Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 14:1 मरकुस 14:2 मरकुस 14:3 मरकुस 14:4 मरकुस 14:5 मरकुस 14:6 मरकुस 14:7 मरकुस 14:8 मरकुस 14:9 मरकुस 14:10 मरकुस 14:11 मरकुस 14:12 मरकुस 14:13 मरकुस 14:14 मरकुस 14:15 मरकुस 14:16 मरकुस 14:17 मरकुस 14:18 मरकुस 14:19 मरकुस 14:20 मरकुस 14:21 मरकुस 14:22 मरकुस 14:23 मरकुस 14:24 मरकुस 14:25 मरकुस 14:26 मरकुस 14:27 मरकुस 14:28 मरकुस 14:29 मरकुस 14:30 मरकुस 14:31 मरकुस 14:32 मरकुस 14:33 मरकुस 14:34 मरकुस 14:35 मरकुस 14:36 मरकुस 14:37 मरकुस 14:38 मरकुस 14:39 मरकुस 14:40 मरकुस 14:41 मरकुस 14:42 मरकुस 14:43 मरकुस 14:44 मरकुस 14:45 मरकुस 14:46 मरकुस 14:47 मरकुस 14:48 मरकुस 14:49 मरकुस 14:50 मरकुस 14:51 मरकुस 14:52 मरकुस 14:53 मरकुस 14:54 मरकुस 14:55 मरकुस 14:56 मरकुस 14:57 मरकुस 14:58 मरकुस 14:59 मरकुस 14:60 मरकुस 14:61 मरकुस 14:62 मरकुस 14:63 मरकुस 14:64 मरकुस 14:65 मरकुस 14:66 मरकुस 14:67 मरकुस 14:68 मरकुस 14:69 मरकुस 14:70 मरकुस 14:71 मरकुस 14:72



reader-friendly overview
मरकुस 14:31 में प्रेरितों के असंख्य मानवीय डर और सचेत वफादारी की संघर्षशीलता उभरती है. पेत्रुस ने अपने कहे अनुसार जहाँ तक मौत से भी डरना मना किया, वहीं वह पहले ही दिन से अपने मुँह से टकराते हुए अपने इन्कार के जोखिम को झुकना नहीं चाहा. यह वाक्य एक तीखा सत्य उजागर करता है: सतही बहादुरी, या केवल शब्दों से किया गया वचन, तब तक टिक नहीं पाता जब तक वास्तविक परीक्षा न आए। लेकिन ईश्वर की दृष्टि में यह कहानी उनके भीतर की बदलाव और क्षमा की संभावना को भी दिखाती है—कि भले ही हम संघर्ष करें, ईसा के साथ संपर्क और उसकी कृपा से परिवर्तन संभव है.
verse in context
यह वचन मरकुस के प्रमुख घटनावृत्तांत का भाग है जहाँ यीशु अगले दिन की त्रासदी के लिए चेती-signal देता है. प्रेरितों ने खुद को तर्कसंगत ठहराने की कोशिश करते हुए कहा कि वे किसी भी हालत में यीशु का इन्कार नहीं करेंगे; पर वास्तविक प्रलोभन और भय उन पर भारी पड़ता है. यह अध्याय निर्भयता, आत्म-समर्पण और धार्मिक समाज के दबाव के बीच धर्म-साक्षी बनने के कठिन रास्ते का चित्रण करता है.
main spiritual lesson
मुख्य पाठ यह है कि लोग अक्सर अपने वचनों में साहस दिखाते हैं, पर असली कसौटी तब होती है जब परीक्षण सामने आता है. विश्वास का असली परीक्षण तब दिखता है जब भय के समय एक व्यक्ति क्यों और कैसे अपने विश्वास पर अडिग रहता है. यीशु एक साथ उनकी कमजोरियों को भी संभालने की योजना बताता है—परिश्रम, प्रार्थना और समुदाय की भूमिका, ताकि भीतर से प्रेरणा बनी रहे.
cross-references with brief notes
इन क्रॉस-वर्सों से समझ आता है कि विश्वास एक गतिशील क्रम है—शुरुआत में कमजोरियाँ हो सकती हैं, पर परिश्रम और ईश्वर की कृपा से परिवर्तन संभव है.
careful application
brief historical-theological note
पौराणिक-आध्यात्मिक आयाम में यह दृश्य दर्शाता है कि न सिर्फ चमत्कारिक चढ़ाव, बल्कि मानव दुर्बलताएँ भी यीशु के साथ चलती हैं. यह कुरआन नहीं है—बल्कि वास्तविक जीवन का संघर्ष है जिसमें पित्र-धर्म और विश्वास की गहराई पर विचार किया जाता है. जिनके भीतर ईश्वर का अनुशासन है वे गलती करते हुए भी उसे स्वीकार कर आगे बढ़ते हैं.
concise summary
मरकुस 14:31 में कहा गया, “यदि मुझे तेरे साथ मरना भी पड़े फिर भी तेरा इन्कार कभी न करूँगा”—यह प्रेरितों की शुरुआत में दिखने वाली बहादुरी और बाद के दौर की भयावह परीक्षा के बीच की दूरी को दिखाता है. यह提醒 देता है कि विश्वास को सच्चाई के साथ निभाने की कोशिश में मानव कमजोरी आ सकती है; फिर भी ईश्वरीय दया और प्रार्थना के साथ पुनः जागना संभव है.
नोट: ज्ञात प्रकाशनों के अनुसार 19वीं-शताब्दी के पवित्र-लेखक Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के शब्दों से संक्षेप उद्धरण आवश्यक हो तो नीचे दिए गए बिंदुओं के साथ शामिल किए जा सकते हैं, परंतु यह मूल विचारों का संक्षेप है, पूर्ण-उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है:
यहाँ सीधे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं, पर उनके दृष्टिकोण ने प्रेरित-आत्म-संयम, पाप-गुण, और यीशु के साथ जुड़ाव के महत्व को स्पष्ट किया है—जिनका सार ऊपर के विवेचन में समाहित है.