Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मरकुस 15:25 का स्पष्ट अर्थ
इस पदकथा में कहा गया है कि "और एक पहर दिन चढ़ा था, जब उन्होंने उसको क्रूस पर चढ़ाया"। सरल शब्दों में यही दिखाता है कि यीशु को बारह से अधिक घंटों के भीतर, दिन के मध्य में क्रूस पर चढ़ाया गया था—एक निर्धारित और निश्चय समय पर पूरा किया गया दिव्य उद्देश्य। यह क्रूस की परीक्षा और 完ि प्रतीक है, कि परमेश्वर द्वारा नियत समय पर पाप की ज्वाला से उद्धार का कार्य शुरू हुआ।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मरकुस के Gospel में यीशु के जीवन-कार्य का उद्देश्य सार्वजनिक रूप से क्रूस तक ले जाना है। पलों के क्रम में यह वाक्या तब आता है जब धार्मिक नेताओं के विरुद्ध गतिशील संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंचता है और रोम के प्रशासन के अधीन यह जिम्मेदारी पूर्ण होती है। इस घटना के समय का संकेत “पहर दिन” यह दर्शाने के लिए है कि यह क्रिया पूरी ईश्वरीय योजना के अनुसार, एक निश्चित समय पर संपन्न होती है।
हिंदी टिप्पणीकारों की संवेदनशील व्याख्या
Matthew Henry के आधारभूत विचार: यह क्रिया दिखाती है कि उद्धार का कार्य परमेश्वर के समय-सारिणी के अनुसार होता है; मानव विरोध के बावजूद परमेश्वर का क्रोध और प्रेम दोनों क्रूस पर मिलकर पूरे पाप के लिए चुकता बनते हैं।
Albert Barnes के विचार: क्रूस पर चढ़ाना यह बताता है कि शत्रु चाहे सशक्त हों, पर परमेश्वर की योजना से बाहर नहीं जा सकते; यह घटनाक्रम यीशु के पवित्रता और उनके नवीन करुणा-कार्य की पुष्टि है।
Adam Clarke के विचार: क्रूस पर चढ़ाने की समय-सारिणी में यह दिखाया गया है कि उद्धार के मार्ग में प्रतिरोध एक वास्तविक तथ्य है, पर ईश्वर की सत्ता और नियंत्रण उसके उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम है।
संरचनात्मक दृष्टिकोण: प्रायः बातें
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षिप्त अर्थ
1) मरकुस 15:16-25 के भीतर एक क्रम से यीशु की निंदात्मक परीक्षा और क्रूस की यात्रा स्पष्ट होती है, जो यह स्थापित करता है कि सब कुछ परमेश्वर के नियोजन के अनुसार घट रहा था।
2) मत्ती 27:26-31 में क्रूस पर चढ़ाने की कथा और इशारा स्पष्ट है—मूल कारण आत्म-बलिदान का है।
3) यूहन्ना 19:16-18 में दर्शाया गया है कि यीशु ने स्वयं अपनी इच्छा से क्रूस को लिया, ताकि पाप का भुगतान पूरा हो सके।
व्यावहारिक takeaway
प्रत्येक विश्वासी के लिए यह स्मरण कराता है कि कठिन समय और पीड़ा भी परमेश्वर की योजना के भीतर है; विश्वास करें कि उद्धारकर्ता ने प्रेम-निर्वाण के लिए पूर्ण बलिदान दिया। हमारी प्रतिक्रियाएं—धैर्य, विश्वास, और प्रेरणा—इस क्रॉस-आधारित सच्चाई से बनती हैं।
कुल मिलाकर, यह पंक्ति परमेश्वर की योजना के नियत समय और प्रेम के अटूट सच को दर्शाती है: क्रूस पर चढ़ना उद्धार का प्रतिफल है, जिसे ईमानदारी से स्वीकारना हमें नई जिंदगी की दिशा देता है।