Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 6:1 मरकुस 6:2 मरकुस 6:3 मरकुस 6:4 मरकुस 6:5 मरकुस 6:6 मरकुस 6:7 मरकुस 6:8 मरकुस 6:9 मरकुस 6:10 मरकुस 6:11 मरकुस 6:12 मरकुस 6:13 मरकुस 6:14 मरकुस 6:15 मरकुस 6:16 मरकुस 6:17 मरकुस 6:18 मरकुस 6:19 मरकुस 6:20 मरकुस 6:21 मरकुस 6:22 मरकुस 6:23 मरकुस 6:24 मरकुस 6:25 मरकुस 6:26 मरकुस 6:27 मरकुस 6:28 मरकुस 6:29 मरकुस 6:30 मरकुस 6:31 मरकुस 6:32 मरकुस 6:33 मरकुस 6:34 मरकुस 6:35 मरकुस 6:36 मरकुस 6:37 मरकुस 6:38 मरकुस 6:39 मरकुस 6:40 मरकुस 6:41 मरकुस 6:42 मरकुस 6:43 मरकुस 6:44 मरकुस 6:45 मरकुस 6:46 मरकुस 6:47 मरकुस 6:48 मरकुस 6:49 मरकुस 6:50 मरकुस 6:51 मरकुस 6:52 मरकुस 6:53 मरकुस 6:54 मरकुस 6:55 मरकुस 6:56



सार सार: उनका विश्राम का निमंत्रण
मरकुस 6:31 का अर्थ है—येसु ने अपने शिष्यों को एकाएक भीड़ के बीच खोले बिना एकान्त स्थान में जाकर थोड़ा विश्राम करने को कहा। वे जान रहे थे कि अत्यधिक प्रवेश और सेवा के कारण उनके पास मानसिक और शारीरिक सरल विश्राम नहीं बचा था।
पृष्ठभूमि संक्षेप
येसु के समय प्रेरितों के साथ अनेक लोग आते-जाते रहते थे। गाँव-गाँव में चमत्कार, शिक्षण और पूजा के अवसर उनसे मिलने थे, जिससे कभी-कभी अनेक अधिक चुकते थे। यीशु ने प्रेरितों के लिए एक अवसर स्पष्ट किया कि वे भी एक ठहराव और विश्राम के पात्र हैं, ताकि वे फिर से सेवकाई में नए ऊर्जा से उठ सकें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु
संदर्भित पाठ के प्रभावी जुड़ाव
Related passages (संक्षेप में कारण सहित):
व्यावहारिक निष्कर्श
हम प्रतिदिन की सेवा-कार्य में भी समय तक विश्राम और पुनः ऊर्जा संजोना सीखें। विश्राम केवल शरीर का राहत नहीं, मानसिक और आध्यात्मिक उर्जा की पुनर्स्थापन है जिससे हम सेवकाई में फिर से पूर्ण समर्पण दे सकें।
किताब-परिचय से कुछ उद्धरण (महत्वपूर्ण और संक्षेप)
यदि उपलब्ध हो तो नीचे दिए गए सन्दर्भ से प्रेरणा लें। इनमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कुछ छोटे, आयतन-रूपी कथन संकेत स्वरूप उद्धृत हैं:
Matthew Henry: “विश्राम के बिना सेवकाई दक्ष नहीं रहती”; Albert Barnes: “पकड़कर विश्राम लेने से थका हुआ सेवक नया जोश पाता है”; Adam Clarke: “यथासंभव एकांत में विश्राम आवश्यक है ताकि अगला चरण संयत होकर पूरे हो।”
नोट: उपरोक्त उद्धरण केवल उनके तात्विक विचारों का संक्षेप-प्रस्ताव है; पूर्ण पाठ उनके मूल प्रिंट में देखें।
टिप्पणी के संदर्भ
1) मरकुस 6:31 के आसपास के घटनाक्रम में यह संकेत मिलता है कि यीशु और उनके शिष्य समुदाय में भावनात्मक और शारीरिक थकान थी, जिसे एकान्त समय से दूर किया गया।
2) प्रेरितों की भूमिका—घटना बताती है कि सेवकाई एक सामूहिक प्रयास है जिसमें विश्राम और पुनः उर्जा एक दूसरे के पूरक हैं।
3) पाठ का एकीकृत संदेश यह कि धार्मिक गतिविधियाँ संतुलित जीवन-नीति के साथ ही प्रभावी हो सकती हैं।