Old Testament
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लूका 22:1 लूका 22:2 लूका 22:3 लूका 22:4 लूका 22:5 लूका 22:6 लूका 22:7 लूका 22:8 लूका 22:9 लूका 22:10 लूका 22:11 लूका 22:12 लूका 22:13 लूका 22:14 लूका 22:15 लूका 22:16 लूका 22:17 लूका 22:18 लूका 22:19 लूका 22:20 लूका 22:21 लूका 22:22 लूका 22:23 लूका 22:24 लूका 22:25 लूका 22:26 लूका 22:27 लूका 22:28 लूका 22:29 लूका 22:30 लूका 22:31 लूका 22:32 लूका 22:33 लूका 22:34 लूका 22:35 लूका 22:36 लूका 22:37 लूका 22:38 लूका 22:39 लूका 22:40 लूका 22:41 लूका 22:42 लूका 22:43 लूका 22:44 लूका 22:45 लूका 22:46 लूका 22:47 लूका 22:48 लूका 22:49 लूका 22:50 लूका 22:51 लूका 22:52 लूका 22:53 लूका 22:54 लूका 22:55 लूका 22:56 लूका 22:57 लूका 22:58 लूका 22:59 लूका 22:60 लूका 22:61 लूका 22:62 लूका 22:63 लूका 22:64 लूका 22:65 लूका 22:66 लूका 22:67 लूका 22:68 लूका 22:69 लूका 22:70 लूका 22:71



इस पद का स्पष्ट अर्थ
लूका 22:69 में यीशु का यह कथन कि "परन्तु अब से मनुष्य का पुत्र सर्वशक्तिमान परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठा रहेगा," भविष्यवाणी को उद्घाटित करता है कि धर्मी राजा के रूप में परमेश्वर के दाहिने स्थान पर उसका अधिकार और महिमा स्थापित है। यहाँ उसका अर्थ है—कथित क्रूसारोहण के बाद उसकी सत्ता और वर्चस्व का उद्घाटन, जो उसकी दिव्य पहचान और उद्धार के कार्य का परिणाम है। यह दाहिनी ओर बैठना एक स्थान-प्राप्त अधिकार को दर्शाता है: बेहिचक सत्ता, न्याय, और शाश्वत राज्य।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहवचन लूका के गवाह-प्रेरित कथा-क्रम का हिस्सा है जो यीशु के क्रूस-विलयन के समय की घटनाओं के बाद के संवादों को संजोता है। मारकस और मत्ती के समकक्ष पदों में भी इसी प्रकार के कथन मिलते हैं, जो भगवान के दाहिने स्थान पर उसकी रानगी को रेखांकित करते हैं। भज 110:1 और मरकुस 14:62 में भी समान विचार पाया जाता है—उनमें कहा गया है कि मसीह परमेश्वर के दाहिने स्थान पर बैठे रहेंगे, और यह संकेत देता है कि उनका शासन दिव्य अधिकार और शाश्वत प्रभाव के साथ आरम्भ होता है।
तेर-तर्क और टिप्पणी
इस कथन में प्रमुख जो व्याख्या निकलती है वह है: यीशु का सिंहासन-मुकाम “सर्वशक्तिमान परमेश्वर की दाहिनी ओर” से संकेतित है, न कि पृथ्वी-राज्य के अनुसार केवल मानव राजा की भूमिका। यह दर्शाता है कि उसका कार्य—जो पृथ्वी पर विश्राम, न्याय और उद्धार लाता है—आकाशीय सत्ता से समर्थित है। चूँकि यीशु ने अपनी पीठ के पीछे का आघात सहा और फिर जी उठा, यह पद उनके पुनर्जीवन-उत्थान के सार्वभौम अधिकार को सुनिश्चित करता है।
यहां से 2 प्रमुख बिंदु निकलते हैं: पहला, उद्धार का स्रोत परमेश्वर की योजना और महिमा है; दूसरा, मसीह का शासन समस्त इतिहास पर प्रभाव डालता है, न कि केवल एक व्यक्ति-आधारित सत्ता।
चर्च-उन्मुख सन्देश (संक्षिप्त)
अनुसंग-पसंद पवित्र संदर्भ (संदर्भ-व्याख्या)
1) मर 14:62 – मसीह के पुनर्जीवन के बाद उसका दाहिना स्थान: यह पंक्ति-प्रमाण है कि उसकी सत्ता आकाश-धरती के प्रभुत्व के साथ जुड़ी है।
2) भज 110:1 – प्रभु के दाहिने बैठना: यह उद्धरण परमेश्वर के पद-निश्चय को स्पष्ट करता है कि मसीह का शासन परमेश्वर की प्रेरणा से सम्पन्न है।
3) लूका 1:32-33 – इसे प्रभु के राज्य के स्थायी और विश्वव्यापी राज के रूप में देखा गया है।
प्रायोगिक takeaway
हमारे जीवन में यह विश्वास रखिए कि मसीह का राज स्थिर और विश्वव्यापी है। कठिन समय में भी उसका उच्च अधिकार स्थिर है, और हमें उसकी शरण में चलना है—यही जीवन का संतोष है।
विद्वानों के संक्षिप्त विचार
यह भाग शब्द-शक्ति से परिपूर्ण है, और आदि-उद्धार की दिव्य सत्ता को पुष्ट करता है। नीचे दिए गए तीन दृष्टिकोण एकीकृत करते हुए इसे सरल बनाते हैं:
इन दृष्टिकोणों के बीच एक संगत निष्कर्ष निकलता है: मसीह का दाहिना स्थान उसकी दिव्यता, प्रत्यक्ष सत्ता और उद्धार-योजना का प्रमाण है; हमारा जीवन उसी सत्य पर टिकना चाहिए।
संक्षिप्त उद्धरण (जहाँ लागू)
अगर आपके पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से संक्षिप्त उद्धरण हों, वे आवश्यक शब्द-चरणों के भीतर संक्षिप्त रूप में उल्लेखित होंगे; परन्तु यहाँ विस्तृत टेक्स्ट का उद्धरण नहीं दिया गया है, ताकि मूल-पाठ की पूर्णता बनी रहे।