Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 15:1 मरकुस 15:2 मरकुस 15:3 मरकुस 15:4 मरकुस 15:5 मरकुस 15:6 मरकुस 15:7 मरकुस 15:8 मरकुस 15:9 मरकुस 15:10 मरकुस 15:11 मरकुस 15:12 मरकुस 15:13 मरकुस 15:14 मरकुस 15:15 मरकुस 15:16 मरकुस 15:17 मरकुस 15:18 मरकुस 15:19 मरकुस 15:20 मरकुस 15:21 मरकुस 15:22 मरकुस 15:23 मरकुस 15:24 मरकुस 15:25 मरकुस 15:26 मरकुस 15:27 मरकुस 15:28 मरकुस 15:29 मरकुस 15:30 मरकुस 15:31 मरकुस 15:32 मरकुस 15:33 मरकुस 15:34 मरकुस 15:35 मरकुस 15:36 मरकुस 15:37 मरकुस 15:38 मरकुस 15:39 मरकुस 15:40 मरकुस 15:41 मरकुस 15:42 मरकुस 15:43 मरकुस 15:44 मरकुस 15:45 मरकुस 15:46 मरकुस 15:47



Verse meaning in one line
मरकुस 15:22 में यीशु को गुलगुता नामक स्थान पर लाकर क्रूस पर सूली चढ़ाने की प्रक्रिया आरंभ की गई; “खोपड़ी का स्थान” का यह नाम भौगोलिक संकेत के साथ ही प्रतीकात्मक संकेत देता है कि दुष्कर पथ और मृत्यु की स्थिति यहाँ से शुरू होती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वाक्य मरकुस के धार्मिक-यात्री चित्रण का भाग है जिसमें यीशु की गिरफ्तारी और क्रूस की यात्रा का आरंभिक क्षण आता है। गुलगुता वह जगह है जिसे पुराने नियम के संदर्भों में सुलह-स्थल के रूप में भी देखा गया है, और “खोपड़ी का स्थान” शब्द से यह संकेत मिलता है कि यह क्रूरता और मृत्यु का प्रतीक बन गया है। during यह घटनाक्रम, पवित्र ग्रंथ में दिखाया जाता है कि लोग किस प्रकार यीशु के साथ अन्यायपूर्ण यातना के मार्ग पर चलते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संक्षिप्त थीमेटिक पॉइंट
अन्य संबंधित पाठ/उद्धरणसंग्रह
नीचे के संदर्भ यीशु के क्रूस-यात्रा के broader महत्व से जोड़ते हैं:
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जो कुछ भी हमारे जीवन के कठिन क्षण बनें, वे प्रभु यीशु के लिए दिए गए मार्ग के स्मरण-चिन्ह बनते हैं: धैर्य, विनम्रता, और परमेश्वर की योजना पर निर्भरता। कठिन परिस्थितियों में भी विश्वास द्वारा हम उद्धार के पथ पर चलने की प्रेरणा पाते हैं।
न्यायपूर्ण उद्धृत टिप्पणी (सरल सार)
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से आवश्यक सार यह है कि गुलगुता-स्थल पर यीशु की पेशकदमी क्रूस तक की प्रक्रिया का प्रतीक है, जहाँ मानव-निर्णय और परमेश्वर की महिमा एक साथ स्पष्ट होते हैं। जहां आवश्यक हो, नीचे उनके संक्षिप्त शब्दावली संकेत दिए जाते हैं:
Note: यदि उपलब्ध हो, नीचे उद्धृत स्पष्ट संक्षेप में से किसी एक पंक्ति का संकेत दिया गया है: “यह स्थान पुण्य के निर्विवाद प्रतीक के रूप में है”—यह बिंदु उन्हीं पुरालेखों के बाहर सीधे उद्धरण नहीं बल्कि उनके सिद्धांत को गीत-भाव में व्यक्त करता है।
cross-references
- मरकुस 15 के अन्य पद: क्रूस के मार्ग की तैयारी और पीड़ा का क्रम।
- मत्ती 27:33-34: गुलगुता के स्थान पर यीशु का परीक्षण और यातना।
- लूक 23:33-34: क्रूस केपरिप्रेक्ष्य में प्रेम और धैर्य।
उद्धृत टिप्पणीकारों के शब्द यदि उपलब्ध हों, तो केवल वही छोटे-आकस्मिक उद्धरण के रूप में दिए जाते हैं: “...”