Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मरकुस 15:29 का अर्थ और संदर्भ
सीधे शब्दों में यह पाठ कहता है कि मार्ग पर आगे बढ़ते लोग यीशु के बारे में उलाहना देते हैं और उनका उपहास करते हैं: वे कहते हैं कि मन्दिर के ढांचे (ढाने) को तीन दिन में बनानेवाला कौन है। यह निन्दा और शरारत का प्रमाण है कि लोग दाम्भिक और कठोर मन से यीशु के भविष्यवाणी-कार्य को देखते हैं, परन्तु यह भी दर्शाता है कि लोग प्रत्यक्ष चिह्नों के पीछे असली उद्देश्य नहीं देख पाते।
पृष्ठभूमि
मरकुस का लेखन यीशु के पवित्र परमेश्वर के पुत्र होने के संदेश और क्रूस तक पहुँचने के मार्ग को उजागर करता है। यहाँ लोग लोग-कलह में लगे होते हैं—उनके ताने, “तीन दिन में बनानेवाले” जैसी शब्दावली यह संकेत देती है कि वे यीशु की भविष्यवाणी के महत्व को तिरस्कृत करते हैं और उसकी मसीही पहचान को अस्वीकार करते हैं। यह घटना क्रूस तक की तैयारी के समय घटित होती है, जब खलल और विरोध बढ़ रहा है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
1-2 छोटे विचार (थीमैटिक इनसाइट)
अन्य पवित्र संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
यीशु के साथ विरोध के संदेश के साथ मिलकर, नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंस से समझ बढ़ती है:
खंड-नोट्स (धार्मिक सिद्धांतों से जुड़ा संक्षेप)
यह पाठ सिखाता है कि मसीह के जीवन-यात्रा को मानवीय आवेगों और आलोचनाओं से अलग समझना चाहिए। परमेश्वर की योजनाएं साधारण अनुमान से परे होती हैं, और विश्वास उसे स्वीकार करता है जो प्रभु की योजना को पहचानता है।
व्यावहारिक takeaway
कठोर आलोचना के समय भी ईश्वर की दृष्टि को नज़रअंदाज़ न करें; अपने विश्वास को परमेश्वर के उद्देश्य की दिशा में दृढ़ रखें।
मूल उद्धरणों के निष्कर्ष
इस पाठ के क्रिया-क्रम में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरणों से संक्षेपित उपयुक्त तत्त्व मिलते हैं: वे संकेत करते हैं कि लोग मसीह के महान उद्देश्य को समझ नहीं पाते, और यह कि क्रूस-यात्रा के वक्त शाब्दिक व्यंग्य के पीछे गहन धार्मिक अर्थ होते हैं। यदि इनके सीधे शब्द उद्धरित मिलते हैं, तो वे पाठ के अधिक गहरे भाव को प्रकट करते हैं: “यह उद्घोषणा कि वे तीन दिन में बनाएंगे” एक निन्दात्मक व्यंग्य है जो मौलिक चिह्नों की व्याख्या से अलग है।