटे उद्धरणों में से कुछ सीधे पाठ से लिए जा सकते हैं:
“अब हमें गवाही की क्या आवश्यकता है; क्योंकि हमने आप ही उसके मुँह से सुन लिया है।” — लूका 22:71
नोट: इस पंक्ति के संप्रेषण के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे-छोटे विचार उद्धृत हैं, परन्तु पूर्ण वाक्यों का पाठ यहाँ नहीं दिया गया है।