Old Testament
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मरकुस 6:1 मरकुस 6:2 मरकुस 6:3 मरकुस 6:4 मरकुस 6:5 मरकुस 6:6 मरकुस 6:7 मरकुस 6:8 मरकुस 6:9 मरकुस 6:10 मरकुस 6:11 मरकुस 6:12 मरकुस 6:13 मरकुस 6:14 मरकुस 6:15 मरकुस 6:16 मरकुस 6:17 मरकुस 6:18 मरकुस 6:19 मरकुस 6:20 मरकुस 6:21 मरकुस 6:22 मरकुस 6:23 मरकुस 6:24 मरकुस 6:25 मरकुस 6:26 मरकुस 6:27 मरकुस 6:28 मरकुस 6:29 मरकुस 6:30 मरकुस 6:31 मरकुस 6:32 मरकुस 6:33 मरकुस 6:34 मरकुस 6:35 मरकुस 6:36 मरकुस 6:37 मरकुस 6:38 मरकुस 6:39 मरकुस 6:40 मरकुस 6:41 मरकुस 6:42 मरकुस 6:43 मरकुस 6:44 मरकुस 6:45 मरकुस 6:46 मरकुस 6:47 मरकुस 6:48 मरकुस 6:49 मरकुस 6:50 मरकुस 6:51 मरकुस 6:52 मरकुस 6:53 मरकुस 6:54 मरकुस 6:55 मरकुस 6:56



मरकुस 6:50 — तुरंत बोलकर धैर्य और विश्वास की पुकार
पद: क्योंकि सब उसे देखकर घबरा गए थे। पर उसने तुरन्त उनसे बातें की और कहा, “धैर्य रखो : मैं हूँ; डरो मत।”
स्थिति का परिचय
इस पाठ का संदर्भ जेरूस्लेम के पास की नाविक यात्रा के बाद सामने आता है, जब यीशु अपने चेलों के साथ एक छोटी नाव में थे और तूफान या असंतुलन के समय उनके मन डगमगा रहे थे। अचानक सब ने देखा कि यीशु उनसे बात कर रहा है—यह एक दृढ़ संकेत है कि भय के बीच वह उनका स्वागत करता है और उनकी सुरक्षा का भरोसा देता है।
यह पाठ क्या दर्शाता है
यह वाक्य प्रभु के दिव्य नियंत्रण और उनके साथ विश्वास की अहमियत पर प्रकाश डालता है। डर के समय भी, यीशु की उपस्थिति एक ठहराव और आशा का स्रोत है। उन्होंने तुरंत बातें कीं—यानी परमेश्वर की वस्तुस्थिति उनके बीच है और वे प्रेमपूर्वक उद्धार के लिए सक्रिय हैं। “धैर्य रखो: मैं हूँ; डरो मत” के साथ उनका यह हस्तक्षेप यह बताता है कि परमेश्वर अपने बच्चों के लिए भय को हराने वाला भरोसा-देशक है, जो परिस्थितियों से ऊपर है।
महत्वपूर्ण शब्दावली और चित्र
संबंधित संदर्भ
1) मरकुस 4:40 — यीशु ने चेलों से कहा, “तुम्हें कैसे डर गया?” यहाँ उसी भय के माहौल में विश्वास की चुनौती को संबोधित किया गया।
2) योहान्न 14:27 — “शांति तुम्हारे भीतर हो; मैं तुम्हें दे रहा हूँ; मैं नहीं देता जैसा दुनिया देती है।” यीशु की शांति-यात्रा भय पर विजय का उपाय बताती है।
3) יהושע 1:9 — “धैर्य रखो; न डरो और न घबराओ”—परमेश्वर के साथ साहस की प्रेरणा और मोड़ता है—यही संदेश इस पुकार में सम्मिलित है।
विश्वास में आज का अनुप्रयोग
आज के पथिक के लिए यह वचन एक स्मरण है कि जीवन के तूफान—आर्थिक चिंता, स्वास्थ्य-चिंता, या रिश्तों के विपरीत—उसके साथ भगवान की उपस्थिति है। जैसे यीशु ने कहा, “धैर्य रखो: मैं हूँ; डरो मत,” वैसे ही आज भी हमें कठिन परिस्थितियों में स्थिर रहने का साहस मिलता है। विश्वास की आंखों से देखें कि ईश्वर हमारे साथ है, वह हमारे भय को पराजित कर सकता है और हमें शांत करने वाला है।
एक संक्षिप्त समेकन
यह पाठ यह दिखाता है कि भय के बीच भी ईश्वर की उपस्थिति संदेश देती है कि वह हमारे साथ है, सुरक्षा प्रदान करता है और हमारे भीतर से भय को दूर कर देता है। आपातकाल में परमेश्वर की चेतावनी नहीं, बल्कि दयालु उद्घोषणा है: “मैं हूँ।” इस संदेश को अपने दिनचर्या में केंद्रित करें—धैर्य, सुरक्षा, और विश्वास की एकीकृत भाषा।
कृति-उद्धरण (उद्धरण के स्वरूप में):
“धैर्य रखो : मैं हूँ; डरो मत।” — मैथ्यू हेन्री, Albert Barnes, Adam Clarke से संरक्षित विचारों के अनुकूल रूप से समन्वित सार।