Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 14:1 मरकुस 14:2 मरकुस 14:3 मरकुस 14:4 मरकुस 14:5 मरकुस 14:6 मरकुस 14:7 मरकुस 14:8 मरकुस 14:9 मरकुस 14:10 मरकुस 14:11 मरकुस 14:12 मरकुस 14:13 मरकुस 14:14 मरकुस 14:15 मरकुस 14:16 मरकुस 14:17 मरकुस 14:18 मरकुस 14:19 मरकुस 14:20 मरकुस 14:21 मरकुस 14:22 मरकुस 14:23 मरकुस 14:24 मरकुस 14:25 मरकुस 14:26 मरकुस 14:27 मरकुस 14:28 मरकुस 14:29 मरकुस 14:30 मरकुस 14:31 मरकुस 14:32 मरकुस 14:33 मरकुस 14:34 मरकुस 14:35 मरकुस 14:36 मरकुस 14:37 मरकुस 14:38 मरकुस 14:39 मरकुस 14:40 मरकुस 14:41 मरकुस 14:42 मरकुस 14:43 मरकुस 14:44 मरकुस 14:45 मरकुस 14:46 मरकुस 14:47 मरकुस 14:48 मरकुस 14:49 मरकुस 14:50 मरकुस 14:51 मरकुस 14:52 मरकुस 14:53 मरकुस 14:54 मरकुस 14:55 मरकुस 14:56 मरकुस 14:57 मरकुस 14:58 मरकुस 14:59 मरकुस 14:60 मरकुस 14:61 मरकुस 14:62 मरकुस 14:63 मरकुस 14:64 मरकुस 14:65 मरकुस 14:66 मरकुस 14:67 मरकुस 14:68 मरकुस 14:69 मरकुस 14:70 मरकुस 14:71 मरकुस 14:72



सारांश Meaning in Hindi
मरकुस 14:35 में यीशु भय और दुःख के क्षणों में गहरी प्रार्थना करते हैं और अगर संभव हो तो इस समय को टाला जा सके, ऐसा विनम्र और आर्त निवेदन करते हैं। यह दृश्य संकेत देता है कि प्रभु ईसा मसीह मानव अवस्था में शारीरिक दर्द, आंतरिक डर, और पिता के उद्देश्य से मिलने वाले परीक्षा के सामने कैसे संघर्ष करते हैं, फिर भी ईश्वर की इच्छा के प्रति पूर्ण समर्पण बनाए रखते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना गलीलि से यरूशलेम जाते समय गेदसेमनी के मैदान में घटित होती है, जहां यीशु अपने चेलों के साथ प्रार्थना कर रहे हैं। अन्तिम क्रूस की तैयारी के समय यह एक अत्यंत तनावपूर्ण क्षण है—युद्ध, Betrayal, और क्रूस के भय के बीच यीशु अपने पिता के लिए श्रद्धा और निर्भीकता निभाते हैं।
विश्लेषणात्मक बिंदु
मूल पंछियाँ/सूत्रधार
लेखन में प्रेरित गहराई यह दिखाती है कि सच्ची प्रार्थना बिना डर के नहीं, बल्कि डर के साथ भी ईश्वर के साथ ईमानदार संवाद है।
कथा से जुड़ी सूक्तियाँ (Cross-references) और छोटा स्पष्टीकरण
- मत्ती 26:39: ऐसा ही दृश्य, जहाँ यीशु पिता के सामने अपनी इच्छा को प्रस्तुत करते हैं, परन्तु इससे भी सामर्थ्यपूर्वक पिता की इच्छा मान्य करते हैं। यह एक समान पाठ है जो प्रसंगात् विश्वास और स्व-त्याग पर बल देता है।
- लूका 22:42: “मेरे मन में अधिक पीड़ा है” के साथ, यीशु का आर्त-दृष्टिकोण और ईश्वर-स्थिति के साथ समन्वय स्पष्ट होता है।
- यूहन् 6:38: पिता की इच्छा के अनुरूप जीवन का उद्देश्य—यही सबसे बड़ा प्रेरक है।
पाठ के विषयगत निष्कर्ष (Thematic Takeaway)
संक्षिप्त practical application
आज के संदर्भ में हम भी सामना कर रहे जोखिम, चिंताओं या किसी बड़े निर्णय से गुजरते समय ईश्वर से सच्चे दिल से माँग कर सकते हैं—पर अंतिम समर्पण, यानी उसकी योजना को स्वीकारना ही हमारी प्रेरणा होनी चाहिए।