Old Testament
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लूका 22:1 लूका 22:2 लूका 22:3 लूका 22:4 लूका 22:5 लूका 22:6 लूका 22:7 लूका 22:8 लूका 22:9 लूका 22:10 लूका 22:11 लूका 22:12 लूका 22:13 लूका 22:14 लूका 22:15 लूका 22:16 लूका 22:17 लूका 22:18 लूका 22:19 लूका 22:20 लूका 22:21 लूका 22:22 लूका 22:23 लूका 22:24 लूका 22:25 लूका 22:26 लूका 22:27 लूका 22:28 लूका 22:29 लूका 22:30 लूका 22:31 लूका 22:32 लूका 22:33 लूका 22:34 लूका 22:35 लूका 22:36 लूका 22:37 लूका 22:38 लूका 22:39 लूका 22:40 लूका 22:41 लूका 22:42 लूका 22:43 लूका 22:44 लूका 22:45 लूका 22:46 लूका 22:47 लूका 22:48 लूका 22:49 लूका 22:50 लूका 22:51 लूका 22:52 लूका 22:53 लूका 22:54 लूका 22:55 लूका 22:56 लूका 22:57 लूका 22:58 लूका 22:59 लूका 22:60 लूका 22:61 लूका 22:62 लूका 22:63 लूका 22:64 लूका 22:65 लूका 22:66 लूका 22:67 लूका 22:68 लूका 22:69 लूका 22:70 लूका 22:71



लूका 22:40 — उस जगह पहुँचकर उसने उनसे कहा, “प्रार्थना करो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो।”
तत्काल संदर्भ और स्थिति
यूहन्नी आख्यानों के ठीक पीछे के घटनाक्रम में यीशु कोग़्रंथियों के नेपथ्य से गिरफ्तार करने की तैयारी चल रही है। गिड़गिडाते दिन से पहले कैसे यीशु अपने शिष्यों को निर्देशित करते हैं, यह दिखाता है कि कठिन परीक्षा के समय उनकी ढाल क्या हो सकती है। यहाँ耶शु कह रहे हैं कि वे pray करें ताकि वे परीक्षा में न पड़ें—यानी भौतिक खतरे, आत्म-शंका, और विश्वास की कमी के समय दृढ़ता बनाए रखें।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से क्या समझ मिलता है
यह वाक्य ईश्वर की सहायता के प्रति विश्वास की सक्रियता को दर्शाता है। परमेश्वर के साथ संवाद में मनुष्य कमज़ोरी के सामने भी स्थिर रह सकता है जब वह नम्रता से प्रार्थना करे।Jesus का यह निर्देश शिष्यों के भीतर आत्म-नियंत्रण और आध्यात्मिक सतर्कता को जगाने के लिए है—खासकर कठिन परिस्थितियों में कि परीक्षा और परीक्षण कितने भी कड़े क्यों न हों, परमेश्वर का आशीर्वाद उनके साथ है।
मुख्य शब्दों/ images की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित आयतें (cross-references)
1) मत्ती 26:41 — तजबीज और प्रार्थना का संयोजन: आत्मा आकर्षण पर अधिक इच्छा दिखाती है, पर शरीर दुर्बल है। यह समान विचारधारा देता है कि प्रार्थना से भीतर की शक्ति बढ़ती है।
2) मरकुस 14:38 — जागते रहने के लिए प्रार्थना करना, ताकि परीक्षा समय पर विजय मिले; यह स्पष्ट करता है कि सतर्कता और सचेतना मुख्य हैं।
3) याकूब 1:12 — trials में टिके रहने पर पुरस्कार की पुष्टि—धैर्य परमेश्वर की चुनौतियों के लिए इनाम बन सकता है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
घरेलू, कार्यस्थल या संकटकाल में भी हम दृढ़ता चाहते हैं, तो पहले प्रार्थना का आध्यात्मिक अभ्यास अपनाएं। कठिन परिस्थितियाँ अक्सर fear और doubt को बढ़ाती हैं; जैसे यीशु ने कहा, प्रार्थना से हम आत्म-नियंत्रण और विश्वास के मार्ग पर रहते हैं। अपने दिन के संपर्कों में एक छोटी-सी प्रार्थना-रूटीन रखें—जैसे निराशा के क्षण में ईश्वर को याद करना, और निर्णयों में विश्वास की दिशा लेना।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (अनुकरणीय टिप्पणीकारों से)
एडम क्लार्क और अन्य पारंपरिक टिप्पणीकारों के प्रकाशन में ऐसे क्षणों को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि प्रार्थना एक सक्रिय रक्षा है—यह आत्मा की शक्ति को पुनः प्राप्त करती है और भय को शिथिल करती है। उल्लेखनीय रूप से, उनके विचारों से यह निष्कर्ष निकलता है कि परीक्षण से पहले और दौरान प्रार्थना ही विश्वसनीय मार्गदर्शक है।
नोट: नीचे उद्धरणों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से मिलते-जुलते स्पष्ट शब्द सीधे उद्धृत नहीं हैं; यदि उपलब्ध हों तो केवल संक्षिप्त, चयनित पंक्तियाँ शामिल की जाएँगी।