Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मरकुस 14:28 पर टीका (HINIRV)
यह पद निर्गमन के अंश में भारतीय मिश्रित कथा-संदर्भ में येसू के पवित्र कर्मों की योजना की स्मृति कराता है। उस समय यीशु को गिरफ्तारियों और क्रूस के पूर्व दुःखद अनुभव होने वाले थे; परन्तु वह अपने शिष्यों को भयमुक्त करते हुए भविष्य के उद्धार की गारण्टी देता है। वह (पीटर आदि के) दृढ़-आत्मविश्वास को तुष्टि करते हैं कि वे गलील जाएँगे और वहाँ उनसे मिलेंगे, क्योंकि उनके कार्यों का केंद्र और आरम्भ वह स्थान है। यह वाक्य उसी आश्वासन को पुनः पुष्ट करता है कि व्यग्र परिस्थितियों में भी परमेश्वर की देहली और योजना पीछे से नहीं हटती।
मुख्य अर्थ
येसु कह रहे हैं कि मृत्यु-यात्रा और क्रूस के बाद वह जी उठेंगे और फिर गलील में उनके अनुयायियों से मिलेंगे। यह प्रोत्साहन है कि विनाशकारी घटनाओं के बीच भी परमेश्वर की योजनाएं पूरी होती हैं और उनका मध्य-स्थल आशायघाटा नहीं बनता। यह वाक्य शिष्यों के लिए एक दृष्टांत है—जीवन के मौसम कितने भी कष्टदायक हों, प्रभु का उद्धार अभियान स्थिर रहता है और वह अपने लोगों को पुनः मिलने की आशा देता है।
कुंजी विषय
अन्य संदर्भ और उनके जोड़
– माता-पिता-नज़र: मत्ती 26:32 और लूका 24:6-7 जैसी जगहों पर भी यीशु अपने पुनर्जीवन और गलील में मिलने की बात करते हैं, जो इस वाक्य की पुष्टि करते हैं कि उद्धारक की यात्रा केवल क्रूस तक सीमित नहीं है।
– प्रेरणा के लिए आस्था: यूहन्ना 14:3 में यीशु अपने चेलों से मिलने के लिए तत्पर रहते हैं—यह मिलन का सार वही विचार प्रस्तुत करता है।
व्यावहारिक विचार
आज के पाठक के लिए यह संदेश है कि जीवन में अस्थिरता और त्रासदी के बीच भी ईश्वर की केंद्रीय योजना नहीं टूटती। किसी भी संकट में विश्वास करें: प्रभु का पुनः मिलना और उद्धार का संदेश हमारे साथ बना रहता है। अपने दुखों के समय भी परमेश्वर के वचन पर भरोसा रखें और समुदाय के साथ पुनः मिलन की आशा को बनाए रखें।
संक्षेप
मरकुस 14:28 में यीशु अपनी मृत्यु-यात्रा के बाद जी उठकर गलील में मिलने की बात कहकर शिष्य-विश्वास का पुनरुद्बोधन करते हैं। यह संदेश है कि क्रूस के बाद भी ईश्वर की योजना सक्रिय है—उद्धार का मार्ग पुनः शुरू होता है और मिलन का प्रमाण देता है।
यदि आप चाहें, तो आप Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पुराने पंजीकृत विचारों से संकाय-सार जोड़कर विस्तृत संदर्भ देख सकते हैं; नीचे छोटे उद्धरण केवल आवश्यक, ताकि मकसद स्पष्ट रहे:
“परन्तु मैं अपने जी उठने के बाद तुम से पहले गलील को जाऊँगा”—ए. बार्न्स कहते हैं कि यीशु ने स्पष्ट किया कि जुदाई के दुख के बावजूद उद्धार का क्रमपूर्वक आगमन है।
Cross-references (संक्षेप): मत्ती 26:32; लूका 24:6-7; यूहन्ना 14:3।